रात में बीवी के कमरे में दोस्त को जाते देख यकीन में बदल गया उसका शक

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 15, 2018, 6:49 PM IST
रात में बीवी के कमरे में दोस्त को जाते देख यकीन में बदल गया उसका शक
सांकेतिक चित्र

दो दोस्तों की इस कहानी में एक दोस्त को पहले से शक था कि उसकी बीवी के साथ उसके दोस्त का रिश्ता है. राजस्थान के झालावाड़ की इस कहानी में लाश ठिकाने लगाने की कवायद है. यह भी दिलचस्प है कि कातिल और उसके कुछ रिश्तेदार पेशेवर अपराधी हैं.

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महावीर और जल्लू दोनों दोस्त थे और दोनों के शौक व आदतें भी एक जैसी थीं. नशे की हालत में जल्लू ने एक रात जो कुछ देखा, उसे यकीन हो गया कि उसका शक सही है और महावीर गलत. जल्लू ने तैश में आकर अपनी दोस्ती का खून तो कर दिया लेकिन यह केवल तैश में किया गया जुर्म नहीं था. इसकी भूमिका लिखी जा चुकी थी. और फिर, यह कहानी खून के बाद भी जारी रही लेकिन एक गलती जल्लू को बहुत भारी पड़ गई.

राजस्थान के झालावाड़ ज़िले का रहने वाला जल्लू एक हिस्ट्रीशीटर मुजरिम था. चोरी, धोखा उसकी फितरत में था और ऐसे ही मामलों में जल्लू कई बार जेल जा चुका था. दूसरी तरफ, जल्लू की फैमिली में कई मुजरिम थे जिन पर तस्करी और हत्या तक के केस चल रहे थे. जल्लू का एक बेटा उम्र कैद की सज़ा काटते हुए जेल में बंद था. कुल मिलाकर जल्लू किसी शरीफ खानदान से नहीं था और उसकी फितरत की वजह से उससे किसी तरह की शराफत की उम्मीद नहीं की जा सकती थी.

35 साल का महावीर भी इसी ज़िले में रहता था और वह काफी समय से जल्लू का दोस्त था. महावीर के बाकी दोस्त और उसके परिवार वाले उसे समझाते थे कि जल्लू की संगत अच्छी नहीं लेकिन महावीर की नशे की लत ऐसी थी कि उसे जल्लू की दोस्ती रास आती थी. दोनों साथ मिलकर स्मैक का नशा करते थे. स्मैक एक ऐसी ड्रग्स थी जो बगैर खतरे के आसानी से मिलना मुश्किल थी लेकिन जल्लू की पहचान तस्करों से थी और वह जुगाड़ कर लेता था.

दोनों की दोस्ती वक्त के साथ अच्छी हो चुकी थी और जल्लू के घर भी महावीर का आना जाना हो चुका था. महावीर की फितरत एक ज़िंदादिल आदमी जैसी थी और वह बातों बातों में फ्लर्ट करना भी जानता था. महावीर जब भी जल्लू के घर जाता तो जल्लू की बीवी मुमताज़ के साथ हंसी मज़ाक के साथ बातचीत करता. पहले पहल तो जल्लू को लगा कि यह सामान्य बात है लेकिन धीरे-धीरे जल्लू के मन में कुछ और ही परतें बिछती चली गईं.

मुमताज़ कुछ वयस्क बच्चों की मां थी लेकिन उसे देखकर कोई कह नहीं सकता था कि उसकी उम्र ढल चुकी है. उसकी खूबसूरती और बातों का अंदाज़ कुछ ऐसा था जो अब भी आकर्षित कर सकता था. महावीर और मुमताज़ दोनों एक दूसरे से आकर्षित तो थे लेकिन उनके बीच अब तक कोई हद नहीं टूटी थी. ऐसा होता था कि जल्लू को बुलाने या जल्लू के लिए कोई मैसेज देने महावीर ऐसे वक्त पर भी उसके घर जाता था जब जल्लू घर पर नहीं होता था.

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जल्लू की गैर मौजूदगी में महावीर और मुमताज़ के बीच कुछ हंसी मज़ाक और बातचीत होती रहती थी. इस बात के कुछ गवाह जल्लू के परिवार के ही लोग थे जैसे कभी बेटे ने देखा तो कभी बेटी ने तो कभी किसी और रिश्तेदार ने. जल्लू की उड़ी उड़ी खबरें सुनने को मिलतीं और उसके मन में एक शक घर करने लगा कि महावीर और मुमताज़ के बीच कोई रिश्ता पनप रहा है. इस बारे में जल्लू ने जब मुमताज़ से बात की तो मुमताज़ ने इस शक को जल्लू के दिमाग का फितूर कहकर ऐसा कुछ न होने की कसम तक खा ली.
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शक तो शक होता है, किसी कसम से कहीं दूर होता है. जल्लू शक पालता रहा और कभी कभी अपने कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के रिश्तेदारों से इस बारे में बात करता. एकाध बार किसी ने कहा भी कि महावीर का काम तमाम कर देते हैं लेकिन जल्लू ने रोक दिया. जल्लू के पास शक का कोई सबूत नहीं था और फिर महावीर उसका दोस्त भी था इसलिए वह ऐसे किसी नतीजे पर पहुंच नहीं पा रहा था. इसी साल जुलाई के तीसरे चौथे हफ्ते में इस कहानी में एक मोड़ आया.

इस दिन महावीर और जल्लू स्मैक पीने और लेने के लिए दुर्जनपुरा गए. वहां दोनों को एक साथ कई लोगों ने देखा था. दोनों ने भरपूर नशा किया और नशा करने व गप्पें मारने में रात ज़्यादा हो चली. रात ज़्यादा हो जाने की वजह से तय यह हुआ कि महावीर ये रात जल्लू के घर ही गुज़ार ले और सुबह घर चला जाए. दोनों नशे में झूमते हुए जल्लू के घर पहुंचे. मुमताज़ समेत घर के और लोगों ने भी दोनों को देखा और सबको पता था कि महावीर रात यहीं रुकने वाला है.

महावीर एक कमरे में सो गया और जल्लू पास के ही कमरे में. मुमताज़ घर की औरतों के साथ अलग कमरे में सोई हुई थी. जल्लू की नींद बार बार टूट रही थी और एक बार उसने देखा कि महावीर उठकर मुमताज़ के कमरे की तरफ गया है. जल्लू को फौरन महसूस हुआ कि जैसे उसका शक सही था और अब उसे यकीन हो गया कि उसके दोस्त और बीवी के बीच एक रिश्ता है. जल्लू ने घर में सो रहे परिवार के एक दो लोगों को जगाया और जल्दी साथ आने को कहा.


कुछ ही देर में एक बड़ा सा चाकू लेकर जल्लू मुमताज़ के कमरे में दाखिल हुआ लेकिन वहां महावीर नहीं था. उसने मुमताज़ से पूछा तो उसने कहा कि वह गलती से आ गया था, चला गया. इस पर जल्लू को भरोसा नहीं हुआ और उसने मुमताज़ को गाली देते हुए महावीर का काम तमाम करने की बात कही. घबराई हुई मुमताज़ जल्लू को रोकने पीछे दौड़ी लेकिन तब तक जल्लू उस कमरे में दाखिल हो चुका था जहां महावीर था.

आव देखा न ताव, जल्लू ने महावीर पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया. मुमताज़ की चीख निकल गई और जल्लू को रोकने में उसे एकाध सेकंड की देर हो चुकी थी. पहले से आधी नींद में था महावीर और इस हमले के बाद खून में सना हुआ वह ज़मीन पर पड़ा रहा, उठ नहीं पाया. अधमरे हो चुके महावीर को देखकर जल्लू ने मुमताज़ को देखा और कहा कि अगर महावीर उसका आशिक नहीं है तो वह घबरा क्यों रही है? बल्कि उसे तो साथ देना चाहिए.

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जल्लू और मुमताज़ के बीच बहस चल ही रही थी कि घर के ही एक आदमी ने महावीर पर एक और वार किया और महावीर ने दम तोड़ दिया. रात भर घर के पूरे लोग इकट्ठे रहे और सभी इस बात पर राज़ी थे कि अब खून हो ही गया है तो इस बात को छुपाना है. यहां से खून को छुपाने की कहानी शुरू हुई. दूसरे गांवों और झालावाड़ में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से जल्लू ने अगले दिन बातचीत की. ये लोग भी अपराधों में शामिल रह चुके थे.

लाश को ठिकाने लगाने का प्लैन बनाने में वक्त लग रहा था क्योंकि सब अपने मशवरे दे रहे थे. उधर, उस रात ही जल्लू की बेटी नसीम और मुमताज़ ने मिलकर फर्श और कपड़ों से खून साफ कर दिया था. महावीर की लाश को उसी कमरे में कुछ चीज़ों से ढांककर रखा गया था. प्लैन बन रहा था और खून हुए करीब तीन दिन होने को थे. महावीर की लाश से बदबू फैलने लगी थी. घर के लोगों ने जल्लू को जब इस बारे में बताया तो सबने अफरा तफरी में लाश को उसी दिन ठिकाने लगाना तय किया.


प्लास्टिक के एक बड़े कट्टे का इंतज़ाम किया गया. इधर, उस कमरे और पूरे घर में अगरबत्तियां जलाई गईं ताकि बदबू से किसी को भनक न लग जाए. इस बीच, जल्लू ने अपने घर और रिश्ते के तमाम मर्दों को इकट्ठा किया और महावीर की लाश को प्लास्टिक के कट्टे में किसी तरह बंद कर उस पर प्लास्टिक लपेटी गई. इसके बाद सभी इस लाश को लेकर कालीसिंध नदी के पास गए और आसपास किसी के न होने की तसल्ली करने के बाद लाश को नदी के बहाव में फेंक दिया.

इस जल्दबाज़ी में जल्लू और उसका साथ देने वालों से एक गलती यह हो गई कि लाश के सामान की तलाशी लेना भूल गए. जब 4 अगस्त को यह लाश पुलिस ने बरामद की तो इसके पास से एक मोबाइल फोन मिला. इस मोबाइल फोन के डिजिटल सर्विलांस से चार दिनों में ही यह ब्लाइंड मर्डर केस सुलझ गया और पुलिस के हाथ जल्लू के गिरेबान तक पहुंच गए. पुलिस ने नौ आरोपियों में से जल्लू समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में जल्लू की पत्नी के साथ संबंध होने के शक के चलते महावीर का कत्ल होने की कहानी सामने आ गई.

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First published: August 15, 2018, 6:49 PM IST
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