9/11: उस दिन सबसे आखिर में जिस पर हमला हुआ, उसके कातिल नहीं मिले!

अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमलों के फौरन बाद लाशों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था. तभी, ट्विन टावर्स से कुछ दूर सुरंग में एक गोली चली और एक लाश गिरी. उस केस की कहानी, जिसे अमेरिकी पुलिस कभी सुलझा नहीं सकी.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 4, 2019, 8:23 PM IST
9/11: उस दिन सबसे आखिर में जिस पर हमला हुआ, उसके कातिल नहीं मिले!
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 4, 2019, 8:23 PM IST
आसमान काले धुएं से पट चुका था और ज़मीन का बहुत बड़ा हिस्सा मलबे से. 11 सितंबर 2001 अमेरिका के इतिहास में काला दिन साबित हो रहा था. लोअर मैनहटन के उस इलाके में भागमभाग, हड़कंप और हंगामा मचा था. मलबे से लाशें निकाली जा रही थीं, घायलों को बचाया जा रहा था. हर तरफ, चीख पुकार मची थी. इस हंगामे से कुछ ही दूर एक सुरंग में जुर्म का जश्न चल रहा था. इस सुरंग में एक गोली की आवाज़ गूंजी, एक लाश गिरी. एक ऐसा हत्याकांड, जो आज तक रहस्य बना हुआ है.

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हैनरिक अपनी बीवी और बच्चों को पोलैंड में छोड़कर बेहतर कमाने के लिए साल 2000 में अमेरिका पहुंचा था, ताकि बेहतर कमाई कर सके और अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी दे सके. अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में वह कई तरह के छोटे मोटे काम करते हुए बेहतर काम की तलाश में था. उसे एक सुपरमार्केट में हाउसकीपिंग का काम मिला था, जहां उसे कुछ ज़्यादा रकम मिलने वाली थी.



हैनरिक के लिए यह नौकरी एक अच्छा मौका थी. उसे ब्रुकलिन स्थित इस सुपरमार्केट में 11 सितंबर की शाम से काम शुरू करना था. और, उस दिन सुबह करीब पौने बजे से 10 बजे तक चार आतंकवादी हमलों में न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ध्वस्त हो चुका था. पूरी दुनिया की सबसे बड़ी खबर थी और शहर के मैनहटन इलाके में एक तनाव बन चुका था.

जगह-जगह बैरिकेड्स और पुलिस के खास इंतज़ाम चल रहे थे. पूरी पुलिस फोर्स लाशों को निकालने, घायलों को बचाने, हमलों में शिकार हुए लोगों के परिवारों की फरियाद सुनने और मदद करने जैसे कई कामों में मुब्तला थी. फोर्स के आला अफसरान हमलों की जांच और तमाम विभागों के साथ में मसरूफ थे तो पुलिस की वर्कफोर्स शहर के तमाम इंतज़ामात में. ट्विन टावर्स से कुछ ही दूर हैनरिक को ब्रुकलिन के उस सुपरमार्केट जाकर अपनी नई नौकरी ज्वाइन करना थी.

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ईवा : हलो हैनरिक! थैंक गॉड, तुम ठीक हो. हम यहां टीवी पर खबर देख रहे हैं और वहां के हालात बहुत खराब दिख रहे हैं. प्लीज़ तुम अपना खयाल रखना.
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हैनरिक : हां ईवा, डोंट वरी. मैं खयाल रखूंगा. मुझे इस सबसे क्या लेना—देना. चार पैसे कमाने आया हूं और अपना काम कर रहा हूं.
ईवा : वो तो ठीक है हैनरिक, लेकिन एक दो दिन ज़रा घर पर ही रहना एहतियात से.
हैनरिक : तुम क्यों फिक्र कर रही हो ईवा. मुझे आज नया काम ज्वाइन करना है और मैं यही सोच रहा हूं कि कैसे पहुंचूं वहां.
ईवा : नहीं हैनरिक. प्लीज़ आज मत करो ज्वाइन. इतना बड़ा हादसा हुआ है, तुम दो चार दिन बाद भी कर सकते हो, जब सब कुछ नॉर्मल हो जाए.

पोलैंड में अपने बच्चों के साथ रह रही ईवा डरी हुई थी. हैनरिक ने उसे दिलासा तो दे दिया लेकिन उसे बेचैनी थी कि वह अपनी नौकरी ज्वाइन करे. उसे पल पल की खबर आंखों से दिख रही थी इसलिए उसके लिए बहुत ज़्यादा डरावना मंज़र नहीं था. ध्वस्त हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से कुछ दूरी पर सिर्फ खबर को लेकर हलचल थी और शहर के सारे काम रोज़मर्रा की तरह चल रहे थे.

हैनरिक आखिरकार शाम को सब कुछ भांपने के बाद एहतियात से ब्रूकलिन स्थित पाथमार्क सुपरमार्केट जाने के लिए निकला. हैनरिक चूंकि पोलिश था इसलिए अंग्रेज़ी खासकर अमेरिकन अंदाज़ में ठीक से नहीं बोल पाता था. उसने किसी अजनबी से रास्ता पूछा तो उसे बताया गया कि वह सबवे यानी सुरंगनुमा रास्ते से निकल जाए. अब वह ऐसा समझा या बताने वाला उसकी बात ठीक से नहीं समझा, लेकिन हुआ ये कि वह गलत रास्ते पर था.

'भाई, ब्रुकलिन के लिए किस तरफ से जाना है?' इसी तरह पूछता हुआ वह उस सुरंग में घूम रहा था और ब्लॉक 1 की तरफ बढ़ रहा था. इस सुरंग के ब्लॉक 1 की तरफ जाते हुए अचानक हैनरिक को अजीब सा एहसास हुआ. एक अजीब सी महक, धुआं और कुछ आवाज़ें उस तरफ से आ रही थीं. धीरे धीरे कदम बढ़ा रहे हैनरिक को उम्मीद थी कि कोई उसे यहां रास्ता बताने वाला मिल जाएगा, लेकिन सच कुछ और था.

इस टनल का ब्लॉक 1 एक बदनाम हिस्सा था. हैनरिक को नहीं पता था कि वह उसी जगह पर पहुंच चुका था जहां ड्रग्स के आदी गैंगस्टरों का जमावड़ा रहता था. कोई शरीफ आदमी कम से कम अकेला तो यहां से नहीं गुज़रता था. सुरंग के इस हिस्से में सिर्फ हैनरिक ही आगे बढ़ रहा था. कुछ ही पलों बाद धुएं के पीछे उसे कुछ चेहरे नज़र आए.

हैनरिक : एक्सक्यूज़ मी, क्या आप मुझे बता सकते हैं ब्रुकलिन के लिए किस तरफ से जाना चाहिए?
एक : यहां से सारे रास्ते भगवान की तरफ ही जाते हैं डियर फ्रेंड.
हैनरिक : सॉरी. मैं गलती से यहां आ गया. मुझे कहीं और जाना था.
दो : यहां गलती की माफी नहीं सज़ा मिलती है बेटा. और तुम्हारी सज़ा ये पिस्तौल तय करेगी.

हैनरिक ने वहां से भागने की कोशिश की. उसने खुद अपना पर्स और कैश देकर छूटने की कोशिश की और आखिरकार हाथापाई करते हुए किसी तरह बचने की भी लेकिन एक गोली चलने की आवाज़ सुरंग में गूंजी और हैनरिक की लाश नीचे पड़ी थी. सुरंग के बाकी हिस्सों से गुज़र रहे कुछ लोगों को गोली की आवाज़ सुनाई दी तो वो डरकर तेज़ी से सुरंग के बाहर जाने लगे. गोली मारने के बाद वो गैंगस्टर भी वहां से कुछ ही देर में चंपत हो गए.

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सुरंग के बाहर उस दिन हुए आतंकवादी हमलों की गहमागहमी ज़ोरों पर थी और सुरंग के अंदर एक डरावना सन्नाटा था. इसी सन्नाटे में हैनरिक की लाश पड़ी थी और किसी को इस बात का पता तक नहीं था. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए भीषण हमले के बाद टेलिकम्युनिकेशन पर बड़ा असर पड़ा था और एक बहुत बड़े इलाके में फोन, बिजली और इंटरनेट की लाइनें ठप हो चुकी थीं. इन्हीं वजहों से उस सुरंग का टेक्निकल सर्विलांस भी उस शाम बंद था.

सुरंग के बाहर जो माहौल था, टीवी और आसपास के लोगों के पास से सबको खबरें मिल रही थीं कि मलबे से कितनी लाशें मिल चुकीं. लाशों की इस गिनती में हैनरिक की लाश शुमार नहीं हो रही थी. हैनरिक जिस जगह रह रहा था, वहां रात में पोलैंड से ईवा का फोन भी पहुंचा था लेकिन ईवा को कोई जवाब नहीं मिला. अगले दिन तक ईवा की हैनरिक से कोई बात नहीं हो पाई थी.

उधर, सुरंग से गुज़र रहे किसी शख्स ने हैनरिक की लाश के बारे में घंटों बाद पुलिस को खबर दी. पुलिस ने हैनरिक की लाश बरामद तो की लेकिन इस केस को अटेंड करना किसी पुलिसकर्मी की प्राथमिकता नहीं थी. हज़ारों लाशों में एक लाश हैनरिक की भी थी. बस, ये था कि ये कत्ल का मामला था. किसी तरह, हैनरिक की शिनाख्त की गई और कत्ल के तकरीबन दो तीन दिन बाद ईवा को पता चला कि हैनरिक मारा गया तो ईवा के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई.

पुलिस : देखिए मैडम, हम जांच कर रहे हैं लेकिन यहां हालात बहुत खराब हैं इसलिए इसमें कितना वक्त लगेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता. और फिर, चूंकि ये एम्बेसी का केस है इसलिए कुछ और पेचीदगी भी मुमकिन है.
ईवा : प्लीज़ सर, मुझे बताइए कि हैनरिक की मौत कैसे और क्यों हुई? हमें उसकी बॉडी कैसे मिलेगी?

अमेरिकी पुलिस के पास ईवा के सवालों और उसकी बातें सुनने का वक्त भी नहीं था और कोई जवाब भी नहीं था. ईवा के सामने एक अंधेरा छा चुका था. उसका क्या होगा? उसके बच्चों की परवरिश का क्या होगा? ये सवाल तो बाद में उठे, पहले तो ईवा इन्हीं सवालों से दो चार थी कि उसके मना करने के बावजूद हैनरिक बाहर क्यों गया? उसे किसने गोली मार दी? क्यों? क्या हुआ था? अब क्या होगा?

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9/11 की शाम मारा गया हैनरिक.


दिन, हफ्ते, महीने गुज़र गए और पुलिस को सिर्फ यही पता चला था कि सुरंग के ब्लॉक 1 में उस रात एक गोली चलने की आवाज़ कुछ लोगों ने सुनी लेकिन वहां हुआ क्या था? किसी को कुछ नहीं पता था. पुलिस के एक अफसर प्रेट ने माना कि उस रात हैनरिक को कुछ गैंगस्टरों ने लूटने की कोशिश की होगी और इसी कश्मकश में हैनरिक मारा गया होगा. लेकिन इस थ्योरी के लिए न तो कोई सबूत पुलिस जुटा सकी और न कातिल की कोई पहचान हो सकी.

बदकिस्मती से वो वक्त ही ऐसा था कि कोई क्या करता. पूरी फोर्स बराबर उस काम में जुटी थी, जो उस वक्त की सबसे बड़ी प्राथमिकता था. हर पुलिसकर्मी की छुट्टियां कैंसल थीं और सभी दिन में 12 से 16 घंटे काम कर रहे थे. अगर हैनरिक की हत्या 9/11 को नहीं हुई होती, तो बेशक हमारे पास इस केस को सुलझाने के लिए बेहतर मौका होता. ये वाकई शर्म की और ऐसी बात है जो आपका दिमाग हिला देती है. इस केस को सुलझना चाहिए लेकिन कैसे? इसका क्या जवाब है!


पुलिस के इस तरह के बयान पूरी तरह झूठे नहीं कहे जा सकते लेकिन यह विडंबना है कि हैनरिक की हत्या का यह केस पिछले करीब 18 सालों से पहेली बना हुआ है. और इसकी वजह है हैनरिक का उस तारीख पर मारा जाना.

वो एक अच्छा पति और बाप था. 10 साल के बेटे और 17 साल की बेटी के भविष्य के लिए जूझ रहा था. हैनरिक के जाने के बाद मुझे अपने बच्चों की मां के साथ ही बाप का रोल भी निभाना पड़ा. मुझे यकीन है कि भगवान के हाथों हैनरिक के कातिल नहीं बचेंगे... कभी कभी सोचती हूं कि पोलैंड में कोई अमेरिकी मारा जाता तो ज़मीन आसमान एक कर दिया जाता, लेकिन केस पहेली बनकर नहीं रहता...


ईवा ने अपने पति हैनरिक के कत्ल के केस के सुलझने की उम्मीद अमेरिकी पुलिस से छोड़ दी है. दुनिया के लिए 9/11 किसी और वजह से यादगार है लेकिन अब 66 साल की हो चुकी ईवा और उसका परिवार यह तारीख इसलिए नहीं भुला सकता क्योंकि राज़ बन चुका उनकी ज़िंदगी का सबसे अहम सच इस तारीख की तरह अब कभी नहीं आएगा.

(यह कहानी मीडिया में रही खबरों पर आधारित है.)

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