एक इंच की SIM न होती, तो क्या कातिलों तक पहुंच पाती पुलिस?

एक इंच की SIM न होती, तो क्या कातिलों तक पहुंच पाती पुलिस?
सांकेतिक चित्र

एक ऐसी कहानी जिसमें एक साज़िश रचकर एक कारोबारी को जाल में फंसाया गया लेकिन अपराधियों के मंसूबे तब फेल हुए जब दौलत हाथ लगी ही नहीं. फिर कत्ल हुआ और एक महीने तक चली बिहार पुलिस की जांच में आखिरकार सच का खुलासा हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2018, 8:12 PM IST
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एक साज़िश रची गई, हनीट्रैप यानी औरत के हुस्न का जाल बिछाया गया, एक कत्ल हुआ और एक महीने तक पुलिस जांच की सही दिशा नहीं पकड़ सकी. फिर एक इंच की मोबाइल सिम ने कातिलों का सुराग दिया और जैसे ही सफेदपोश दिखने वाले ये लोग पुलिस के हत्थे चढ़े, साज़िश का पूरा सच सामने आ गया.

VIDEO: हनीट्रैप में फंसाकर अपहरण फिर खून

जयप्रकाश एक दिन अपने घर से काम के लिए निकला. शाम हुई, रात हुई लेकिन वह लौटा नहीं. रात तक भी न लौटने पर उसके घर के लोगों ने फोन लगाया लेकिन फोन भी नहीं लगा. घर में चिंता का माहौल बन गया. देर रात एक अनजान मोबाइल नंबर से जय के घर पर फोन पहुंचा कि 'जय हमारे कब्ज़े में है और उसको ज़िंदा देखना चाहते हो तो डेढ़ करोड़ रुपये का बंदोबस्त करो.' सबके होश फाख़्ता हो गए कि काटो तो खून नहीं.



अगले दिन एक नकाबपोश आदमी जय के घर वालों से मिला और धमकाने के अंदाज़ में जय की चेक बुक्स लेकर चला गया. अंडों का कारोबार करने वाले जय के पास जो भी दौलत थी, उसका इंतज़ाम चूंकि वही कर सकता था इसलिए किडनैपरों ने चेक बुक्स मंगवाकर जय से चेक्स पर जबरन साइन करवाए और चार चेक्स में डेढ़ करोड़ रुपये तक की रकम भरकर चेक भुनाने बैंक पहुंचे. लाखों की रकम वाले चेक्स देखकर बैंक ने कहा कि इतनी बड़ी रकम एक बार में देना बैंक के लिए संभव नहीं है क्योंकि बैंक इतना बड़ा नहीं था.
बिहार के मुज़फ्फरपुर ज़िले में एक छोटा सा कस्बा है कर्जा, यहीं के जयप्रकाश को बीते 30 सितंबर को अगवा कर लिया गया था. 1 अक्टूबर को जब बैंक से रकम नहीं मिली तो किडनैपर परेशान थे. इसी बीच, जय के घर वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और अगवा किए गए जय की तलाश में पुलिस ने जांच की शुरुआत की. इस बात की भनक किडनैपरों को लग गई.

समझाया था तेरे घरवालों को कि पुलिस के पास न जाएं लेकिन माने नहीं वो. एक तो पैसा नहीं मिल रहा है और उस पर पुलिस का टेंशन. अब तो तुझे मरना पड़ेगा. हम तुझे मारना नहीं चाहते थे लेकिन क्या करें, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ा तो हम फंस जाएंगे...


देर रात किडनैपरों ने जय को गोली मार दी और लाश को एक गाड़ी में रखकर मुज़फ्फरपुर से कर्जा लेकर आए. जय के घर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर एक सुनसान सड़क किनारे जय की लाश को फेंककर चले गए. सुबह हुई और एक लाश देखकर लोग जमा होने लगे. कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची और लाश की शिनाख्त हुई जय के रूप में, जिसके अपहरण केस में पुलिस ने एक दिन पहले ही तफ्तीश शुरू की थी.

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अब गुत्थी उलझ चुकी थी कि जय का अपहरण कर फिरौती मांगी गई और फिर उसे मार डाला गया लेकिन यह सब किया किसने? पुलिस ने कर्जा और आसपास के इलाकों से क्राइम रिकॉर्ड वाले अपराधियों की कुंडली खंगाली. उनके मूवमेंट के बारे में अपने सूत्रों से पता किया लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला कि इस काम को कर्जा के लोकल अपराधियों ने अंजाम दिया हो. अब नये सिरे से तफ्तीश की ज़रूरत पेश आई.

एक जांच टीम ने जय के घर वालों से संपर्क किया और यह पता किया कि फिरौती के लिए कॉल किस नंबर से आया था. इस नंबर के बारे में पता लगाया गया तो उस दुकान का पता चला, जहां से इस नंबर की मोबाइल फोन सिम खरीदी गई थी. इस दुकान से मिली जानकारी के हिसाब से पता चला कि मुज़फ्फरपुर के अजय ने यह सिम कुछ ही दिन पहले खरीदी थी. इस सुराग के बाद अजय की तलाश शुरू हुई तो जांच टीम मुज़फ्फरपुर के एक फ्लैट तक पहुंच गई.

यहां अजय की बीवी प्रियंका मिली और उसने कई दिनों से अजय के शहर में न होने की बात कही. पुलिस ने सूत्रों के ज़रिये अजय और प्रियंका के बारे में जानकारियां इकट्ठा कीं तो पता चला कि दोनों के मूवमेंट शक पैदा कर रहे थे. अजय के बारे में पता चला कि वह खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताता था और एक प्राइवेट बिजली कंपनी को खदेड़ने में उसका हाथ था लेकिन अजय ज़मीन कारोबार से जुड़ा हुआ था. प्रियंका अपने भाई मनीष के साथ उस फ्लैट में रह रही थी और अजय के कॉंटैक्ट में थी.

आस पास की गई पूछताछ में यह भी पता चला कि 30 सितंबर से दो अक्टूबर के बीच इस फ्लैट पर कई लोगों का आना जाना हुआ था. दो चार दिन अच्छा खासा हंगामा रहा लेकिन किसी पड़ोसी को इसकी वजह नहीं पता थी. जय की लाश मिले करीब एक महीने हो चुका था और अब पुलिस ने शक की बिना पर अजय, प्रियंका और मनीष को गिरफ्तार कर अलग-अलग तीनों से सख्ती से पूछताछ की तो धीरे-धीरे सच सामने आ गया.

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यह पूरी साज़िश अजय ने रची थी और जाल प्रियंका ने बिछाया था. खूबसूरत प्रियंका ने अपने हुस्न का सहारा लेकर पहले जयप्रकाश से कुछ मुलाकातें की थीं और यह पता लगा लिया था कि जय के पास काफी दौलत थी. इसके बाद जब अजय ने पूरी साज़िश तैयार कर ली थी तब प्रियंका ने 30 सितंबर को फोन करके जय को अपने फ्लैट पर बुलाया. बहाना कोई ज़मीन दिखाने का था लेकिन प्रियंका का अंदाज़ इस तरह का था कि जय उसके फ्लैट पर आने से मना न कर सके यानी यह हनीट्रैप था.

जय जैसे ही फ्लैट पर पहुंचा, वहां मौजूद अजय, प्रियंका और मनीष ने उसे बंधक बना लिया और उसके ज़रिये डेढ़ करोड़ रुपये वसूलने की कोशिश की. लेकिन रकम न मिलने और जय के अपहरण की खबर पुलिस को होने के बाद तीनों ने भाड़े के कुछ लोगों के साथ मिलकर जय को मौत के घाट उतारकर कर्जा के ही इलाके में फेंक दिया ताकि पुलिस वहीं के अपराधियों पर शक करती रहे. लेकिन एक छोटी सी सिम की मदद से पुलिस कातिलों तक पहुंच ही गई.

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