प्रेमिका और रकीब के हाथों मारे जाने से पहले गवाह तैयार कर गया वो

मैंगलूरु में चार साल पहले हुए एक कत्ल के केस में कोर्ट ने मृतक की प्रेमिका और प्रेमिका के दूसरे प्रेमी को उम्र कैद की सज़ा सुनाई. कहानी में गवाहों और मरने से पहले लड़के के बयान का अहम रोल है वरना मामला एक्सीडेंट का बन सकता था, हत्या का नहीं.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 28, 2018, 8:14 PM IST
प्रेमिका और रकीब के हाथों मारे जाने से पहले गवाह तैयार कर गया वो
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 28, 2018, 8:14 PM IST
मैंगलूरु के पावंजे ब्रिज के एक हिस्से पर एक बाइक सवार लड़का जा रहा था. एक लड़की का फोन उसके मोबाइल पर आया तो उसने स्पीड धीमी की. लड़का मोबाइल पर बात करने को हुआ. तभी, तेज़ स्पीड में एक टाटा सूमो पीछे से आई और बाइक को ज़ोरदार टक्कर मार दी. लड़का वहीं गिर गया और सूमो ने उसे लगभग कुचलने की कोशिश की. लड़का लहूलुहान वहीं पड़ा रहा और सूमो वहां से फरार हो गई. यह सब एक आदमी ने देख लिया जिसे खुद नहीं पता था कि वह एक हादसे का चश्मदीद बन गया है या एक कत्ल का?

तारीख थी 1 अप्रेल और वक्त था सुबह के पौने पांच. भारी आवाजाही का तो सवाल ही नहीं था. पावंजे नदी के सुनसान पड़े पुल के जिस हिस्से पर सूमो ने बाइक सवार अविनाश को कुचला, वहां से कुछ ही दूरी पर मछली बेचने वाला एक आदमी गुज़र रहा था. सूमो के फरार होते ही यह आदमी 20-21 साल के अविनाश के पास दौड़ते हुए पहुंचा और उसने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया. उस आदमी की समझ में नहीं आ रहा था कि वह लहूलुहान अविनाश की मदद कैसे करे.



उसने अविनाश का हाथ पकड़कर उसकी नब्ज़ जांचना चाही तो अविनाश ने बोलना शुरू किया. दर्द में तड़पते हुए अविनाश ने उस आदमी पूरा किस्सा बताया -

यह सूमो हरीश की थी. हरीश ही चला रहा था सूमो, मैं जानता हूं उसे. हरीश भी मुझे जानता है लेकिन मुझे नहीं पता कि उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? हरीश उसी कॉल सेंटर में ड्राइवर है जहां सुषमा काम करती है. मुझे सुषमा ने ही मिलने के लिए बुलाया था और मैं उसी से मिलने जा रहा था..


अविनाश की ये तमाम बातें सुनकर उस आदमी ने उसे ढांढ़स बंधाना शुरू किया और एंबुलेंस के आने तक वह एक कपड़े से अविनाश का खून बहने से रोकने की कोशिश करने लगा. कुछ ही देर में एंबुलेंस वहां पहुंची और अविनाश को अस्पताल ले जाने का सफर शुरू हुआ. वह आदमी एंबुलेंस में अविनाश को चढ़ाकर वहां से चला गया. अब अविनाश ने वही पूरी कहानी एंबुलेंस के भीतर मौजूद नर्स को सुनाई.

अस्पताल पहुंचकर सुबह करीब 7 बजे अविनाश ने दम तोड़ दिया. पुलिस तब तक आ नहीं सकी थी और अविनाश का आखिरी बयान पुलिस के पास नहीं था लेकिन एक आदमी और एक नर्स को अविनाश ने पूरी कहानी सुना दी थी. नर्स ने अविनाश के पिता को अविनाश के आखिरी शब्द बता दिए थे. अविनाश के पिता ने मुल्की पुलिस थाने जाकर अविनाश की हत्या की रिपोर्ट लिखवाई तो सवाल खड़ा हुआ कि एक्सीडेंट को मर्डर क्यों कहा जा रहा है.

अविनाश के पिता ने दोनों के बयानों का हवाला दिया. अब इस आधार पर पुलिस ने तफ्तीश शुरू की और आरोपी हरीश व सुषमा तक पहुंचकर उनसे पूछताछ करने का सिलसिला शुरू हुआ. तफ्तीश के बाद कहानी कुछ इस तरह सामने आई.
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करीब 26 साल की सुषमा मॉर्गन गेट पर स्थित एक आईटी कंपनी के कॉल सेंटर में काम किया करती थी. इस काम के सिलसिले में वह कंपनी की कैब से आया जाया करती थी. इस कैब का ड्राइवर था 26 वर्षीय हरीश, जो ज़ाहिर तौर पर सुषमा को जानने पहचानने लगा था. सुषमा कैब से कहीं उतरती और अक्सर एक लड़के से मिलती. यह लड़का था अविनाश. अविनाश एक स्टूडेंट था और उसका सुषमा के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. दोनों अक्सर मुलाकात करते थे.

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अविनाश और सुषमा का अफेयर किसी से छुपा नहीं था बल्कि यह बात आम हो चुकी थी. हरीश को भी यह सब पता चल चुका था. मार्च 2014 में अविनाश और सुषमा के बीच रिश्ते में कुछ खटास आना शुरू हो गई थी. इसी उलझन के चलते सुषमा परेशान रहा करती थी. परेशान सुषमा को देखकर हरीश ने कैब में सफर के दौरान उससे बातचीत करना शुरू की. सुषमा और हरीश पहले से परिचित तो थे ही, जल्द ही एक-दूसरे के करीब आने लगे.

अब बारी थी सुषमा और हरीश के इस रिश्ते के बारे में अविनाश को खबर होने की, जैसे ही अविनाश को यह सब पता चला तो वह बेहद खफ़ा हुआ. उसने सुषमा से इस बारे में ठीक से बातचीत करना चाही लेकिन सुषमा ने उसे तवज्जो नहीं दी. सुषमा से नाराज़ अविनाश ने सुषमा से बातचीत करने के लिए यही सोचा कि वह उसके आॅफिस पहुंच जाए और ऐसा सीन क्रिएट करे कि सुषमा उससे बात करने पर मजबूर हो जाए.

अविनाश 31 मार्च 2014 को सुषमा के आॅफिस जा धमका. गेट पर उसे सिक्योरिटी गार्ड ने रोका तो वह ज़बरदस्ती करते हुए अंदर दाखिल हो गया. बात बढ़ गई और एचआर मैनेजर तक जा पहुंची. अविनाश ने हर बार खुद को सुषमा का बॉयफ्रेंड बताते हुए कंपनी के हर नियम को तोड़ा. सुषमा वहां पहुंची लेकिन बात बढ़ चुकी थी और कंपनी के सिक्योरिटी अधिकारी वहां जमा हो चुके थे. आखिरकार अविनाश को पुलिस के हवाले कर दिया गया.

पुलिस ने पूछताछ करने के बाद अविनाश को सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया. इधर, अविनाश की हरकत के कारण सुषमा के लिए आॅफिस में मुश्किल खड़ी हो गई. उससे सवाल जवाब हुए और शाम तक बात ने बिगड़ते बिगड़ते ऐसा मोड़ लिया कि सुषमा की नौकरी चली गई. उधर, अविनाश नाराज़ था और अब इधर, सुषमा भी उससे बेहद नाराज़ थी. सुषमा आॅफिस से निकली और उसने पूरी कहानी हरीश को बताकर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया.

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अविनाश की इस हरकत के बारे में सुनकर अब हरीश को भी गुस्सा आ गया था. हरीश ने सुषमा से कहा कि वह अविनाश को सबक सिखा सकता है अगर वह उसका साथ दे तो. दोनों ने प्लैन बनाया और अविनाश को उसकी गलती की सज़ा देने का फैसला कर लिया. सुषमा ने देर शाम अविनाश को फोन किया और कहा -

फोन पर तो पूरी बात हो नहीं पाएगी अविनाश इसलिए हमें मिलना पड़ेगा. तुम सुबह पांच बजे मक्का चेकपोस्ट पर आ जाना, हम वहीं बात कर लेंगे और कोशिश करेंगे कि हमारा रिश्ता बचा रहे. फिर जो भी हो, एक बार ठीक से बातचीत करना तो मुनासिब ही है. सुबह पांच बजे आ ही जाना क्योंकि उसके बाद मुझे गांव जाने के लिए रवाना होना है.


यही तय हुआ था और अविनाश मक्का चेकपोस्ट की तरफ मुंह अंधेरे रवाना हो चुका था. सुषमा से मिलने की बेचैनी में जब अविनाश पावंजे ब्रिज के पास पहुंचा था तभी हरीश ने साज़िश के मुताबिक अपनी सूमो से अविनाश की बाइक को टक्कर मारी. अविनाश को रास्ते से हटाने के मकसद से किए गए इस हमले में अविनाश की जान गई लेकिन मौत से पहले अविनाश एक चश्मदीद गवाह और एक नर्स को अपना बयान दे चुका था.

इस केस में पूरी सुनवाई होने के बाद इसी महीने यानी 4 अगस्त 2018 को कोर्ट ने हरीश और सुषमा को उम्र कैद की सज़ा सुनाई. साथ ही, अविनाश के परिवार के लिए मुआवज़ा जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

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