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"रेप के 100 वीडियो देखे तो पति के साथ भी SEX हुआ दुश्वार"

प्रतीकात्मक चित्र

स्कॉटलैंड पुलिस की 29 वर्षीय महिला पुलिस अफसर कैरा क्रीबाय का कड़वा अनुभव. क्रीबाय के हवाले से रिपोर्ट्स में बयान की गयी हकीकत पर आधारित कहानी.

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    साल 2014 के दिसंबर महीने में मेरे करियर में एक ऐसा केस आया जिसने मेरी सोच और ज़िंदगी को ऐसा मोड़ दिया जिसकी मैं तो क्या शायद कोई भी कल्पना नहीं कर सकता था. यह केस तीन बच्चियों के यौन शोषण से जुड़ा था जिन्हें एक शख़्स ने तीन साल तक शिकार बनाया. मुझे इस केस की तफ़्तीश एक यौन विकार (sexual disorder) तक ले जा सकती है, मुझे नहीं पता था.

    2009 में स्कॉटलैंड यार्ड जॉइन करने के तीन साल बाद मुझे सफायर यूनिट में नियुक्त कर दिया गया था. यह यूनिट बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामले संभालती है. दो साल तक इस यूनिट में काम करते हुए मुझे कोई ख़ास समस्या नहीं हुई थी और मैं इस काम को लेकर खुद को सहज महसूस करती थी लेकिन दो ही साल बाद मेरे साथ कुछ ऐसा होने वाला है जो मुझे एक लंबे समय के लिए मुश्किल में डाल सकता है, इसका मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था.

    दिसंबर 2014 में माइकल डीकॉस्टा का केस मेरे सुपुर्द किया गया. माइकल पर तीन साल तक तीन बच्चियों का यौन शोषण करने का आरोप था और मैंने इस मामले की तफ़्तीश शुरू की. इस दौरान अपनी टीम के साथ मैंने माइकल के घर की तलाशी ली जहां से करीब 100 वीडियो और एक डायरी बरामद हुई. माइकल ने कैसे बच्चियों के साथ उत्पीड़न को अंजाम दिया, वीडियो और डायरी में इसी से संबंधित डिटेल्स थे.

    डायरी में विस्तार से लिखा हुआ था कि माइकल ने बच्चियों पर कैसे यौन हमले किये. बच्चियों के उत्पीड़न संबंधी माइकल के ये वीडियो भी कम खौफनाक नहीं थे. फिर माइकल के साथ ही मैं लगातार उन बच्चियों के संपर्क में रही. केस के सिलसिले में मैं उन बच्चियों से मिलती रही और बातचीत करती रही. वो बच्चियां थीं इसलिए उनके साथ बात करने में, उन्हें मेरे साथ खुलने में वक्त लगा. इस वक्त में मुझे नहीं पता कि कैसे और कब मेरा उन बच्चियों के साथ एक भावनात्मक लगाव बन गया.

    बच्चियों से बातचीत के अलावा इसी दौरान मैंने एविडेंस और अध्ययन जुटाने के लिए वो 100 वीडियो बार-बार देखे. कई बार तो लगातार आठ-आठ घंटे तक मुझे वो वीडियो देखने पड़े जिनमें यौन उत्पीड़न के साथ ही कई किस्म की विकृतियां थीं. मुझे अब यह महसूस होने लगा था कि मैं इस पूरे घटनाक्रम से गुज़रते हुए सहज महसूस नहीं कर पा रही हूं. मेरे भीतर कुछ ऐसा घटने लगा था जो मुझे ठीक नहीं लग रहा था.

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    प्रतीकात्मक चित्र


    मैंने अपने वर्कलोड और अपनी इस हालत को कुछेक बार अपने सीनियर अफसरों के साथ साझा भी किया लेकिन हल्की-फुल्की तसल्ली देते हुए उन्होंने लगभग इसे नज़रअंदाज़ ही किया और मुझे अपने जॉब को अंजाम देने के लिए दबाव बनाते रहे. लेकिन मेरी हालत लगातार खराब होती जा रही थी.

    इस केस की तफ़्तीश को तीन महीने हो चुके थे और मार्च 2015 तक मुझे डरावने सपने आने लगे थे. इन सपनों में मुझे लाचार बच्चे-बच्चियां दिखते थे और उनके साथ वो ज़ुल्म होते नज़र आते थे, जिन्हें देखकर कोई भी सहम सकता है. मैं ऐसे भयानक सपनों से डरकर और चौंककर उठ जाया करती थी और बहुत देर तक तकलीफ में रहती थी. मेरी नींद कम और दुश्वार हो चुकी थी. सिर्फ इतना ही नहीं, इससे कहीं ज़्यादा मुसीबत पैदा हो चुकी थी.

    इसी दौरान मैं अपने पति के साथ भी सहज नहीं महसूस कर पा रही थी. अपने पति के साथ अंतरंग लमहों में मेरा बर्ताव सामान्य नहीं रह गया था. अपने पति के साथ उन खास लमहों में मुझे एक अजीब सा दर्द महसूस होता था और मैं रो तक पड़ती थी. इस केस से जुड़ी बच्चियों के दर्द का एहसास हो या बच्चों के प्रति पैदा हुई कोई संवेदना, कारण जो भी रहा हो, मेरा मन और बर्ताव सामान्य नहीं रह गया था. अफ़सोस की बात यह है कि मैं न किसी को अपनी तकलीफ समझा पा रही थी और न शायद कोई समझ पा रहा था.

    इसके बाद जब मैंने गंभीरता के साथ अपनी हालत को बयान किया तो फोर्स के पेशेवर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेरी काउंसलिंग की गयी और फिर एक महीने बाद मुझे बीमार मानकर छुट्टी दे दी गयी.

    क्या हुआ माइकल के केस में?

    जिस केस की तफ़्तीश में कैरा क्रीबाय मानसिक आघात की शिकार हुईं, 2015 में अदालत ने उस पर फैसला सुनाते हुए माइकल को 25 अपराधों में दोषी करार दिया जिसमें रेप भी शामिल था. जज मैक्ग्रेगर जॉनसन ने इस मामले को रेप की मुहिम यानी रेप कैंपेन करार देते हुए 16 साल के लिए माइकल को जेल में रखे जाने का फैसला सुनाया.

    क्रीबाय ने किया हर्जाने का दावा

    महिला पुलिस अधिकारी क्रीबाय इस केस की तफ़्तीश के दौरान मानसिक रूप से आहत हुईं. तीन साल तक इलाज से गुज़रीं. इसके बाद इस साल क्रीबाय ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस के खिलाफ 2 लाख यूरो को दावा पेश किया है जो गंभीर मानसिक प्रताड़ना के लिए हरजाने की मांग के रूप में है.

    22 फरवरी 2018 को एमईटी पुलिस सेवा को एक दावा प्राप्त हुआ है जिसमें मानसिक अत्याचार से ग्रसित पीड़िता ने हरजाने की मांग की है. फिलहाल यह दावा एमईटी के मामले देखने वाले वकीलों के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है.
    एमईटी पुलिस प्रवक्ता


    अपनी तरह का पहला मामला है यह : किसी केस की जांच के दौरान पुलिस अधिकारी द्वारा मानसिक प्रताड़ना झेलने के एवज़ हरजाने मांगने का संभवत: यह पहला मामला माना जा रहा है. महिला पुलिस अधिकारी का कहना है कि केस से जुड़े खौफनाक और खतरनाक इनपुट की वजह से उन्हें जबरन डरावने फ्लैशबैक्स और भयानक सपनों का शिकार होना पड़ा.


    महिला पुलिस अफसर को मिला यूनियन का समर्थन

    क्रीबाय को पुलिस फेडरेशन का समर्थन मिला है. यूनियन के एक प्रवक्ता का कहना है -

    ऐसे गंभीर और खतरनाक प्रवृत्ति वाले अपराधों की जांच करने वाले अधिकारियों के रोल्स को लेकर सतर्कता ज़रूरी है. इन अधिकारियों की सेहत एवं सुरक्षा का खयाल रखते हुए उन्हें जोखिम से बचाने के लिए सही उपाय होने चाहिए. उनके काम और वर्कप्लेस की मॉनिटरिंग के साथ ही उनके सहयोग की समुचित व्यवस्था की भी दरकार है.


    दूसरी ओर क्रीबाय के वकील डेविड मिल्स का कहना है -

    इस मामले में महिला पुलिस अफसर की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जोखिम का सही आंकलन नहीं किया गया. अगर यह किया गया होता तो पीड़ित पुलिस अफसर को मानसिक क्षति के जोखिम से बचाया जा सकता था.


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