#SerialKillers: ‘मुझे अफ़सोस है मैं पूरे 64 कत्ल नहीं कर पाया’

रूस के मॉस्को में 11 साल पहले एलेक्ज़ेंडर पिचुश्किन को जब सज़ा सुनाई गई, तब दुनिया को इस सबसे दुर्दांत हत्यारे के बारे में पता चला, जिसने खुद 60 से ज़्यादा हत्याओं को अंजाम देना कबूल किया. इस सीरियल किलर को ‘चेसबोर्ड किलर’ नाम दिया गया.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 30, 2018, 7:45 AM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 30, 2018, 7:45 AM IST
देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले दो सप्ताह में चार कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए रूस के कुख्यात सीरियल किलर की कहानी, जिसे तकरीबन हत्या के 50 मामलों में दोषी पाया गया.

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'मेरे लिए कत्ल किए बिना ज़िंदगी उसी तरह है जैसे आपके लिए बिन भोजन के जीना.' यह कहना था उस हत्यारे का जिसे पकड़े जाने से पहले ही बिट्सा बीस्ट का खिताब मिल चुका था. साल 2006 में मॉस्को के बिट्सा यानी बिट्सवेस्की पार्क और आसपास एक के बाद एक लाशें मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत फैली थी. करीब तीन सालों से यहां के लोगों को कुछ-कुछ दिनों में यही खबर मिलती थी कि एक और लाश मिली. टीवी के नाइट शो में इन हत्याओं पर चर्चा होती थी. सबको किसी सीरियल किलर का शक होने लगा था.

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बिट्सा पार्क काफी घना था और हरा-भरा. लहलहाते पेड़ों के एक जंगल जैसा यह पार्क इसके आसपास रहने वालों के लिए शांत और खूबसूरत जगह थी, जहां मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक के लिए कई लोग आया करते थे. कई लोगों के आने के बावजूद यह पार्क इतना बड़ा था कि सबके लिए शांति के कोने आसानी से मिल जाते थे. इस पार्क के पास एक सुपरमार्केट भी था जहां लैरिसा काम करती थी.

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लैरिसा सेल्सगर्ल के रूप में यहां काम करती थी और सामान्य महिला थी. इसी सुपरमार्केट में उसके साथ एक क्लर्क काम करता था एलेक्ज़ेंडर. एलेक्ज़ेंडर एक बेहद सामान्य और फीके चेहरे लेकिन मज़बूत काठी वाला 32 साल का आदमी था. एलेक्ज़ेंडर की आवाज़ गहरी थी और वह आध्यात्मिक अंदाज़ में बातें करता था. इन गंभीर बातों के बीच वह ऐसे जोक्स भी छेड़ा करता था जिन पर सबको हंसी आ जाती थी.

साल 2006 में 14 जून की शाम होने को थी और एलेक्ज़ेंडर अपनी कलीग लैरिसा के साथ काफी देर से बातें कर रहा था. इन बातों को लैरिसा काफी एन्जॉय भी कर रही थी और कई बार उसे एलेक्ज़ेंडर के सेंस आॅफ ह्यूमर पर हंसी आ चुकी थी. लेकिन अब बात एक सीरियस नोट पर पहुंच चुकी थी. प्यार क्या है? इस विषय पर चर्चा चल रही थी. एलेक्ज़ेंडर अपने आध्यात्मिक अंदाज़ में कभी प्यार को किसी तर्क के सहारे सबसे बड़ा सच कहता तो अगले ही पल बहुत बड़ा छल. उसने प्यार को अपनी दलीलों से अमृत भी साबित किया और मोनोलॉग अंदाज़ में उसकी बातें सुनकर लैरिसा उससे बेहद प्रभावित हो चुकी थी.

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ये बातें करते हुए एलेक्ज़ेंडर किसी अलौकिक शक्ति जैसा दिख रहा था. लैरिसा उसका ध्यान में डूबा हुआ गंभीर चेहरा एकटक देख रही थी. तभी एलेक्ज़ेंडर ने उससे पूछा कि उसे समझ तो आ रहा ना कि वह क्या कह रहा है. लैरिसा ने सिर हिलाकर हामी भरी तो एलेक्ज़ेंडर ने यह भी कहा कि वह कभी झूठ नहीं बोलता. एक दिन उस बड़ी अदालत में वह यही कहेगा कि उसने हमेशा वही कहा, जो सोचा.

लैरिसा प्रभावित थी और कुछेक बिंदुओं पर हैरान भी, लेकिन उसे कोई अंदाज़ा नहीं था कि एलेक्ज़ेंडर अस्ल में है कैसा इंसान. बस, इन लमहों में वह बही जा रही थी. तभी एलेक्ज़ेंडर ने लैरिसा को एक सिगरेट आॅफर की. लैरिसा ने सिगरेट दो होंठों के बीच रखी तो एलेक्ज़ेंडर ने लाइटर से सुलगा दी. इसी बीच सिगरेट पर एक जोक करते हुए एलेक्ज़ेंडर ने कहा कि गर्लफ्रेंड से बेहतर होती है सिगरेट जिसे आप कभी भी होंठों से लगा सकते हैं और वो कभी कोई नखरा नहीं करती. लैरिसा हंस पड़ी.

लैरिसा कश पर कश लगा रही थी और एलेक्ज़ेंडर अपनी बातें किए जा रहा था. दोनों को बातचीत करते हुए आधे घंटे से ज़्यादा वक्त बीत चुका था. अब एलेक्ज़ेंडर ने लैरिसा के सामने पार्क में वॉक के लिए चलने का प्रस्ताव रखा. लैरिसा ने मज़ाक करते हुए कहा कि क्या वह वॉक की भी कोई फिलॉसफी फॉलो करता है तो एलेक्ज़ेंडर ने टेढ़ी मुस्कुराहट के साथ कहा कि अस्ल में उसे अपने चहेते कुत्ते की कब्र पर जाने का मन है और लैरिसा साथ चले तो उसे खुशी होगी.

लैरिसा को यह बात अटपटी लगी कि एलेक्ज़ेंडर उसे अपने कुत्ते की कब्र पर ले जाना चाहता है. लैरिसा को एलेक्ज़ेंडर की कंपनी में मज़ा तो आ रहा था इसलिए वह तैयार हो गई. उसने अपने बेटे को मैसेज करते हुए बताया कि वह एलेक्ज़ेंडर के साथ पार्क में वॉक पर जा रही है और थोड़ी देर बाद लौटेगी. इस मैसेज पर उसने एलेक्ज़ेंडर का नंबर भी छोड़ दिया. दोनों ने अपने बैग्स उठाए और पार्क के लिए चल पड़े.

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पार्क में घने पेड़ों के बीच वॉक करते हुए दोनों काफी दूर एक सुनसान जगह पर निकल गए जहां से न तो कोई रास्ता दिख रहा था और न ही उन दोनों के सिवा कोई और. अब तक अपने अंदाज़ की बातें करने वाले एलेक्ज़ेंडर ने अचानक ज़िक्र छेड़ा इस पार्क में पिछले कुछ समय से मिलने वाली लाशों के बारे में और लैरिसा से पूछा तो लैरिसा ने कहा कि बेशक उसे इस बारे में पता है. तब एलेक्ज़ेंडर ने एक टेढ़ी मुस्कान के साथ पूछा कि तो यहां आने में उसे डर नहीं लगता. तब लैरिसा को हल्का सा डर लगा.

इन हत्याओं के बारे में एलेक्ज़ेंडर ऐसी बातें कर रहा था जिनके बारे में अब तक लैरिसा ने टीवी या सोसायटी में किसी से नहीं सुना था. एलेक्ज़ेंडर ने इसी बीच लैरिसा की तरफ एक बनावटी हंसी वाले भाव से देखते हुए कहा -

मैंने कहीं एक लाइन पढ़ी थी जो मुझे लगता है बहुत सटीक है. वह लाइन थी कि अगर कोई आपके करीब है या करीब आ रहा है तो उसे जानने-समझने में आपको जो खुशी मिलेगी, उससे बहुत ज़्यादा सुकून मिलेगा अगर आप उसे मार डालें.


यह कहकर एलेक्ज़ेंडर हंसने लगा और लैरिसा को अब डर लगने लगा. इसके बाद एलेक्ज़ेंडर ने अंतरंग संबंधों और कत्ल किए जाने पर बातें करना शुरू किया तो लैरिसा कई तरह के संदेहों से घिर गई. इन्हीं तमाम बुरे खयालों और काफी चलते-चलते लैरिसा अचानक बहुत थकान महसूस करने लगी थी. एक दो बार लैरिसा लड़खड़ा चुकी थी और एलेक्ज़ेंडर उसे इस वॉक के दौरान कुछ और सिगरेट्स भी पिला चुका था.

थोड़ी ही देर बाद ऐसा हुआ कि एलेक्ज़ेंडर अपनी बातें किया जा रहा था और हांफती हुई लैरिसा धीमी आवाज़ में अपने आप से बातें करने लगी थी. थकान, डर और शक के कारण कुछ ही पलों में लैरिसा चूर हो गई और बुरी तरह हांफते हुए उसने दोनों हाथों से एक पेड़ की शाख को पकड़ लिया. उस पेड़ के सहारे वह टिक गई लगभग पेड़ से चिपक गई. लैरिसा ने जब एलेक्ज़ेंडर की तरफ देखा तो उसे मदद की एक झूठी उम्मीद थी लेकिन अब एलेक्ज़ेंडर के चेहरे पर एक क्रूर हंसी थी. लैरिसा को यकीन हो चला कि एलेक्ज़ेंडर ही वह सनकी कातिल है जो इस पार्क में हुई हत्याओं के लिए दोषी हो सकता है.

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एलेक्ज़ेंडर : तुम जिस पेड़ से चिपक गई हो लैरिसा, इसी पेड़ के पिछले हिस्से पर एक लाश कुछ महीने पहले मिली थी. उस लड़की का सिर इसी पेड़ के तने से बार-बार फोड़ा गया था.
लैरिसा (बड़बड़ाते और हांफते हुए) : तुम्हें कैसे पता?
एलेक्ज़ेंडर : गलत सवाल लैरिसा. मेरा खयाल है तुम समझ सकती हो कि अब तुम्हें भी सब पता चल चुका है.

लैरिसा की आंखें खुल नहीं पा रही थीं. उसका पूरा शरीर शिथिल हो चुका था और वह पेड़ से टिकी हुई नीचे गिर चुकी थी. एलेक्ज़ेंडर पेड़ की छाल से उसके गाल खुरचने लगा था. एलेक्ज़ेंडर कह रहा था कि क्या यह जलती हुई सिगरेट इन सूखे पत्तों के ढेर में गिरकर यहां आग लगा सकती है. लगभग बेसुध हो चुकी लैरिसा कोई विरोध करने की हालत में नहीं रह गई थी. कुछ बड़बड़ा ज़रूर रही थी.

लैरिसा (कुछ खुली लेकिन थकी आवाज़ में) : तो क्या अब तुम मेरा कत्ल करने वाले हो?
एलेक्ज़ेंडर : मेरे पास और क्या चारा है? तुम समझ सकती हो ना लैरिसा कि मेरे पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है.

फिर एलेक्ज़ेंडर ने पेड़ की एक नुकीली छाल से लैरिसा के गले को खुरच दिया. लैरिसा कुछ कहने की कोशिश करती रही और एलेक्ज़ेंडर धीरे-धीरे उसे तड़पता देखता रहा. कुछ ही पलों के बाद एलेक्ज़ेंडर ने ताकत से लैरिसा के गले और सिर पर ऐसा वार किया कि लैरिसा का दम निकल गया और वह उसी पेड़ से चिपकी हुई एक लाश बनकर रह गई. कुछ देर लैरिसा से अकेले बैठे बतियाता रहा एलेक्ज़ेंडर फिर अपने घर चला गया.

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घर पहुंचकर एलेक्ज़ेंडर सामान्य दिनों की तरह फ्रेश हुआ और नहाया. फिर गुनगुनाते हुए उसने वोदका की बॉटल खोली और अपने पैग बनाए. फ्रिज और किचन से खाने का बंदोबस्त करने के बाद टीवी देखते हुए उसने डिनर किया और सोने चला गया. अगले दिन रोज़ की तरह एलेक्ज़ेंडर ने अपने सारे काम किए और अपनी डायरी लिखी. डायरी के बाद उसने अपने पसंदीदा चेसबोर्ड यानी शतरंज को निहारा और एक पेन से उस पर कुछ लिख दिया.

इसके अगले दिन यानी 16 जून को एलेक्ज़ेंडर के दरवाज़े पर दस्तक हुई. एलेक्ज़ेंडर ने दरवाज़ा खोला तो कुछ पुलिस अफसर दरवाज़े पर थे. उसने उन्हें अंदर आने को कहा और बाकायदा पानी सर्व किया. इन अफसरों ने कहा कि उसकी कलीग लैरिसा की लाश मिली है और इसी सिलसिले में वो उससे कुछ पूछताछ करना चाहते हैं क्योंकि आखिरी बार एक कैमरे में लैरिसा उसके साथ देखी गई थी. इसके बाद एलेक्ज़ेंडर ने जो किया, उसने पुलिस अफसरों को हैरान कर दिया. एलेक्ज़ेंडर ने मुस्कुराते हुए कहना शुरू किया -

बेशक, आप बिल्कुल सही जगह आए हैं. और मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि इसके बाद आपको और कहीं जाने की ज़रूरत नहीं होगी क्योंकि आपके सारे सवालों के जवाब मेरे ही पास हैं. क्या बात है? आपको यकीन क्यों नहीं हो रहा? देखिए मैंने कभी झूठ नहीं बोला है. अच्छा समझा, आपको कुछ सबूत चाहिए. रुकिए मैं आपको सबूत देता हूं... ये लीजिए. यह डायरी मेरे लिए बहुत कीमती है क्योंकि इसमें मैंने बहुत कुछ ऐसा लिखा है जो आपके बहुत काम आएगा. और हां... ये देखिए. ये मुझे बेहद अज़ीज़ चेसबोर्ड है. इसमें 64 खाने होते हैं. मुझे याद नहीं रहता इसलिए मैंने हर कत्ल की तारीख एक-एक खाने में लिखी है. मुझे बेहद अफसोस है आॅफिसर, कि इस चेसबोर्ड के दो खाने खाली रह गए. अगर आप थोड़े वक्त के बाद आते तो...


ये सब सुनने के बाद पुलिस अफसरों की हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रह गया था क्योंकि एलेक्ज़ेंडर ने यह भी कहा कि वो घबराएं नहीं, वह कोर्ट में भी सब कुछ सच कहेगा. इसके बाद शुरू हुई तफ्तीश और पूरी पड़ताल के बाद एलेक्ज़ेंडर के ट्रायल का आखिरी दिन आया सवा साल बाद यानी 24 अक्टूबर 2007 को. एलेक्ज़ेंडर को हत्या और हत्या के प्रयास के करीब 50 मामलों के लिए दोषी पाया गया. कोर्ट में उसने बार-बार कहा -

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सीरियल किलर एलेक्ज़ेंडर पिचुश्किन.


योर आॅनर, मेरे लिए बिना कत्ल किए ज़िंदगी उसी तरह है जैसे आपके लिए बिन भोजन के जीना. मैं वही कह रहा हूं जो मैं हमेशा सोचता रहा हूं, यह बिल्कुल सच है. और मेरी आपसे गुज़ारिश है कि मुझे कम हत्याओं के लिए दोषी न ठहराएं. अगर आप ऐसा करेंगे तो यह उन बाकी 11-12 लोगों के साथ इंसाफ नहीं होगा जिन्हें मैंने कत्ल किया है.


इस पूरे केस की सुनवाई के बाद उस दिन एक घंटा लगा कोर्ट को एलेक्ज़ेंडर पिचुश्किन के खिलाफ फैसला सुनाने में. एलेक्ज़ेंडर को उम्र कैद की सज़ा दी गई, इस हिदायत के साथ कि सज़ा के पहले 15 सालों तक दोषी को एकान्त कारावास में रखा जाए. इस सीरियल किलर को चेसबोर्ड किलर का नाम दिया गया जिसे दुनिया के कुख्यात सीरियल किलर्स की तुलना में और ज़्यादा खतरनाक पाया गया. एलेक्ज़ेंडर के केस के बाद रूस के कानून में सज़ा-ए-मौत के प्रावधान को फिर लागू किए जाने के बारे में लंबे समय तक चर्चा होती रही और कई विशेषज्ञों ने एलेक्ज़ेंडर जैसे अपराधियों के लिए इस सज़ा की ज़बरदस्त हिमायत की.

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