गोली लगने के बाद वीनस चाहती थी एक बार मां को देखना

लंदन और पूरे ब्रिटेन में ड्रग्स डीलिंग करने वाली वीनस इस कारोबार को छोड़ना चाहती थी. जिन सरगनाओं के साथ वह ड्रग्स के कारोबार में लिप्त थी, उन्हीं में से एक ने वीनस पर हमला करवाया और गोली लगने के बाद वीनस की आंखों में उभरी मां की सूरत.

Bhavesh Saxena
Updated: May 17, 2018, 7:32 PM IST
गोली लगने के बाद वीनस चाहती थी एक बार मां को देखना
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena
Updated: May 17, 2018, 7:32 PM IST
“ये वनवे स्ट्रीट है. जिस धंधे में तुम दाखिल हुए हो वो भी ऐसी ही स्ट्रीट है. आदमी अंदर तो आ सकता है लेकिन बाहर नहीं जा सकता. हर धंधे के अपने-अपने कुछ कायदे हैं, क्या करें.” 1986 की बॉलीवुड फिल्म नाम में परेश रावल यह संवाद बोलते नज़र आते हैं जो इस फिल्म में युवाओं को ड्रग्स डीलिंग के धंधे में इस्तेमाल करने वाले सरगना के रोल में दिखे. ड्रग्स अपराधों की दुनिया एक वनवे है जिसमें दाखिल होने के बाद निकलने का रास्ता नहीं मिलता. यही हुआ वीनस के साथ. वीनस ने इस दुनिया को अलविदा कहना चाहा तो उसे गोली मार दी गई.

जब वीनस 14 साल की नहीं हुई थी तब वह देखती थी कि उसके परिवार के लोग कभी जेल में होते हैं तो कभी बाहर. उसके परिवार के लोग अलग-अलग गैंग्स के साथ भी जुड़े रहे. वीनस को यह सब अच्छा नहीं लगता था और एक दिन वह घर से भाग गई थी. लेकिन कुछ दिनों बाद वीनस घर लौट आई. फिर यह अक्सर की बात हो गई कि कभी भी परेशान होकर वीनस घर से चली जाती और कुछ दिनों बाद फिर लौट आती.

तकरीबन 14 साल की उम्र में वीनस को पहली बार उसके एक परिचित ने एक पैकेट दिया और किसी को डिलिवर करने के लिए कहा. उस वक्त वीनस को पता नहीं था कि यह काम क्या है. इस काम के लिए उसे अच्छी-खासी रकम दी गई तो वीनस को यह काम भा गया. यही वक्त था जब वीनस ड्रग्स डीलिंग के धंधे में आई. इसी वक्त वीनस स्कूल छोड़कर एक प्यूपिल रेफरल यूनिट में दाखिल हुई.

यहां वीनस ने इस धंधे के अंदर की कुछ बातें जानीं. 'गोइंग कंच' और 'आउट देअर' जैसे शब्दों के मतलब समझे. ये अस्ल में अपने इलाके से किसी दूसरे शहर या स्टेट में जाने के लिए इस धंधे के कोडवर्ड थे. शुरुआत में वीनस ने हेरोइन और क्रैक जैसे ड्रग्स की डीलिंग की और फिर धीरे-धीरे 'काउंटी लाइन' में धंसती चली गई.


वीनस ने अगले तीन सालों में इस दुनिया को भीतर तक देखा. वह लंदन से आॅक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और बेसिंगस्टोक सहित पूरे यूके में गई और ड्रग्स डीलिंग्स की. एक बार कुछ समय के लिए उसे किसी अजनबी के घर को अपना अड्डा बनाने के लिए कहा गया और वहां डीलिंग्स को आॅपेरट करने के निर्देश दिए गए. तब वीनस ने जाना कि इस काम को इस धंधे में 'कुकूइंग' कहा जाता है. उस घर का मालिक ड्रग्स के एवज़ इन लोगों को वहां से धंधा करने की अनुमति देता था. जब वीनस के पास ड्रग्स खत्म हो गई तो उसे वह घर छोड़ना पड़ा और वापस अपने पुराने ढर्रे के काम पर चली आई.

तीन साल हो चुके थे और अब वीनस 17 साल की थी. एक दिन उसने इस धंधे को छोड़ने का मन बना लिया. उसने अपने आका डीलरों से कहा कि वह इस काम से तंग आ चुकी है और अब अपने घर, अपनी मां के पास जाना चाहती है इसलिए वह इस दुनिया को अलविदा कह रही है. वीनस ने अपना सामान पैक किया. उसने अपनी मां को मोबाइल फोन से संदेश भेजकर सूचित करना चाहा कि वह घर लौट रही है. वीनस फोन पर टाइप कर ही रही थी कि उसे एक गोली लगी और ज़मीन पर गिर पड़ी.

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वीनस के आकाओं ने उस पर हमला करवाया था. इस हमले की शिकार वीनस को पहला खयाल यही आया कि अब गेम ओवर हो चुका है. गोली लगने के बाद लगभग मरणासन्न खुलती-बंद होती आंखों के सामने वीनस को मां का चेहरा नज़र आया. वीनस एक बार अपनी मां को देख लेना चाहती थी. किसी तरह हिम्मत बांधकर वीनस उठी और अस्पताल पहुंचने में कामयाब हो गई. अस्पताल पहुंचते ही बेहोश हो चुकी वीनस को कुछ पता नहीं था कि अब वह कभी होश में आएगी या नहीं.

डॉक्टरों ने कहा कि वीनस कोमा में चली गई है. 8 दिन बाद वीनस जब होश में आई तो उसे बताया गया कि गोली लगने के कारण वह ऐसी समस्या की शिकार हो गई है कि जीवन भर उसे इलाज और दवाओं के सहारे रहना होगा. इस कहानी के केंद्र में रही यूके की यह लड़की अब 19 साल की हो चुकी है. वीनस उसका वास्तविक नाम नहीं है क्योंकि असली नाम सामने आने पर उसपर फिर हमला हो सकता है. फिलहाल वीनस को एक सामाजिक संस्था की मदद मिल रही है और अब वीनस का कहना यह है -

“अगर आप एक बार काउंटी लाइन्स में दाखिल हो जाते हैं तो फिर वहां से बाहर निकलना बहुत मुश्किल है. बच्चों को यह समझाने की ज़रूरत है कि गलत क्या है और सही क्या. मेरी पीढ़ी के लिए अब शायद कुछ नहीं किया जा सकता लेकिन आने वाली पीढ़ी के लिए इससे पहले कि देर हो जाए, ज़रूर कुछ किया जाना चाहिए.”


काउंटी लाइन क्या है?

लंदन, बर्मिंघम और लिवरपूल जैसे शहरी इलाकों में संगठित अपराध यानी आॅर्गेनाइज़्ड क्राइम समूह सक्रिय हैं जो देश भर में ड्रग डीलिंग का कारोबार चलाते हैं उन्हें इस अपराध की दुनिया में काउंटी लाइन के नाम से जाना जाता है. ये काउंटी लाइन ड्रग्स की डीलिंग के लिए नौजवानों का इस्तेमाल करते हैं और कभी-कभी छोटे बच्चों का भी. ये बच्चे या नौजवान पैडलर कहलाते हैं जिनके ज़रिये ड्रग्स को एक पार्टी से दूसरी पार्टी तक पहुंचाया जाता है.

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