ट्रक ड्राइवरों से दोस्ती करता, फिर हाईवे पर ज़हरीली शराब पिलाकर मार डालता था

एक ट्रक का माल चुराकर बेचने के मामले में जब भोपाल में मुख्य आरोपी पकड़ा गया तो पुलिस को भनक तक नहीं थी कि यह सीरियल किलर हो सकता है. पिछले 8 सालों से मप्र, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में कत्ल कर रहा यह किलर वॉंटेड लिस्ट में कभी नहीं रहा.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 12, 2018, 8:16 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: September 12, 2018, 8:16 PM IST
गैंग ने पहले उसे यही काम दिया था कि वह ट्रक ड्राइवरों को फुसलाकर सड़क किनारे शराब पार्टी में शामिल करवा ले. लेकिन इस काम के लिए पैसा बहुत कम मिलता था इसलिए उसे वह काम करना था जिसमें पैसा ज़्यादा मिले. उसे ज़्यादा दौलत की ज़रूरत भी थी और दौलत आने लगे तो लालच किसे नहीं आ जाता. पिछले 8 सालों में, 4 से ज़्यादा सूबों में संगीन जुर्मों को अंजाम देने के बावजूद वह पुलिस की मोस्ट वॉंटेड लिस्ट में कभी नहीं रहा. एक दर्ज़ी इतना शातिर मुजरिम कैसे बन गया?

आदेश खांबरा भोपाल शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर बने इंडस्ट्रियल एरिया मंडीदीप में एक दर्ज़ी के तौर पर छोटी सी दुकान चलाया करता था. इस एरिया में कई सूबों के लोग ट्रांसपोर्ट के चक्कर में आया जाया करते थे इसलिए आदेश के ग्राहकों में कोई किसी राज्य का था तो कोई किसी और. साल 2010 में किसी ग्राहक के ज़रिये आदेश की मुलाकात एक शख़्स से हुई जो उत्तर प्रदेश के झांसी का था. दो तीन मुलाकातों के बाद इस शख्स ने आदेश से कहा 'ज़्यादा पैसे कमाना चाहो तो कभी मिलना'.

इस आदमी से मिलकर आदेश को कुछ शक तो हो गया था कि यह आदमी किसी किस्म के अपराध में शामिल हो सकता है. फिर आदेश ने उसके बारे में सोचना छोड़ दिया. इधर, 38 साल के आदेश की ज़िंदगी में कई उलझनें चल रही थीं. उसके बेटे का एक एक्सीडेंट हुआ था जिसमें वह बुरी तरह घायल हो चुका था और उसका इलाज चल रहा था. बेटे के इलाज के लिए आदेश को बड़ी रकम इधर उधर से उधार लेकर जुटाना पड़ी थी.

अपने कर्ज़ से परेशान आदेश कभी कभी हाईवे किनारे शराब पीने जाया करता था. एक रोज़ जब आदेश इसी तरह शराब पी रहा था तभी उसे वही आदमी दिखाई दिया जो उससे ज़्यादा पैसे कमाने की बात कहकर गया था. दोनों की मुलाकात हुई और आदेश ने उससे पूछा कि काम क्या करना होगा? तब उस आदमी यानी बजरंग ने कहा कि काम आसान है. हाईवे पर कई ट्रक ड्राइवर आते जाते रुका करते हैं. उन्हें बताए हुए अड्डे पर शराब पार्टी करने के लिए फुसलाकर बुलाना होगा.

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हर ट्रक ड्राइवर यानी एक आदमी को लाने की एक कीमत तय हो गई. आदेश राज़ी हो गया और उसने यह काम शुरू किया. कुछ ही हफ्तों में उसे समझ आ गया कि इस पार्टी की आड़ में बजरंग और उसके साथी ट्रक से माल चोरी करते हैं और फिर बेचकर अच्छी रकम कमा लेते हैं. लेकिन ऐसा करने से ट्रक से ज़्यादा माल नहीं निकाल पाते क्योंकि ट्रक ड्राइवर और क्लीनर शराब पीने के बाद ट्रक लेकर लौटते भी हैं.

आदेश ने कुछ ही दिनों में इस गैंग के काम करने के पूरे तरीकों और गैंग के लोगों के बारे में जानकारी हासिल कर ली थी. अब उसने गैंग लीडर के साथ मिलकर एक साज़िश तैयार की और गैंग लीडर के कहने पर पूरा का पूरा ट्रक हथियाने के प्लैन पर आगे बढ़ने का इरादा किया. आदेश ने उस रात पहली बार एक ड्राइवर और क्लीनर को न सिर्फ शराब पार्टी में बुलाया बल्कि उन्हें शराब खुद पिलाई.
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कुछ नशा हो जाने के बाद आदेश ने उनकी शराब में एक खास किस्म की दवा का ओवरडोज़ मिलाना शुरू किया और वह ड्राइवर व क्लीनर दवा मिली शराब पीते गए. कुछ देर बाद शराब के साथ साथ ड्राइवर व क्लीनर की ज़िंदगी भी खत्म हो गई. अब आदेश ने अपने गैंग के लोगों को बुलाकर ट्रक की चाबी वगैरह लेकर ट्रक ले जाने को कहा. पूरा का पूरा ट्रक हथिया लिया गया और सारा माल बेचकर ट्रक को किसी सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया.


आदेश ने तय किया था कि वह कत्ल करने का काम जल्दी जल्दी नहीं करेगा बल्कि कुछ वक्त के बाद अगले कत्ल को अंजाम देगा ताकि वह किसी तरह पुलिस के लपेटे में न आ सके. आदेश कुछ ही वक्त बाद अपना फोन और सिम भी बदलने लगा ताकि पुलिस या किसी को भी उसकी भनक लगने का कोई सुराग न रहे. शुरुआत में उसे हर कत्ल के लिए गैंग से कुछ कम रकम मिला करती थी लेकिन बाद में यह रकम 50 हज़ार तक हो गई थी.

साल 2010 से शुरू हुआ यह सिलसिला चलता रहा और अब आदेश भोपाल के जयकरण और नागपुर के तुकाराम के साथ पूरी तरह जुड़ चुका था. आदेश कत्ल करता था और जयकरण व तुकाराम ट्रक के सामान की बिक्री का काम किया करते थे. हर बार किसी प्लैन को अंजाम देने के वक्त आदेश इन दोनों को बुला लेता. भोपाल या मध्य प्रदेश तक ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक आदेश कहीं भी प्लैन को अंजाम देता और हर वारदात व ट्रक लूट की खरीद फरोख्त के डिटेल्स वह अपनी डायरी में दर्ज करता था.

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साल 2018 तक यानी 8 सालों में आदेश तकरीबन 28 ड्राइवरों व क्लीनरों को मार चुका था. आदेश एक तरह से सरगना बन चुका था और ट्रकों के माल को बेचने के सिलसिले में स्क्रैप डीलरों और राजनीति के कुछ रसूखदारों से भी उसके संपर्क बन रहे थे. पिछले महीने यानी अगस्त में आदेश ने फिर एक प्लैन बनाया. उसके लोगों ने खबर दी कि 12 अगस्त को 50 टन लोहे की रॉड्स से भरा एक ट्रक मंडीदीप से भोपाल जाएगा और ड्राइवर माखन सिंह होगा. आदेश ने जयकरण व तुकाराम को खबर की और अपने प्लैन के बारे में बताया.

इस ट्रक को रास्ते में आदेश ने रुकवाया और माखन को शराब पिलाने के बहाने अपने अड्डे पर बुलाया. माखन को अपने तरीके से मौत के घाट उतारने के बाद आदेश और जयकरण माखन को उसी ट्रक में बिठाकर ले गए और बिलखिरिया इलाके के पास एक सुनसान जगह पर माखन की लाश फेंक दी. फिर जयकरण ने ट्रक के सामान की बिक्री का इंतज़ाम किया और भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में खाली ट्रक छोड़ दिया.


अब जिस कंपनी के पास ट्रक पहुंचना था, वहां पहुंचा नहीं तो ट्रक लोड करवाने वाली कंपनी ने ट्रक और ड्राइवर के गायब होने की सूचना पुलिस को दी. तफ्तीश हुई तो बिलखिरिया के पास से माखन की लाश मिली और 15 अगस्त को ट्रक भी अयोध्या नगर से बरामद हो गया. पुलिस ने अपने मुखबिरों की मदद से सात लोगों को गिरफ्तार किया जिन्होंने उस ट्रक का माल खरीदा था. इनमें से एक ने बताया कि जयकरण ने माल बेचा जो अक्सर इस तरह माल बेचा करता है.

पुलिस जयकरण तक पहुंची और उससे सख्ती से पूछताछ की तो जयकरण ने आदेश का नाम उगल दिया और बताया कि पूरा प्लैन आदेश का ही था. अब आदेश की तलाश शुरू हुई लेकिन आदेश फरार हो चुका था. शायद वह अपनी किसी गर्लफ्रेंड के पास चला गया था. पुलिस ने अपने मुखबिरों को मंडीदीप और भोपाल में खबरदार किया. आदेश के बारे में रिकॉर्ड चेक किए लेकिन आदेश किसी भी लिस्ट में नहीं था. एक रिकॉर्ड से पता चला कि नागपुर में 2014 में एक बार उसे गिरफ्तार किया गया था लेकिन वह ज़मानत पर छूट गया था.

पुलिस अपने बिछाए जाल में आदेश के फंसने का इंतज़ार कर रही थी और पिछले 8 सितंबर को आदेश पकड़ में आ ही गया जब वह मंडीदीप अपने परिवार से मिलने के लिए आया था. पुलिस ने उसे ट्रक लूटने और ट्रक के माल को बेचने के इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया और जानना चाहा कि वह पहले कितने ट्रक लूट चुका है. पुलिस को अब तक इस बात की भनक नहीं थी कि आदेश एक सीरियल किलर है. कुछ पूछताछ के बाद आदेश ने बताना शुरू किया :

साहब, बेटे के इलाज के लिए कर्ज़ा बहुत हो गया था इसलिए पैसों की ज़रूरत थी. ज़्यादा पैसे चाहिए थे इसलिए पहला कत्ल किया था. ड्राइवरों और क्लीनरों को निशाना बनाना मुश्किल नहीं होता था साहब क्योंकि एक तो वो सफर में होते थे और दूसरे नशे के आदी. साहब, एक गरीब आदमी को ज़्यादा पैसों की ज़रूरत होती है तो वो कुछ भी कर सकता है. मैंने जो किया अपने परिवार की खुशहाली के लिए किया.


पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि नागपुर में गिरफ्तार किए जाने यानी 2014 तक आदेश आठ कत्ल कर चुका था. बाकी 20 से ज़्यादा हत्याएं उसने पिछले चार सालों में कीं. वह अब तक पुलिस की वॉंटेड अपराधियों की लिस्ट में इसलिए नहीं आया क्योंकि पिछले चार सालों से वह 50 सिम कार्ड और 45 मोबाइल फोन बदल चुका था. आदेश ने यह भी बताया कि उसने ज़्यादातर ड्राइवरों और क्लीनरों को ही मारा लेकिन होशंगाबाद में एक आदमी को एक कॉंट्रैक्ट लेकर मारा था.

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सीरियल किलर आदेश खांबरा भोपाल में गिरफ्तार.


इस कहानी में एक पेंच और यह आया कि आदेश के अब तक के बयान के मुताबिक उसे कत्ल की करीब 13 वारदातों की याद बाकी है और बाकी के बारे में उसे याद नहीं है. उसका कहना है कि अगर कोई उसे उनके बारे में जगह, तारीख या आदमी के बारे में कुछ याद दिलाए तो शायद उसे याद आ सकता है. दूसरी तरफ, पुलिस को शक है कि आदेश के बयान के हिसाब से उसने 30 हत्याएं की हैं लेकिन यह आंकड़ा ज़्यादा भी हो सकता है.

आदेश की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार ने उससे कोई संपर्क नहीं किया है. इस सीरियल किलर के खुलासे के बाद हैरान परेशान पुलिस कई राज्यों में टीमें भेजकर आगे की कार्रवाई कर रही है और आदेश के बयानों का सच जानने की कोशिश कर रही है. साथ ही, मनोवैज्ञानिक की मदद से आदेश से पूछताछ की जा रही है. आदेश की डायरी और उसकी दो गर्लफ्रेंड होने के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है.

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