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कॉन्ट्रैक्ट किलर को जेल से निकलवाकर करवाया पुराने दुश्मन का कत्ल

सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

गुजरात के आणंद ज़िले के इंडस्ट्रियल एरिया वसना में पिछले 10 मार्च को हुई एक हत्या के मामले में फरार चल रहे मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद जो कहानी सामने आई, उसमें पुरानी दुश्मनी के चैप्टर भी हैं और बाकायदा साज़िश रचकर हत्या करने की तरकीबें भी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 26, 2018, 10:58 PM IST
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'हर-हर महादेव, हर-हर महादेव..' कहता हुआ सुरेश शिव मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहा था. सुरेश नियम से बिला नागा रोज़ गुजरात के आणंद ज़िले में स्थित इस मंदिर में आता था. यही नियम सुरेश के लिए जानलेवा साबित हुआ जब उसी वक्त सामने से सीढ़ियां उतरते हुए काठी ने पिस्तौल निकाली और सीधे सुरेश के सिर में गोली मार दी.

यह कहानी बरसों पहले शुरू हुई थी. करीब 9 साल पहले 2009 में सुरेश ने एक पूरी साज़िश रची थी. एक कॉंट्रैक्ट किलर शब्बीर के ज़रिये सुरेश ने करीब 50 साल के राजू पर हमला करवाया था. शब्बीर ने एक सरकारी आॅफिस के बाहर राजू पर दो गोलियां चलाई थीं. इससे पहले कि भीड़ जमा होती और शब्बीर को पकड़ती, वह भाग खड़ा हुआ. गोलियां लगने के बाद घायल हुए राजू को पीठ में जो ज़ख़्म हुआ, उसकी वजह से राजू चार साल तक चल नहीं पाया. चार साल बाद भी पूरी ज़िंदगी के लिए उसकी चाल सामान्य नहीं रह गई.

राजू के ठीक हो जाने की खबर के मिलने के बाद से सुरेश बेहद सतर्क था. वैसे तो इस हमले के बाद से ही सुरेश सावधान था क्योंकि उसे पता था कि राजू पलटवार ज़रूर करेगा. अस्ल में, बोरसाड की उद्योग नगरी वसना में राजू और सुरेश दोनों सरकारी ठेके लेने के कारोबार में थे और फूड कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया दोनों का मुख्य क्लाइंट था. इसी वजह से दोनों के बीच कारोबारी रंजिशें चलती रहती थीं.



राजू के ठीक हो जाने के बाद सुरेश और भी होशियारी बरतने लगा था. इधर, 2012 में हुई एक हत्या के मामले में राजू पर आरोप लगा और वह इस केस में जूझता रहा और आखिरकार इस केस में उसे कोई सज़ा नहीं हुई. सज़ा तो नहीं हुई लेकिन कुछ समय के लिए राजू को जेल में रहना पड़ा. इस दौरान जेल में राजू की मुलाकात 37 साल के कनक से हुई जो हत्या के एक मामले में जेल में बंद था.
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राजू और कनक के बीच अच्छे संबंध बन चुके थे और राजू के दिमाग में कनक का इस्तेमाल करने की योजना बन रही थी. अपने तमाम झंझटों से छुटकारा पाने के बाद पिछले साल से राजू ने योजना बनाना शुरू की और सुरेश से बदला लेने का मन बना लिया. राजू ने एलम खान और रफीक को सुरेश की और उसकी पूरी दिनचर्या पर नज़र रखकर पल—पल की खबर जुटाने को कहा. दोनों ने सुरेश के घर, आॅफिस और आने—जाने की हर जगह की रेकी की.

इन दोनों की मदद से राजू को यह जानकारी मिली कि सुरेश रोज़ाना अलग रूट से अपने दफ्तर जाता है. लौटकर घर भी अलग रूट से जाता है. हमेशा किसी को साथ रखता है. एक बात जो राजू को पता चली वह यह थी कि सुरेश रोज़ाना वसना के विश्वेश्वर महादेव मंदिर ज़रूर जाता है और वहां पूजा—प्रार्थना करता है. बस, यही जगह राजू को मुफीद लगी और उसने तय कर लिया कि यहीं सुरेश का काम तमाम किया जाएगा.

अब राजू को ज़रूरत थी उस आदमी की जो उसका यह काम कर सके. इसके लिए उसने कनक का इस्तेमाल किया. कनक को इस काम के लिए खास तौर पर अमरेली जेल से कुछ समय के लिए रिहा करवाया गया. राजू ने कनक के साथ इस हत्या के लिए कॉंट्रैक्ट साइन किया और एक बड़ी रकम में कत्ल की यह डील फाइनल हुई. अब कनक को तय समय के भीतर इस काम को अंजाम देना था.

इस काम को अंजाम देने के लिए कनक को एक साथी की ज़रूरत और थी. राजू ने एलम और रफीक की मदद से अमरेली के ही एक बदनाम शूटर 28 साल के काठी से संपर्क किया और उसे भी एक अच्छी रकम देकर इस काम के लिए राज़ी कर लिया. एलम और रफीक ने ही एडवांस की राशि काठी तक पहुंचाई. फिर काठी और कनक के साथ मिलकर राजू ने फाइनल प्लैन बनाया और दोनों को फाइनल आॅर्डर दिया.

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इसी साल 10 मार्च को जब सुरेश रोज़ की तरह महादेव मंदिर पहुंचा तो वहां पहले से ही काठी और कनक उसका इंतज़ार कर रहे थे. सुरेश अपनी गाड़ी से उतरकर जैसे मंदिर की तरफ बढ़ा, सामने से काठी आया और पिस्तौल निकालकर सीधे सिर में गोली मार दी. सुरेश के बचने का कोई चांस न रहे इसलिए लड़खड़ाकर गिरे सुरेश पर कनक ने तेज़ धार चाकू से कई बार हमले किए. अगले ही पल सुरेश की लहूलुहान लाश मंदिर के पास पड़ी हुई थी.

इस हत्या में शामिल सभी मददगारों को राजू कुल मिलाकर 50 लाख रुपये का पेमेंट कर चुका था. हत्या की खबर पाते ही राजू अपने स्थायी ठिकाने से फरार हो गया. अमरेली, खंभा, सुरेंद्रनगर में राजू के कई फार्महाउस थे, वह कभी भी किसी भी जगह पहुंच जाता था. उसने अपना मोबाइल फोन नष्ट करके फेंक दिया था ताकि उसे ट्रेस न किया जा सके. इस एहतियात के बीच हत्या के बाद से ही वह राजकोट में अपने परिवार और घर भी नहीं गया.

पुलिस ने सुरेश शाह की हत्या के एक हफ्ते के भीतर ही काठी को पकड़ लिया था. इसके बाद पिछले महीने एलम और रफीक पुलिस की गिरफ्त में आ गए. फिर पुलिस ने आरोपी घनश्याम कनक को गिरफ्तार किया और पिछले बुधवार यानी 20 जून को इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड राजू उर्फ राजेंद्र शेकवा को हिरासत में ले लिया.

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