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Gang War: एक-दूसरे के जानी दुश्मन टिल्लू और गोगी कभी थे दोस्त

Gang War: एक-दूसरे के जानी दुश्मन टिल्लू और गोगी कभी थे दोस्त

सांकेतिक चित्र

सांकेतिक चित्र

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में पिछले दिनों हुए गैंग वॉर के पीछे की कहानी. टिल्लू गैंग और गोगी गैंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई में यह खूनी खेल पिछले 5 सालों से जारी है. दो गहरे दोस्त कैसे बन गए एक-दूसरे की जान के दुश्मन और कैसे खेला खूनी खेल? पूरी कहानी.

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सबसे बड़ा दुश्मन कौन होता या हो सकता है? कोई अनुभवी इसका जवाब दे सकता है - कोई पुराना और गहरा दोस्त. कहने-सुनने में बात भले ही फिल्मी लगती हो लेकिन दिल्ली की जुर्म की दुनिया में यह सच है. दो दोस्त आज एक दूसरे की जान के दुश्मन हैं और एक के बाद एक पलटवार करते हैं. जवाब दिया भी उसी ज़ुबान में जाता है जिसमें चैलेंज दिया गया हो. इस खूनी खेल में पिछले दिनों एक निर्दोष महिला की जान गई जो उस गैंग वॉर के वक्त उस इलाके से गुज़र रही थी.

रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई की यह कहानी 5 साल पहले शुरू हुई थी. बाहरी दिल्ली के ताजपुर का रहने वाला सुनील मान ताजपुरिया उर्फ टिल्लू और नज़दीकी गांव अलीपुर का रहने वाला जितेंद्र गोगी कुछ ही साल पहले तक गहरे दोस्त हुआ करते थे. दोस्ती और अपने काम को अलग रखना दोनों जानते थे. चूंकि दोनों ही दबंग थे और वसूली व गुंडागर्दी के धंधे में थे इसलिए कहीं न कहीं आपसी हितों का टकराव होता था. फिर भी दोस्ती थी लेकिन 2013 में छात्रसंघ के चुनावों के दौरान ये याराना दुश्मनी में तब्दील हुआ.

उस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनावों के दौरान गोगी और उसके गैंग ने दो नौजवानों संदीप और रविंदर की गोली मारकर हत्या कर दी. संदीप और रविंदर टिल्लू के साथी और करीबी थी. बस यहीं से टिल्लू गैंग और गोगी गैंग के बीच दुश्मनी हुई और दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे होते चले गए.

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सुनील टिल्लू और जितेंद्र गोगी


दोनों अपने गैंग को मज़बूत करने में लगे थे और पलटवार की तैयारी में थे. इधर, 2014 में एक नयी खिचड़ी पकना शुरू हुई. पवन एक दबंग आदमी था और इस धंधे के लोग उसका नाम जानते थे. पवन के भाई दीपक की मुलाकात गोगी की रिश्ते की एक बहन से हुई थी और दोनों के बीच गहरा रिश्ता बन रहा था. गोगी को पता चला कि दीपक और उसकी बहन के बीच कुछ चक्कर है तो उसने दीपक को धमकियां भेजीं लेकिन पवन का भाई होने के कारण दीपक ने परवाह नहीं की और मुलाकातें जारी रखीं.

2015 की शुरुआत में दीपक और गोगी की कज़िन के बीच बात इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि अक्सर दीपक खुद को गोगी का जीजा तक कह देता था. जब उस साल जनवरी में यह बात गोगी को पता चली तो वह आगबबूला हो गया और उसने दीपक का काम तमाम करने की योजना बनाई. कुलदीप, टुंडा और जैली के साथ मिलकर गोगी ने एक दिन दीपक को सरेआम गोली मार दी. इस कत्ल को आॅनर किलिंग कहा गया लेकिन यह एक और वजह बनी टिल्लू और गोगी के बीच दुश्मनी की क्योंकि गोगी से बदला लेने के लिए पवन ने टिल्लू से हाथ मिला लिया.

इसके साथ ही गोगी गैंग ने टिल्लू के साथी राजू चोर को भी 21 जनवरी 2015 को मौत के घाट उतारा. अब बारी थी टिल्लू के पलटवार की. टिल्लू गैंग ने जाल बिछाया और घात लगाकर एक महीने बाद यानी 23 फरवरी को गोगी के करीबी साथी अरुण कमांडो की हत्या कर दी जिसमें उसका साथी मंजीत भी मारा गया. टिल्लू का बदला अभी पूरा नहीं हुआ था. सोनीपत में गोगी गैंग से जुड़ा हुआ था निरंजन मास्टर. टिल्लू ने अपने साथियों को फिर जाल बिछाने को कहा और सोनीपत में निरंजन को मौत के घाट उतार दिया.

अब गैंग वॉर पूरी तरह शुरू हो चुकी थी. गोगी ने जवाब देते हुए टिल्लू के बेहद खास साथी विकास आलू के भाई सुमित को मार डाला. सुमित को अलीपुर में मारने के बाद टिल्लू से जुड़े देवेंद्र प्रधान को भी गोगी ने मारा. इसके बदले में टिल्लू गैंग ने बकौली के अंकित की जान ले ली जो गोगी गैंग में शामिल था. इसी रंजिश के बीच, अक्टूबर 2017 में गोगी ने गैंग के साथी दिनेश कराला की मदद से गायिका हर्षिता दहिया को भी मरवाया जो हत्या के एक मामले में गवाह थी. दिनेश रिश्ते में हर्षिता का जीजा भी था.

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लोकगायिका हर्षिता दहिया


अब कहानी खुलकर गैंग वॉर की बन चुकी थी. साल 2017 में ही गोगी को पता चला कि पवन और उसका भांजा मुकुल दोनों टिल्लू गैंग के करीबी हो रहे हैं. इसी चक्कर में पिछले साल करीब 4 लोगों की हत्या हुई. अब कहानी शुरू हुई इस साल यानी 2018 की. आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई इस साल पूरे शबाब पर आ गई थी.

इस साल जनवरी में दिल्ली के प्रशांत विहार इलाके में भीड़ की मौजूदगी में गोगी ने टिल्लू गैंग पर हमला किया. टिल्लू के खास साथी रवि भारद्वाज को सरेआम गोलियों से भून दिया गया. इस गैंग वॉर से अब दिल्ली और आसपास के इलाकों में दहशत फैल चुकी थी. इधर, टिल्लू इस हमले का जवाब देने की फिराक में था और उसे मौका मिल गया.

टिल्लू इस बार जवाब पूरी दबंगई से उसी तर्ज़ में देना चाहता था. रोहिणी कोर्ट के बाहर सरेआम टिल्लू गैंग ने गोगी के साथी मोनू नेपाली को मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद टिल्लू गैंग ने तीस हज़ारी कोर्ट के भीतर गोगी के एक और साथी दिनेश कराला को गोलियों से भूनकर यह साबित करने की कोशिश की कि गोगी जिस तरह खुलेआम कत्ल करवा सकता है, वैसे ही वह भी.


टिल्लू के एक के बाद एक दो बड़े हमलों के बाद गोगी बदला लेने के लिए उतावला था. हालांकि टिल्लू हरियाणा की एक जेल में बंद था लेकिन उसने अपने गैंग में अमित ताजपुरिया उर्फ दबंग को जोड़कर गैंग को मज़बूत कर लिया था और इसी का अंजाम था कि वह गोगी पर हर बार पलटवार करने में कामयाब हो रहा था. दबंग पर वार करना गोगी को महंगा पड़ सकता था इसलिए उसने मुकुल को निशाना बनाने के बारे में सोचा.

दबंग की तुलना में मुकुल आसान टारगेट हो सकता था लेकिन मुकुल भी पूरी तैयारी में था. उसने अपनी गाड़ी को 5 लाख रुपये खर्च करके बुलेट प्रूफ करवा लिया था. इसी गाड़ी से वह आता-जाता था खासकर तब जब उसे अकेले कहीं जाना होता. मुकुल जिम नियमित रूप से जाता था और इसी बुलेट प्रूफ गाड़ी से. गोगी ने इसी महीने यानी जून 2018 में मुकुल को टारगेट करने का मन बना लिया था. गोगी ने अपने गैंग के लोगों की मदद से मुकुल का पूरा रूटीन पता किया.

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गोगी गैंग ने पूरी रेकी की और मुकुल के आने-जाने की जगहों, टाइम और सारे कामकाज के बारे में जानकारी इकट्ठी की. संत नगर स्थित उस जिम के आस पास का मुआयना कर वहां की लोकेशन और टाइम के बारे में भी सब कुछ पता किया गया. यहां पिछली 18 जून को गैंग वॉर को अंजाम दिया गया.

मुकुल उर्फ सनी जिम से निकला था तभी एक एसयूवी ने मुकुल की बुलेट प्रूफ एसयूवी को टक्कर मार दी और धड़ाधड़ गोलीबारी शुरू हो गई. गोगी गैंग के हमलावरों को पता था कि गाड़ी बुलेटप्रूफ है इसलिए उन्होंने कुछ गोलियां चलाने के बाद घात लगाकर निशाना बनाना शुरू किया. जहां गाड़ी खड़ी थी, वहीं पास के फुटपाथ पर मुकुल को निशाना बनाया गया और उसे गोली मार दी गई.

गैंग वॉर में दो नये खुलासे

दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में मुकुल सहित कुल तीन लोग मारे गए जिनमें उस इलाके से गुज़र रही एक महिला भी शामिल थी जिसका इस गैंगवॉर से कोई लेना देना नहीं था. कुल पांच लोग घायल हुए जिनमें इलाके के निर्दोष नागरिक भी शामिल हैं. मुकुल की मौत के बाद दो नये खुलासे भी हुए. उसके परिवार का कहना है कि मुकुल का इस गैंग वॉर से कोई लेना देना नहीं था बल्कि वह तो एक पहलवान था और नेशनल खेलने की तैयारी कर रहा था. पहले भी कई खिताब जीत चुका था.

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गैंग वॉर के दौरान गोली चलाए जाने का सीसीटीवी फुटेज सामने आया.


दूसरी बात यह कि बुलेट प्रूफ एसयूवी की नंबर प्लेट पर जो नंबर दर्ज था, उसके हिसाब से यह गाड़ी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक कॉंस्टेबल पवन के नाम दर्ज है. पवन का कहना है कि भाई की हत्या के बाद उसे भी धमकियां मिल रही थीं इसलिए उसने गाड़ी बुलेट प्रूफ करवाई. मुकुल और पवन की आपस में रिश्तेदारी भी थी. बहरहाल, सूरत-ए-हाल यह है कि टिल्लू अभी जेल में बंद है और गोगी फरार है. बावजूद इसके, दोनों के बीच आपसी रंजिश चल रही है और गैंग वॉर की एक के बाद एक खबरें सामने आ रही हैं.

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Tags: Delhi, Gang war, Haryana news, Murder, क्राइम

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