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छोटी बच्चियां थीं शिकार, भंडारे थे शिकारगाह और उसकी एक लकी T-Shirt थी!

सांकेतिक चित्र

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गुड़गांव में तीन साल की बच्ची के साथ रेप और बेरहमी से हत्या का मामला सुर्खियों में रहा. आरोपी सुनील बासुरा को क्यों सबस ...अधिक पढ़ें

    पुलिस की आंखों में आंखें डालकर पूरी शिद्दत से वह हर सवाल का जवाब दे रहा था.

    पुलिस : शर्म आती है?
    मुल्ज़िम : नहीं.
    पुलिस : कोई पछतावा नहीं होता?
    मुल्ज़िम : नहीं.
    पुलिस : डर लगता है कि नहीं?
    उसका जवाब फिर वही था, 'नहीं'. उसकी आंखों में डर, शर्म, झिझक या क्रूरता कुछ भी नहीं था. खाली आंखें थीं. ज़िंदगी और मौत को लेकर उसके चेहरे की शून्यता हैरान ही नहीं बल्कि डरा देने वाली थी. 20 साल का एक आम-सा लड़का इतना भयानक कैसे हो सकता था? यही सवाल सबको परेशान कर रहा था.

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    मध्य प्रदेश से लगे उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले में एक छोटा सा गांव है गंज. इसी गांव में बड़ा हो रहा था सुनील. सुनील एक शांत लड़का था, जो किसी से बात नहीं करता था. सुनील क्या बल्कि उसका पूरा परिवार तकरीबन इसी तरह का था. सुनील का बाप एक बैंड पार्टी में ढोल बजाता था और बड़ा भाई कुछ आवारा लड़कों की सोहबत में नशा किया करता था.

    सुनील के खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं हुई. गांव में कभी किसी को उससे कोई तकलीफ नहीं हुई थी. एक ऐसे उजाड़ खंडहर में सुनील अक्सर अलग रहने लगा जिसमें कोई दरवाज़ा नहीं था. कभी-कभी उसकी मुलाकात बड़े भाई से होती तो उसका भाई उसे ड्रग्स के बारे में बताता और ड्रग्स लेने के लिए उससे कहता था. लेकिन, ड्रग्स नहीं, सुनील को शराब के नशे ने धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लिया.

    सुनील गांव के पास से निकलने वाली धसान नदी के किनारे बैठा कभी कभी दिखाई देता था. फिर एक दिन सुनील ने तय किया कि वह यह गांव छोड़ देगा. नौकरी की तलाश में वह गुड़गांव पहुंचा. यहां छोटे मोटे काम धंधे करते हुए उसने अपने खाने और पीने का बंदोबस्त किया. अकेलेपन से गुज़र चुके सुनील को यहां कई लोग दिखते थे, जो अक्सर उसे गालियां देती और उसका इस्तेमाल करना चाहती.

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    यहां सुनील नशे का शिकार होकर जीने लगा था तभी उसे अचानक एक खयाल आया. उसने मंदिरों और कॉलोनियों में अक्सर भंडारे होते देखे थे. इन भंडारों में काम करने वाले आदमी औरतों की तस्वीर उसके ज़हन में कौंध गई और यह भी कि उस दौरान उनके बच्चों पर किसी की नज़र नहीं होती. साल 2016 में ऐसे ही एक भंडारे में सुनील एक छोटी बच्ची को देखते हुए पहली बार ये सब सोच रहा था.

    सुनील ने उस पूरे दिन कई बार उस भंडारे की जगह जाकर लोगों की गतिविधियों, बच्चों के मूवमेंट और बच्चों के बिज़ी मां-बाप पर नज़र रखी. भंडारा चूंकि कई दिन चलने वाला था इसलिए अगली शाम सुनील नशे की हालत में फिर वहां पहुंचा. 6-7 साल की एक बच्ची को उसने चॉकलेट दी और अपने पास बुलाया.

    बच्ची : ये मेरे लिए है?
    सुनील : हां. मेरे पास बहुत सारी चॉकलेट हैं और मेरे बच्चों के पास खिलौने भी हैं. तुम्हें सब चाहिए तो पास ही मेरे घर चलकर खेलो.

    बच्ची सुनील के इन सब बातों को सुनकर अपनी धुन में उसके साथ चली गई. न कोई घर था, न बच्चे, एक सुनसान जगह पर सुनील उसे लेकर पहुंचा. यहां आकर बच्ची रोने लगी और वापस जाने की ज़िद करने लगी. सुनील ने उसे चुप होने को कहा लेकिन जब वह नहीं मानी तो सुनील ने उसे पीटना शुरू किया. बहुत पीटने के बाद जब वह बेसुध सी हो गई तब रात हो चुकी थी और सुनील ने उसके कपड़े फाड़कर उसके साथ बलात्कार किया.

    सुनसान जगह पर बच्ची की चीख और कराहें सुनने वाला कोई नहीं था और बच्ची को यह भी नहीं पता था कि उसके साथ क्या हो रहा था. बलात्कार के बाद बच्ची तड़प-तड़पकर कब सो गई, उसे पता ही नहीं चला. कुछ घंटों बाद रात के अंधेरे में ही बच्ची की आंख फिर खुली तो उसने वही दर्द महसूस किया. सुनील फिर उसके साथ बलात्कार कर रहा था. अब उस बच्ची के गले से चीखें फंसती हुई निकल रही थीं जो सुनने में बेहद कर्कश थीं.

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    बच्ची की कराहें जब सुनील से बर्दाश्त नहीं हुईं तो उसने उसका मुंह बंद कर दिया. बच्ची छटपटाती रही तो सुनील ने पास पड़े किसी पत्थर से उसके सिर पर चोट कर दी. फिर कई बार सुनील ने जो हाथ आया, उससे उस बच्ची को मारा. सुनील को यह एहसास ही नहीं था कि वह बच्ची मर चुकी थी. वहीं, कुछ कचरा और कबाड़ पड़ा था, कुछ देर बाद सुनील ने बच्ची की लाश को उसी में छुपा दिया. वहां से जाने से पहले सुनील अपनी नीली टीशर्ट को गौर से देखा कि खून उस पर तो नहीं लगा.

    एक-दो दिन बाद सुनील ने उसी भंडारे में जाकर फिर देखा कि वहां क्या चल रहा था. वहां जाकर उसे पता चला कि एक बच्ची गायब हुई लेकिन पुलिस समेत वहां किसी को कोई सुराग नहीं मिला कि बच्ची कहां और कैसे गायब हुई. अब सुनील को यह तरकीब ठीक लग गई कि भंडारों से इस तरह का शिकार किया जाना ठीक था. उसने यह भी तय कर लिया था कि वह छोटी बच्चियों को ही निशाना बनाएगा ताकि अगर बच्चियां छूट भी जाएं तो ठीक ठीक किसी को कुछ बता न सकें.

    इसके बाद गुड़गांव में 2016 से 18 के बीच उसने कुल तीन बच्चियों को इसी तरह शिकार बनाकर मार डाला. इसके अलावा, जब वह गुड़गांव से अपने गांव या कहीं और भी छुट्टी पर जाता था तो वहां भी ऐसा शिकार करता था. इन्हीं दो-तीन सालों में दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी उसने कम से कम 6 लड़कियों को अपना निशाना बनाया.

    सुनील के शिकारों के कुछ तरीके पुलिस के कुछ जांच अफसरों को समझ आ चुके थे. एक, धार्मिक भंडारे उसकी शिकारगाह थे. दूसरा, वह 3 से 8-9 साल तक की बच्चियों को निशाना बना रहा था. तीन, खास तौर से उन बच्चियों को, जिन पर उनके मां-बाप या किसी की निगरानी नहीं होती थी.


    पिछले साल नवंबर में गुड़गांव सेक्टर 66 में जब 3 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना सामने आई, तब पुलिस ने सुनील के बारे में तेज़ी से तफ्तीश कर जाल बिछाना शुरू किया. पुलिस ने दिल्ली, गुड़गांव और उत्तर प्रदेश में हो रहे भंडारों पर निगरानी रखने में लाखों रुपये खर्च किए.

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    सीसीटीवी की बदौलत एक संदिग्ध की तस्वीर भी पुलिस के हाथ लग चुकी थी और इस जाल में सुनील फंस गया. एक भंडारे से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. लेकिन, गिरफ्तार होने पर सुनील ने कुछ छुपाया नहीं बल्कि सब कुछ बगैर झिझके कह दिया, वह भी पूरी ढिठाई के साथ.

    सुनील : मैं पकड़ा गया क्योंकि उस दिन अपनी ब्लू कलर की लकी टीशर्ट नहीं पहनी थी. वरना, तुम लोग मुझे पकड़ नहीं पाते.
    पुलिस : पकड़ा तो जाता ही बे. तूने इतनी छोटी छोटी बच्चियों के साथ दरिंदगी की, सच बता, तुझे कोई अफसोस और डर नहीं है?
    सुनील : अफसोस करके क्या होगा? और अब डरने से भी क्या होगा?

    सुनील की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा भी आम है कि यह देश का वह सबसे निर्दयी सीरियल रेपिस्ट और किलर है जिसने बच्चों के खिलाफ अपराध को क्रूरता के साथ अंजाम दिया क्योंकि सुनील की शिकार गुड़गांव की 3 साल की बच्ची की हत्या से पहले बेहद क्रूरता के साथ बलात्कार होना पाया गया था. इस बच्ची के प्राइवेट पार्ट में एक छड़ मिली थी और इसका सिर व शरीर बुरी तरह से कुचला हुआ था.

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    Tags: Child sexual abuse, Delhi, Haryana news, Madhya pradesh news, Minor girl rape, Rape, Uttar pradesh news

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