हीर-रांझा: ये है जस्सी के प्यार और कत्ल की वो कहानी, जिस पर बनेगी फिल्म

टेम्पो में पहली नज़र में प्यार हुआ. टेलिफोन और चिट्ठियों से प्यार परवान चढ़ा. दोनों ने भागकर शादी की और जब यह सीक्रेट खुला तो कैनेडा में ऑनर किलिंग की साज़िश रची गई और पंजाब में सुपारी किलर्स ने कत्ल किया.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: March 12, 2019, 9:11 PM IST
हीर-रांझा: ये है जस्सी के प्यार और कत्ल की वो कहानी, जिस पर बनेगी फिल्म
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: March 12, 2019, 9:11 PM IST
'लोग कैंदे ने मांवां ठंडियां छांवां' यानी कहा जाता है कि मांएं ठंडी छांव की तरह होती हैं. इस प्रेम कहानी में एक मां अपनी बेटी की जान की दुश्मन बन बैठी. पंजाब की ज़मीन पर पनपी 'हीर रांझा' की इस प्रेम कहानी में खलनायक कैनेडा में थे और खून का खेल पंजाब में खेला गया. पिछले 19 साल से चल रही लड़ाई में इतने चौंकाते मोड़ हैं कि इस केस पर आधारित एक फिल्म बनने की तैयारी भी की जा रही है.

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मोबाइल फोन, सोशल मीडिया से कुछ पहले की इस कहानी में डिस्टेंस रिलेशनशिप के नाज़ुक मोड़ थे. वो टेलिफोन और चिट्ठियों का ज़माना था. साल 1994 में पंजाब की सर्दियों के मौसम में जस्सी हर साल की तरह अपने ननिहाल जा रही थी. लुधियाना के एक गांव तक जाने के लिए इस बार जस्सी के साथ टेम्पो में सुखविंदर उर्फ मिट्ठू भी सफर कर रहा था.



पहली नज़र में प्यार हो गया

जस्सी अपनी मां मलकीत और कुछ आंटियों के साथ थी और मिट्ठू अपने दोस्त के साथ था. जस्सी और मिट्ठू की आंखें चार हुईं और पूरे सफर में दोनों एक दूसरे को देखते रहे. मिट्ठू 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुका था और कबड्डी खिलाड़ी बन चुका था. ब्यूटीशियन बनने का इरादा कर रही जस्सी को देखकर ही लग रहा था कि उसे सिंगार का काफी शौक था. पूरे सफर के दौरान आंखों आंखों में दोनों के बीच प्यार हो रहा था. गांव पहुंचकर टेम्पो से उतरते हुए जस्सी ने मौका देखकर एक पर्ची मिट्ठू के हाथ में थमा दी.

'आय लव यू', पर्ची पढ़कर मिट्ठू की खुशी का ठिकाना न रहा. 'ओए मितरां, ये मैच तो एक ही पैंतरे में जीत लिया तूने.' मिट्ठू के दोस्त ने उसे बधाई दी और अब मिट्ठू के बेकरारी ऐसी थी कि जस्सी को देखे ​बगैर, उससे मिले बगैर उसे चैन नहीं था. जस्सी काफी दिन ननिहाल में रही और तकरीबन किसी न किसी बहाने से दोनों गांव में कहीं छुपकर मिलते रहे.

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'हम कैनेडा में रहते हैं. वहां खेती का बहुत बड़ा कारोबार है. मां के साथ मैं भी मामा के पास कैनेडा जाने वाली हूं.'
'हमारा दाना पानी तो यहीं है. ठीक ठाक कारोबार है. वैसे तुम चली जाओगी तो फिर बातचीत कैसे होगी?'

जस्सी ने एक टाइम फिक्स किया और मिट्ठू के दोस्त का टेलिफोन नंबर लिया. जस्सी कैनेडा पहुंचकर मिट्ठू के दोस्त के घर फोन करती थी. अगले फोन का वक्त तय करती थी और दोनों एक दूसरे को चिट्ठी लिखने का वादा भी करते थे. एक फोन पर जस्सी ने कहा 'तुम्हारे साथ जो वक्त बीता, आय चैरिश दोज़ मोमेंट्स अ लॉट...' इस सेंटेंस पर मिट्ठू ने कहा 'यस.' जस्सी हंसी और फिर मिट्ठू भी हंसा.

'ओए यारा, इसका मतलब क्या हुआ कि 'आय चैरिश दो मोमेंट?'
'अबे, इतनी अंग्रेज़ी आती तो कबड्डी खेलते हम? कालेज जाते, कलेक्टर बनते. वैसे, उसने बताया था ना कि कैनेडा में उसका चैरी का कारोबार है! शायद वही चैरी की कुछ बात बोल रही होगी..'
'ओए नहीं यार. चैरिश दो मोमेंट... किसी और से पूछना पड़ेगा.'

मिट्ठू को अंग्रेज़ी बहुत कम आती थी और जस्सी पंजाबी अटक के बोलती और अटपटी लिख पाती थी. प्यार में जब आंखें और दिल बात करते, तो भाषाओं की ये समस्या आड़े नहीं आती थी लेकिन हंसी मज़ाक के कुछ दिलचस्प पल ज़रूर बन जाते थे. चिट्ठियों और टेलिफोन के ज़रिये दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था. हर साल कुछ वक्त के लिए जस्सी अपने ननिहाल आती थी और साल में कुछ दिन दोनों की मुलाकात होती थी.

इस रिश्ते के आगे उस रिश्ते की क्या अहमियत थी?
साल 1999 में, कैनेडा में जस्सी की मां मलकीत और मामा बादेशा ने उसका रिश्ता एक बड़े खानदान के लड़के के साथ तय करने की बातचीत शुरू की. जस्सी ने इस रिश्ते का विरोध किया लेकिन वह खुलकर यह नहीं बता सकी कि वह मिट्ठू से प्यार करती थी. जस्सी को अंदेशा हो गया था कि मिट्ठू की मिडिल क्लास हैसियत की वजह से उसके साथ रिश्ता कबूल नहीं किया जाने वाला था. जस्सी ने मिट्ठू के साथ रिश्ते को पुख्ता बनाने के लिए जोखिम उठाया.

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सुखविंदर उर्फ मिट्ठू और जसविंदर उर्फ जस्सी.


इस बार जब वह छुट्टियों ने ननिहाल पहुंची तो उसने मिट्ठू के साथ शादी करने का फैसला ज़ाहिर किया. कुछ बातों से तो मिट्ठू वाकिफ था लेकिन उसे भी ये फैसला चौंका रहा था.

'लेकिन, इस तरह अचानक? मैं बात करता हूं तुम्हारी मां से...'
'नहीं मिट्ठू, तुम नहीं जानते मेरी मां को, मैं जानती हूं. मेरा मामा जो कहता है, वह सिर्फ वही करती है. और मेरा मामा बहुत ज़ालिम आदमी है. वो मुझे किसी और के पल्ले बांध देने की फिराक में हैं क्योंकि उनके लिए ये बिज़नेस है. बड़ा खानदान, बड़ी दौलत, ताकत... हमें शादी करनी होगी. तुम अपना मन बताओ. मुझसे प्यार है? शादी करोगे?'

दोनों ने अमृतसर जाकर चोरी छुपे शादी कर ली. जस्सी ने कहा कि वह कैनेडा में वक्त आने पर सबको इस शादी के बारे में बता देगी. किसी तरह मां को समझा लेगी, तब तक इस शादी को राज़ रखना होगा.

राज़ खुला तो जस्सी को भागना पड़ा
कैनेडा में जस्सी की शादी को लेकर लगातार मलकीत और बादेशा उस पर दबाव बना रहे थे. घर का माहौल कुछ ऐसा था कि जस्सी की बात सुनने को न मां तैयार थी और न मामा. जस्सी ने एक दिन दबाव बर्दाश्त न करते हुए राज़ खोल दिया कि उसने शादी कर ली थी. ये बात सुनकर मलकीत और बादेशा एक पल को हैरान हुए और अगले ही पल जस्सी की शामत आ गई.

अब जस्सी के साथ मारपीट करने और उसे घर में ही कैद कर देने की कवायद शुरू हुई. 'कहीं भी आना जाना बंद करो. मैं तो कहता हूं कि इसकी शादी कर देते हैं. ये पंजाब में क्या गुल खिलाकर आई है, यहां कनेडे में किसी को पता नहीं चलना.' जस्सी का मामा उसकी मां के साथ जस्सी की जबरन शादी की तैयारी कर रहा था. जस्सी कुछ भी ऐसी कानाफूसी सुनती तो अपने कमरे से ही चीख चीखकर विरोध करती. कभी रोती, कभी मां के सामने गिड़गिड़ाती.

जस्सी की हर पुकार अनसुनी होती रही और वह प्रताड़ना झेलती रही. वह एक मौके की तलाश में थी और मई 2000 में जस्सी को पता चला कि उसके मामा बादेशा ने पंजाब में अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए मिट्ठू के खिलाफ जस्सी के अपहरण और जबरन शादी करने का केस दर्ज करवा दिया तो जस्सी ने जोखिम उठाया और कैनेडा से भागने का इरादा कर लिया.

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मई 2000 में ही जस्सी भागकर पंजाब पहुंची. मिट्ठू से मुलाकात की और कोर्ट में जाकर जस्सी ने बयान दिया कि मिट्ठू बेगुनाह था और दोनों 24-25 साल की उम्र के वयस्क थे इसलिए मर्ज़ी से शादी गुनाह नहीं मानी जा सकती. अब जस्सी अपना घर छोड़कर मिट्ठू के साथ नयी ज़िंदगी बसाने चली आई थी. उधर, कैनेडा में मलकीत और बादेशा के सीनों पर सांप लोट रहे थे.

'मैं ये कर दूंगा, वो कर दूंगा... निकल गई सब हेकड़ी. वो बित्ते भर की कुड़ी चली गई तैनूं ठेंगा दिखा के!'
'तू फिक्र न कर. चली तो गई लेकिन हाथ से जाएगी नहीं. जिसके लिए उसने हमारी इज़्ज़त की धज्जियां उड़ाई हैं, उसके चीथड़े उड़ा देने हैं मैंने...'

फिर रचा गया कत्ल का प्लॉट
बादेशा ने कैनेडा में ही रहते हुए अपने सारे कॉंटैक्ट्स का इस्तेमाल किया. मिट्ठू और जस्सी को सबक सिखाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया और मिट्ठू पर अटैक की साज़िश तैयार की गई. पंजाब पुलिस में दारोगा जोगिंदर की मदद से कातिलों को हायर किया गया. बादेशा ने फोन पर सबके साथ प्लैन और डील फिक्स की.

इधर, जस्सी और मिट्ठू डरे सहमे हुए गांवों में छुपे छुपे रह रहे थे. उन्हें पूरा अंदेशा था कि उन पर हमला हो सकता था या किसी और झूठे ​केस में उन्हें पुलिस के चक्कर में फंसाया जा सकता था. साल 2000 में ही 7 जून को कैनेडा से मलकीत ने किसी तरह जस्सी से फोन पर बात की.

'ओए पुत्तर, ऐ की कीत्ता. चल कोई गल नहीं. अब जो तेरी खुशी, सो हमारी. तूने अपने मन की कर ली जस्सी, अब हमें अपने मन की करने दे. बड़े अरमान थे तेरी शादी के. तू आ जा पुत्तर. मैं सबको समझावांगी. धूमधाम से तेरी शादी करावांगी. तू बिल्कुल फिक्र न कर, मिट्ठू और तेरा ब्याह कायदे से होगा ताकि बिरादरी में हमारी नाक भी बचे रहे. हम गांव आ रहे हैं पुत्तर, तू आ जा.'

इस फोन कॉल के बाद जस्सी की सांस में सांस आई. 'लोग कैंदे ने मांवां ठंडियां छांवां, देखो आखिर मां मान गई. अब हमारी शादी भी और की तरह होगी मिट्ठू...' दोनों कई दिनों से भाग रहे थे और खौफज़दा होकर छुपे हुए थे. 8 जून को जस्सी के कहने पर दोनों बाज़ार गए और साथ में कॉफी पी. जस्सी ने रंग बिरंगी चूड़ियां, लिपस्टिक, झुमके और गजरे खरीदे. फिर दोनों अपने ठिकाने को लौटे.

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मिट्ठू स्कूटर चला रहा था और जस्सी पीछे बैठी बतिया रही थी. तभी, गांव से कुछ दूर सुनसान जगह पर एक कार के पास कुछ लोग खड़े हुए थे. उन्होंने स्कूटर रुकवाने की कोशिश की और मिट्ठू पर तलवार व रॉड से हमला किया. मिट्ठू के साथ ही जस्सी को भी रॉड लगी और वह गिरकर बेहोश होने लगी. मिट्ठू पर लगातार हमले किए जाते रहे. 'मत मारो उसे, छोड़ दो उसे...' इस तरह बड़बड़ाकर जस्सी बेहोश हो गई.

कुछ देर बाद हमलावरों ने मिट्ठू को पैरों से मारा तो उसमें कोई हरकत नहीं थी. 'मर गया साला, ले चलो कुड़ी को अपने साथ.' मिट्ठू को वहीं पास एक नाले में फेंककर ये हमलावर जस्सी को लुधियाना के बुलारा गांव के पास एक फार्महाउस में ले गए. वहां जस्सी को होश आया तो वह बेकदर चीखी. हमलावरों ने टेलिफोन पर कैनेडा में उसकी मां से बात करवाई.

'अब तू आजा पुत्तर. जो हो गया सो हो गया. तूने एक गलती कर ली, हमने गलती सुधार दी. अब सब कुछ पहले जैसा है.'
'तुमने धोखा दिया मुझे मां. मैं पुलिस को, मीडिया को, कानून को सबको चीख चीखकर बता दूंगी कि तुमने क्या किया. तुम्हारा असली चेहरा कितना घिनौना है मां.'

फिर हमलावर ने जस्सी से फोन छीन लिया और दूसरी तरफ से बादेशा ने मलकीत से फोन लिया. मलकीत और बादेशा ने फोन पर हुक्म दिया कि जस्सी को भी खामोश कर दिया जाए. हमलावरों ने कुछ ही देर में जस्सी का गला काट दिया. पूरे शरीर पर चाकुओं, तलवारों से हमले किए और लाश को पास के एक नाले में फेंक दिया.

जांच, तहकीकात और इंसाफ की लड़ाई
मिट्ठू उस हमले में मरा नहीं था. हमलावरों से ग़लती हुई कि उसे मरा हुआ मानकर छोड़ गए. वहां से गुज़र रहे लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया था और कई दिनों तक वह ज़िंदगी और मौत से जूझता हुआ बयान देने तक की हालत में नहीं था. उधर, जस्सी की लाश मिलने के बाद जब उसकी शिनाख़्त के लिए मलकीत और बादेशा से पुलिस ने कॉंटैक्ट किया तो दोनों ने उस लाश को पहचानने से इनकार कर दिया. बाद में, जब मिट्ठू होश में आया, तब उसने पूरी कहानी सुनाई और जस्सी की मां व मामा पर आरोप लगाया.

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सुखविंदर उर्फ मिट्ठू और जसविंदर उर्फ जस्सी.


अब पुलिस के सामने कई समस्याएं थीं. उस ज़माने में इंटरनेशनल कॉल्स को खंगाल पाना आसान नहीं था. दूसरी बात, कैनेडा से किसी आरोपी को भारत लाना पहाड़ तोड़ने जैसा मुश्किल था. पुलिस ने सालों तक तहकीकात की और पुख्ता सबूत जुटाए ताकि मलकीत और बादेशा पर मुकदमा चलाया जा सके. दूसरी तरफ, पिछले करीब 19 सालों में मिट्ठू इंसाफ की लड़ाई लड़ता रहा.

मिट्ठू की लड़ाई दोहरी थी क्योंकि बादेशा अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए इतने सालों में वक्त वक्त पर मिट्ठू के खिलाफ केस दर्ज करवाता रहा जो बाद में झूठे साबित होते रहे. बादेशा के समर्थक लोगों ने गांव और समाज में यह अफ़वाह फैलाने की कोशिश भी की कि मिट्ठू ने दूसरी शादी कर ली. लेकिन, मिट्ठू मीडिया के सामने आया और उसने जस्सी के इंसाफ के लिए अपनी लड़ाई की कहानी सुनाई.

कई हमलावरों को पहले ही सज़ा सुनाई जा चुकी थी लेकिन इस साल जनवरी में इस केस में निर्णायक मोड़ तब आया जब कैनेडा से दोनों आरोपियों मलकीत और बादेशा को हिंदोस्तान लाया गया और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाए जाने की शुरूआत हुई. एक तरफ कैनेडा सरकार ने पंजाब पुलिस को इस केस को सुलझाने के लिए सम्मानित किया तो दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने इस तहकीकात को केस स्टडी के तौर पर नए पुलिसकर्मियों को पढ़ाने का फैसला​ किया.

मलकीत और बादेशा के प्रत्यर्पण के बाद मिट्ठू ने मीडिया से कहा कि वह चाहता है कि जस्सी का कत्ल करवाने वाले बादेशा और मलकीत को कड़ी सज़ा मिले. उसने ​कहा कि लोकप्रिय पंजाबी गाना जस्सी को पसंद था 'आ सोणेया वे जग जिओंदियां दे मेले, ज़िंदगी तों लंबे तेरे झगड़े झमेले..' और यही उसका सच बनकर रह गया. मिट्ठू ने यह भी बताया कि कुछ पंजाबी फिल्ममेकरों ने उससे उसकी और जस्सी की कहानी पर फिल्म बनाने के सिलसिले में कॉंट्रैक्ट भी साइन किया है.

(यह कहानी मीडिया में रही खबरों पर आधारित है.)

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