जिस्म का धंधा करवाकर अपनी ही बीवी का दलाल बनना चाहता था शौहर

एक लड़की की कहानी जिसने हर तकलीफ, हर ज़ुल्म बर्दाश्त किया, यहां तक कि 'तीन तलाक' की विक्टिम भी बनी लेकिन उसने शौहर के नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने दिया और वह उस दलदल में धंसने से किसी तरह बची रही जिसे वेश्यावृत्ति कहा जाता है.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 3, 2018, 9:48 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 3, 2018, 9:48 PM IST
बरेली के किला इलाके में कुछ पुराने कच्चे पक्के मकानों की एक बस्ती में रहने वाली रिफ़त की शादी एक साल पहले हुई थी. एक साल में ही खुलासा हो गया कि इस शादी की गांठें बेहद कच्ची थीं और शादी के वक्त उसे कतई अंदाज़ा नहीं था कि उसके पति की फितरत में ही गुनाह है. वह उसके जिस्म का सौदागर बनना चाह रहा था. जिस्म नहीं बेच पाया तो उसने हर मनमानी कर रिफ़त को कई तरह की सज़ाएं दीं. अब रिफ़त बहुत कुछ बर्दाश्त करने के बाद इंसाफ की लड़ाई लड़ने पर मजबूर है.

कोई सच्चा प्यार करने वाला हो तो गरीबी और मजबूरियों के हालात भी झेले जा सकते हैं. हर लड़की की तरह एक गरीब घर की लड़की रिफ़त के भी कुछ ख़्वाब थे कि उसकी शादी होगी तो प्यार और खुशियों के बीच उसकी ज़िंदगी जन्नत बन जाएगी. एक मई 2017 को जब रिफ़त की शादी हुई तो उसे अपने शौहर का नाम मुमताज़ पता था, काम के बारे कुछ पता था और कुछ वह नहीं जानती थी. यानी मुमताज़ का मिज़ाज और अतीत उसके सामने खुला ही नहीं था.

रिफ़त को उम्मीद थी कि सब अच्छा ही होगा, प्यार भी हो जाएगा लेकिन कुछ ही दिनों में जो कुछ होने लगा, रिफ़त को अपनी ज़िंदगी जहन्नुम बनती नज़र आने लगी. इधर, मुमताज़ का एक अतीत था. रिफ़त से पहले मुमताज़ की तीन शादियां हो चुकी थीं लेकिन उसकी हर बीवी उसे छोड़ चुकी थी. और इसकी वजह थी मुमताज़ की अश्लीलता और बेतहाशा मारपीट. मुमताज़ के इस अतीत से बेखबर थी रिफ़त और अब यही सब रिफ़त के साथ होने वाला था.

मुमताज़ का मकान नीचे था और दुकान पहली मंज़िल पर. दुकान पर कई तरह के लोगों का आना जाना लगा रहता था. पहले पहल होता यह था कि मुमताज़ की दुकान पर जब ग्राहक आते थे तब वह किसी बहाने से वह रिफ़त को दुकान पर बुलाता था. कुछ ही दिनों में रिफ़त को समझ में आने लगा था कि मुमताज़ उसे नुमाइश की चीज़ बनाकर पेश करता है. यह बात रिफ़त के गले नहीं उतरती थी और वह रिफ़त को ऐसा करने से मना करती थी.

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धीरे धीरे यह सिलसिला हदें पार करने की तरफ बढ़ा और एक दिन मुमताज़ ने साफ तौर पर कह दिया कि रिफ़त उसके ग्राहकों के साथ हमबिस्तरी करे. रिफ़त की आंखें फटी रह गईं और उसने नाराज़गी और साफ विरोध दर्ज किया. रिफ़त के मना करते ही मुमताज़ आगबबूला हो गया और उसने रिफ़त की खूब पिटाई की. गुस्से में मुमताज़ के हाथ जो आया उसने वही रिफ़त के सिर पर दे मारा. रिफ़त के सिर से खून बहने लगा तब मुमताज़ वहां से चला गया.

इस जहन्नुम से गुज़र रही रिफ़त को हमदर्दी मिली घर की औरतों से. घर की औरतों ने रिफ़त को समझाया कि वह घर में ही रहा करे क्योंकि बाहर जाने से उसकी, उसके शौहर और खानदान की बदनामी होगी. यह बात मानकर रिफ़त घर में एक तरह से कैद होती चली गई. अब ये आए-दिन का सिलसिला हो गया कि मुमताज़ किसी बहाने से रिफ़त को दुकान पर बुलाता, रिफ़त मना करती और फिर घर आकर मुमताज़ उसके साथ गाली गलौज करते हुए बेतहाशा मारपीट करता.

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कुछ ही दिनों में मुमताज़ का हौसला और ज़िद इतनी बढ़ गई कि वह कुछ ग्राहकों को लेकर घर ही पहुंच गया और बजाय रिफ़त को दुकान पर बुलाने के उसने रिफ़त को घर के भीतर ही मजबूर किया कि वह उसके ग्राहकों के साथ यौन संबंध बनाए. रिफ़त ने रो-चीखकर पूरी ताकत से विरोध किया और खुद को किसी कमरे में बंद कर इस मुश्किल घड़ी को जैसे तैसे टाला. गैर मर्दों के साथ यौन संबंध बनाने से तो बची रिफ़त लेकिन मुमताज़ के गुस्से से नहीं बच सकी.

गुस्से में मुमताज़ को कतई होश न रहता था. वह तमंचा दिखाकर रिफ़त को डराता, बेदर्दी से पीटता और उसके साथ हर तरह की ज़बरदस्ती करता. गुस्से की इस हालत में वह अक्सर अपनी पिछली तीन बीवियों को दी गई प्रताड़ना का ज़िक्र भी करता. रिफ़त बेहद खौफ और दहशत में जी रही थी और उसे इस मुश्किल से निकलने का कोई हल नहीं दिख रहा था.

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ये हरकतें जारी थीं और अक्सर रिफ़त खुद को मुमताज़ और उसके ग्राहकों से किसी तरह बचाती. इस मामले में घर की औरतें भी जब कुछ हल न निकाल सकीं तो पिछले महीने यानी जुलाई में रिफ़त किसी तरह अपने मायके चली गई. वहां जाकर उसने आपबीती सुनाई तो सबने उसे हिम्मत दिलाते हुए कोई हल निकालने की बात कही. रिफ़त ने सबकी सलाह से पुलिस चौकी में मुमताज़ के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. इसी बीच रिफ़त को जबरन वापस ले जाने के इरादे से 29 जुलाई को मुमताज़ तैश में उसके मायके जा पहुंचा.

मुमताज़ तमंचा लेकर आखिरी फैसला करने के इरादे से पहुंचा था. उसने रिफ़त से वापस चलने को कहा और रिफ़त के मना करते ही मुमताज़ गालियां देते हुए रिफ़त को पीटने लगा. उस वक्त घर में मौजूद रिफ़त की बहनें जब बीच बचाव के लिए आईं और मुमताज़ को रोकने की कोशिश की तो मुमताज़ ने उन्हें भी पीटा और कुछ ही देर बाद मुमताज़ ने रिफ़त से कह दिया - 'तलाक, तलाक, तलाक'.


रिफ़त ने 'मेरा हक फाउंडेशन' की अध्यक्ष फरहत नकवी से मदद की गुहार लगाई. फरहत नकवी का कहना है कि पीड़िता का शौहर उससे वेश्यावृत्ति कराना चाहता था और रिफ़त के मना करने पर उसने तलाक दे दिया. उनका कहना है रिफ़त की हर संभव मदद की जाएगी.

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