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जिस बीवी के लिए बच्चे को अगवा किया, वो तो उसकी बीवी थी ही नहीं

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 4:56 PM IST
जिस बीवी के लिए बच्चे को अगवा किया, वो तो उसकी बीवी थी ही नहीं
गुरुग्राम में किराए के मकान में रह रहे एक शख्स ने दिल्ली के अमन विहार से एक बच्चे को अगवा कर उसके परिजनों से फिरौती नहीं मांगी बल्कि कहा कि भगाकर ले जाई गई उसकी बीवी उसे लौटा दी जाए. कहानी का खुलासा हुआ तो अलग ही पेंच सामने आया.

गुरुग्राम में किराए के मकान में रह रहे एक शख्स ने दिल्ली के अमन विहार से एक बच्चे को अगवा कर उसके परिजनों से फिरौती नहीं मांगी बल्कि कहा कि भगाकर ले जाई गई उसकी बीवी उसे लौटा दी जाए. कहानी का खुलासा हुआ तो अलग ही पेंच सामने आया.

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  • Last Updated: August 9, 2019, 4:56 PM IST
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दिल्ली के अमन विहार में एक घर के आसपास शशिकांत कुछ देर से मंडरा रहा था. वह लगातार उस घर को देख रहा था. थोड़ी देर पहले उस घर के एक सदस्य ने शशिकांत से हाल चाल पूछे तो उसने सब ठीक होने की बात कही. घर के आसपास ही छह साल का एक बच्चा खेल रहा था लेकिन हर वक्त कोई न कोई वहां था. कुछ देर बाद बच्चा अकेला था और आसपास कोई नहीं. यही मौका था. शशिकांत बच्चे पर लपका, उसका मुंह बंद किया और उसे गोद में उठाकर वहां से फरार हो गया.

यह पिछली 30 जून का दिन था जब शशिकांत ने 6 साल के सोनू को अगवा किया. सोनू को लेकर शशिकांत अमन विहार से भागा तो सीधे मेट्रो स्टेशन पहुंचा और उसने रोते हुए सोनू को चॉकलेट, स्नैक्स जैसी कई चीज़ें देकर चुप करवाया. सोनू चूंकि शशिकांत को पहचानता था इसलिए वह उसे अंकल कह रहा था और घर से ऐसे लाने पर सवाल कर रहा था. शशिकांत ने सोनू को खाने-पीने की चीज़ें देकर घुमाने की बात कहकर फुसलाया और उसे साथ लेकर चला गया.

कुछ ही घंटों में शशिकांत गुरुग्राम के सिकंदरपुर में अपने किराए के मकान में सोनू के साथ पहुंच गया था. सोनू ने इस घर को देखकर फिर सवाल किए तो शशिकांत ने उसे चुप करने के लिए कभी कोई लालच दिया तो कभी डांट लगा दी. लंच के बाद उसने किसी तरह सोनू को फुसलाया तो सोनू सो गया. अब शशिकांत ने अपना फोन निकाला और सोनू के घर फोन लगाया. उधर, सोनू के घरवाले कुछ देर से सोनू के न मिलने को लेकर परेशान थे और उसे हर तरीके से तलाशने की कोशिश कर रहे थे.

सोनू के घर उसके पिता मोहन ने फोन उठाया तो शशिकांत ने कहा कि उनका बच्चा सोनू उसके कब्ज़े में है और अगर वो उसे ज़िंदा देखना चाहते हैं तो उसकी बात मान लें. यह सुनकर मोहन को हैरानी हुई और उसने कहा -

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मोहन : कौन बोल रहा है?
शशिकांत : सवाल मत करो, जवाब दो. आरती कहां है?
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मोहन : कौन आरती?
शशिकांत : मेरी बीवी आरती. वही आरती जिसे तुम्हारा भतीजा सूरज भगाकर ले गया था. अपने बच्चे को सही सलामत चाहते हो तो मेरी आरती मुझे वापस कर दो.
मोहन : हमें नहीं पता कि वो कहां हैं.
शशिकांत : सब पता है तुम्हें, और नहीं पता तो पता करो, सूरज से पूछो. दोबारा फोन करूंगा तो आरती का सही पता देना वरना सोनू को कभी देख नहीं पाओगे.

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इसके बाद शशिकांत ने फोन काट दिया. अब शशिकांत अपने कुछ संपर्कों को फोन कर रहा था और मन ही मन आगे की योजना बना रहा था. उसे सोनू को ज़्यादा देर साथ रखने को लेकर भी चिंता हो रही थी क्योंकि उसके पास कोई सोचा समझा प्लैन नहीं था. फिर भी उसने सोचा कि 24 घंटे तो लगेंगे ही. शशिकांत यह भी सोच रहा था कि यहां वह किराए से रहता है और अगर सोनू ने रोना या चीखना शुरू कर दिया तो आसपास के लोगों को शक भी हो सकता है.

इसी उधेड़बुन में शशिकांत ने ठान लिया था कि अगर सोनू ने शोर मचाने की कोशिश की तो वह उसका मुंह और हाथ पैर बांधकर पटक देगा. इसके लिए उसने रस्सियों और कपड़े आदि का इंतज़ाम सोनू के जागने से पहले ही कर रखा था. जैसा शशिकांत ने सोचा था, वैसा ही हुआ और सोनू उसके काबू में रहा. रात हो गई तो उसने सोनू को कुछ खाने को दिया और फिर उससे सोने को कहते हुए वादा किया कि अगली सुबह वह उसे घर छोड़ देगा.

सोनू के सो जाने के बाद शशिकांत आरती की यादों और सोनू की किडनैपिंग के प्लैन के बारे में सोचता रहा. बीच में उसकी नींद लगती रही और उचटती रही. 30 जून और 1 जुलाई की देर रात करीब 1 बजे उसके मकान के दरवाज़े पर दस्तक हुई और आधी नींद में जैसे ही शशिकांत ने वह दरवाज़ा खोला तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. सोनू को भी उस मकान से पुलिस ने अपने कब्ज़े में ले लिया.


पुलिस थाने में शशिकांत ने जब मोहन को पहले से बैठे देखा तो वह समझ गया कि मोहन ने पुलिस को बता दिया है कि पहले वह मोहन का पड़ोसी था. करीब एक साल पहले जब वहीं रहते हुए उसकी बीवी आरती को मोहन का 20 साल का भतीजा सूरज भगाकर ले गया था. पुलिस से शशिकांत ने यही कहा कि सूरज उसकी बीवी को भगाकर ले गया है और अपनी बीवी को वापस पाने के लिए ही उसने इस घर के बच्चे को अगवा किया.

पुलिस ने शशिकांत के इस बयान के बाद जब अगवा हुए बच्चे के परिवार से उसकी पत्नी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता. लेकिन सूरज का पता ठिकाना मिल चुका था. अगले दिन सूरज पुलिस के सामने आया और उसके साथ आरती भी थी. सलाखों के पीछे से यह देखकर शशिकांत चिल्लाया और उसने पुलिस से कहा कि वह सच कह रहा था कि इन लोगों ने उसकी बीवी को भगाकर कैद कर लिया है.

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पुलिस ने शशिकांत को चुप कराया और सूरज से सख़्ती से पूछताछ करने को थी कि तभी आरती ने कहानी सुनाई. आरती ने कहा कि वह शशिकांत की बीवी नहीं है. यह सुनकर पुलिस भी हैरान हो गई और शशिकांत की तरफ देखा तो शशिकांत ने बोला कि आरती झूठ बोल रही है. फिर आरती ने शशिकांत की तरफ देखकर कहा कि अब उसे सब सच बताना पड़ेगा तभी शशिकांत चुप होगा. यह सुनकर शशिकांत की आंखें नीचे झुक गईं और वह चुप हो गया.

आरती ने पुलिस को बताया कि वह शशिकांत की बीवी नहीं है. कुछ साल पहले शशिकांत उसे उसके घर से भगाकर ले आया था और अपने साथ रख रहा था. आरती ने कहा कि इस दौरान वह भाग तो नहीं सकी लेकिन उसकी दोस्ती सूरज के साथ हो गई. दोस्ती बढ़ गई और जब सूरज ने साथ देने का भरोसा दिलाया तो आरती अपनी मर्ज़ी से सूरज के साथ चली गई थी.

इस कहानी में आरती सहित कुछ किरदारों के वास्तविक नामों का खुलासा नहीं किया गया है लेकिन दिहाड़ी पर पेंटिंग का काम करने वाला 27 साल का शशिकांत पुलिस की गिरफ्त में है जिस पर एक बच्चे को अगवा करने का आरोप है.

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First published: July 11, 2018, 7:47 PM IST
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