कश्मीर जाना चाहते थे नौ दोस्त, टूर पर निकलने से पहले पहुंचे जेल

नौजवान दोस्तों के एक ग्रुप ने कश्मीर के लंबे टूर की योजना बनाई लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे. फिर पैसे जुटाने के लिए हत्या जैसे अपराध का रास्ता चुना, तो सबको जेलयात्रा करना पड़ी.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: November 29, 2018, 8:35 PM IST
कश्मीर जाना चाहते थे नौ दोस्त, टूर पर निकलने से पहले पहुंचे जेल
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: November 29, 2018, 8:35 PM IST
एक : इस बार तो कश्मीर और हिमाचल घूमा जाए.
दो : हां, और ऐसे दो-चार दिन नहीं बल्कि पूरे महीने भर.
तीन : यारो, हम 8 लोगों के एक महीने के कश्मीर टूर का खर्चा कितना होगा? सोचा है?
चार : हां यार, बहुत खर्च होगा. आगरा चलते हैं या भरतपुर.

एक : चुप बे. बार-बार ताजमहल देखने से तेरा थोड़े हो जाएगा. यार, जुगाड़ करते हैं ना.
पांच : सही है. कोशिश करके तो देखें कि कितने पैसे जुटा सकते हैं.

जहांगीरपुरी और भाल्स्वा डेरी इलाके के रहने वाले इन आठों दोस्तों ने पूरी शिद्दत से कश्मीर और हिमाचल के एक महीने के टूर की प्लैनिंग की. कहां रुकना था, खाने का इंतज़ाम और घूमने के स्पॉट्स, यानी हर बात पर गौर करते हुए सभी इस ट्रिप के लिए उतावले हो चुके थे. रिज़ू और रिज़वान ने सबसे पैसों का इंतज़ाम करने के लिए कहा. तभी ग्रुप के एक मेंबर का छोटा टीनेजर भाई भी ज़िंद पर अड़ गया कि वह भी इस टूर पर जाएगा.
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अब कुल लोग नौ थे. सबने अपने अपने घर-परिवार में बातचीत की और इस टूर के लिए अच्छी रकम मांगी. नौजवान दोस्तों के एक महीने के टूर की बात सब बड़ों के लिए बेतुकी थी. दो-चार दिन कहीं आसपास जाने की बात होती, तो मानी जा सकती थी लेकिन यह प्लैन तो सबके लिए बेसिरपैर की बात थी. सबको घर से 'न' सुनने को मिली.

ये तुम्हारे गैंग के जो लीडर हैं ना, रिज़ू और विशाल, ये तुम लोगों को बरगलाते हैं. तुम लोग इनकी ऊटपटांग बातों में आ जाते हो. क्या करोगे एक महीने तक? एक महीने में लोग पूरी दुनिया घूम आते हैं. बेवकूफ कहीं के. और तुम क्या अंबानी के घर पैदा हुए हो, जो अच्छे होटलों में रुकोगे और इस बेकार की मस्ती के लिए हम पैसे देंगे...


कुछ इसी तरह की बातें सबको अपने-अपने घरों से सुनने को मिलीं. टूर की प्लैनिंग करते हुए कश्मीर और हिमाचल की वादियों में घूमने की उमंग सबमें जाग चुकी थी इसलिए बजाय प्लैन कैंसल करने के, सब पैसों का इंतज़ाम किसी तरह से करने की जुगत में लग चुके थे.

दो : यारों जल्दी करना पड़ेगा, ठंड बढ़ गई तो बर्फ गिर जाएगी, सब रास्ते-शास्ते बंद हो जाएंगे.
छह : एक रास्ता है लेकिन थोड़ा खतरनाक है.
एक : तो हम लोग क्या कम खतरनाक हैं? हम भी तो खतरों के खिलाड़ी हैं. तू डरती क्यों है बोल.
छह : राजू ने बताया मुझे. यहीं एक बुड्ढा डॉक्टर रहता है. उसके घर में बहुत माल है. हमारा काम हो सकता है अगर उसके घर...
चार : अबे, पागल है क्या? यार ये तो डकैती-शकैती की बात कर रहा है. नहीं नहीं.
दो : क्या नहीं नहीं बे. अब पैसे तो चाहिए ही ना. और उसके घर में सड़ रहे हैं तो हमारे ही काम आ जाएंगे.

ज़्यादातर लोग इस लूट के प्लैन पर राज़ी थे और सिर्फ एक दो दोस्त ही इनकार कर रहे थे. बातचीत बढ़ी और सब तैयार हो गए. रिज़ू, रिज़वान और विशाल ने कहा कि वो सब इंतज़ाम कर लेंगे और डकैती के खास काम को भी अंजाम वही देंगे. बाकी सबको सिर्फ मदद करना थी. सब ये प्लैन बनाकर इधर-उधर हुए तो रिज़ू, रिज़वान, संध्या और विशाल और एक दो और दोस्तों ने मिलकर यह भी तय किया कि ज़रूरत पड़ी तो उस डॉक्टर का काम तमाम कर दिया जाएगा.

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अगले दिन पूरा प्लैन बना और अगले एक हफ्ते तक रेकी करना तय किया गया. मोहम्मद को उस डॉक्टर के घर और उसकी बेटी पर नज़र रखना थी. किसी को टिकट बुक करने की ज़िम्मेदारी दी गई तो किसी को गाड़ी का इंतज़ाम करने की. एक हफ्ते तक मोहम्मद और ग्रुप में जुड़े टीनेजर लड़के ने रेकी करने के बाद बताया.

वो डॉक्टर अपनी बेटी के साथ रहता है जो स्कूल में टीचर है. वो रोज़ाना स्कूल जाती है और उतने घंटों के लिए वो डॉक्टर घर में अकेला होता है. और उसके घर कोई ज़्यादा आता-जाता नहीं. घर में ताक-झांक करने से पता चला कि माल तो है...


अब नौ दोस्तों ने मिलकर इसी महीने करीब डेढ़ हफ्ते पहले उस डॉक्टर के घर हमला करना तय किया. जब डॉक्टर घर पर अकेला था, तब नौ के नौ चेहरे ढांककर उसके घर पर पहुंचे और धावा बोल दिया. कैश और गहने खोजने के चक्कर में पूरे घर को तहस-नहस करना शुरू कर दिया. इस बीच, उस डॉक्टर पर काबू पाने की कोशिश भी की गई. डॉक्टर मौका लगते ही चिल्लाने की कोशिश कर रहा था इसलिए रिज़ू, रिज़वान और विशाल ने मिलकर उसका गला घोंट दिया.

'अबे साले, ये तो मर गया!'
'तो तेरा बाप था क्या बे? मर गया तो क्या हुआ, अपना काम तो हो गया ना. चलो, निकलो यहां से सब.'

सब के सब कैश और गहने लेकर वहां से भागे जिनकी कीमत करीब 11 लाख रुपये थी. इतने में तो बड़े आराम से सबकी छुट्टियां कट सकती थीं. सबने माल को सेफ रखने की बात कहते हुए रात को टूर पर निकलना फिक्स किया और जहांगीरपुरी के अपने अड्डे पर मिलना तय किया. लेकिन, रात तक तो पुलिस जांच शुरू कर चुकी थी और डॉक्टर के एक पड़ोसी की निशानदेही पर पुलिस नौ दोस्तों के इस गैंग के एक लड़के तक पहुंच गई.

सख़्ती से पूछताछ हुई तो उसने जुर्म कबूल करते हुए पूरे कांड का पर्दाफाश कर दिया और अपने सभी दोस्तों का ठिकाना भी उगल दिया. आखिरकार टूर पर निकलने से पहले ही सभी पुलिस के हत्थे चढ़ गए. रिज़ू, रिज़वान, विशाल, संध्या, मोहम्मद, रियासत, राजू और अफरोज़ समेत वो नाबालिग लड़का भी गिरफ्तार कर लिया गया. कश्मीर के टूर पर जाते-जाते ये सभी जेल पहुंच गए.

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