सबसे खतरनाक जेल तोड़कर भागने की कहानी, औज़ार थे कागज़, चम्मच और कटे बाल

सबसे खतरनाक जेल तोड़कर भागने की कहानी, औज़ार थे कागज़, चम्मच और कटे बाल
सांकेतिक चित्र

पांच दशकों के बाद भी रहस्य बना हुआ एक केस. जिस जेल से कोई नहीं भाग सकता था, वहां से तीन कैदी भागे. अजीबो-गरीब तरकीबें लड़ाकर उन्होंने करिश्मा किया. फिर कभी तीनों का पता नहीं चला लेकिन 50 साल बाद एक चिट्ठी ने खलबली मचा दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2019, 4:06 AM IST
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उस जेल से कभी कोई नहीं भाग सका था. भागने की कुछ कोशिशें हुई ज़रूर थीं लेकिन सब नाकाम रहीं. एक सुनसान टापू पर बनी चारों तरफ से समुद्र से घिरी दुनिया की सबसे सख़्त, महफूज़ इस जेल का इतिहास तब बदला, जब तीन कैदी चौंकाने वाली तरकीबें लड़ाकर आखिरकार भागने में कामयाब हुए. जांच के बाद तीनों को मरा हुआ मान लिया गया. फिर 50 साल बाद इनमें से एक 'मुर्दे' के ज़िंदा होने के पक्के सबूत मिले तो जांच पर उठे सवालों से खलबली मच गई.

ये थे इतिहास बदलने वाले कैदी
कैलिफोर्निया की सैन फ्रैंसिस्को खाड़ी के बीच एक सुनसान टापू एल्कैट्रैज़. यहां बनी जेल को अमेरिका का काला पानी समझा जाता था और यहां बेहद दुर्दांत अपराधियों को सज़ा के लिए भेजा जाता था. इन्हीं कैदियों में वो चार कैदी भी थे जिनके इरादे खतरों से खेलने के थे. जॉन और क्लैरेंस नाम के एंगलिन भाई के साथ दो कैदियों का दोस्ताना बढ़ा और वो थे मॉरिस और एलन.

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इन चारों की कोठरियां आसपास थीं इसलिए ये चारों ज़्यादातर वक्त जेल से भागने के तमाम रास्तों, साज़िशों और तैयारियों पर बातचीत करते थे. इस साज़िश को कामयाब करने के लिए कई तरह के साधनों के साथ ही खतरों से खेलने का हौसला चाहिए था क्योंकि पहले जिन कैदियों ने भागने की कोशिश की थी, उनमें से कुछ को गोली तक मार दी गई थी. मॉरिस फितरतन अपराधी था और वह पहले लुइसियाना की जेल से भाग चुका था. इस जेल यानी एल्कैट्रैज़ में पहले भी कुछ वक्त कैदी रह चुका था इसलिए इस जेल की बनावट से वाकिफ था. उसी ने बाकी तीनों को साथ लेकर भागने की साज़िश का मास्टर प्लैन तैयार किया था.



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मॉरिस को इस जेल से भागने के लिए अस्ल में, मदद चाहिए थी. वह अकेले भागने की साज़िश नहीं रच सकता था. तब एंगलिन भाइयों को उसने अपना साथी बनाया. एंगलिन भाई बचपन से ही अच्छे तैराक रहे थे और अब तक उन्हें नहीं पता था कि उनकी यही काबिलियत जेल से भागने में बड़ी मदद साबित होने वाली थी.

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पुलिस फाइल में मौजूद एल्कैट्रैज़ टापू की पुरानी तस्वीर. साभार विकिपीडिया.


कई समानताओं के चलते बना था ग्रुप
एंगलिन भाइयों ने नौजवानी से बैंक डकैती और लूट का धंधा शुरू किया था. कई बार जेल जाने और अटलांटा जेल से कई बार भागने की कोशिश करने के बाद दोनों को एल्कैट्रैज़ जेल में भेज दिया गया था. यहां मॉरिस से मुलाकात हुई और वह भी पहले जेल से भागा था इसलिए तीनों दोस्त हो गए.

एलन इस ग्रुप में इसलिए शामिल हुआ क्योंकि उसे भी आज़ाद होना था लेकिन उसके पास उतना हौसला, कुशलता और तरकीब नहीं थी. एलन की कोठरी चूंकि पास ही थी इसलिए उसे मॉरिस ने अपने साथ करना ठीक समझा, वरना वह खतरा साबित हो सकता था. अब चारों ने मिलकर पूरी योजना तैयार कर ली थी और भागने की योजना पर काम शुरू होना था. एल्कैट्रैज़ में कैदियों से बेहद काम करवाया जाता था. सेना के लिए कपड़े, जूते और फर्नीचर बनाने जैसे कई काम कैदी करते थे.

ऐसे शुरू हुईं साधन जुटाने की तरकीबें
एल्कैट्रैज़ जेल जहां बनी थी, वह टापू कुदरती तौर पर खनिजों की खान था. कैदियों को इन खानों में काम करने के लिए भी ले जाया जाता था. इसी काम के लिए जेल के बाहर जाना वह मौका था, जहां से इन चारों को अपनी ज़रूरत की चीज़ें जुटाना थीं लेकिन गार्ड्स से बचकर. किसी भी कैदी के किसी भी तरह के संदिग्ध बर्ताव पर गार्ड्स को गोली मारने के आदेश मिले हुए थे इसलिए जोखिम बहुत था.

साल 1962 में मॉरिस, एंगलिन भाई और एलन जब ये योजना बना रहे थे, तब इस टापू पर इस जेल के लोगों के अलावा कोई नहीं था. सिर्फ दो तीन किलोमीटर का पथरीला इलाका और उसके बाद हर तरफ समुद्र. यहां से भागने की कोशिश करने का मतलब था जान का जोखिम उठाना. अगर कोई भी तरकीब फेल होती तो चारों को पता था कि उन्हें गोली मारी जा सकती थी. इसलिए एक फुलप्रूफ प्लैन को सतर्कता के साथ अंजाम दिया जाना था.

सबके हिस्से में थे अपने अपने काम
एंगलिन भाइयों ने मुखौटे और पुतले बनाने का काम अपने हाथ में लिया. बाद में पकड़े न जाने के इंतज़ाम के लिए इन मुखौटों और पुतलों को दोनों भाइयों ने बड़ी चतुराई और कारीगरी के साथ तैयार किया. इसके लिए जेल में रोज़ाना कैदियों के जो बाल काटे जाते थे, बालों के उन्हीं गुच्छों को जुटाया गया. कागज़ और कुछ लकड़ियों की मदद से पुतले ऐसे तैयार किए जाने थे, जो कुछ दूर से अस्ल इंसान जैसे लगें.

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एल्कैट्रैज़ जेल के बैरकों से मिले पुतले या इंसानी डमी. साभार विकिपीडिया.


मॉरिस ने जेल में खराब पड़े वाद्य यंत्र अकॉर्डियन को सुधारने की बात कहकर उसे अपने कब्ज़े में लिया. साथ ही, सबने मिलकर रेनकोट्स चुराने का काम हाथ में लिया था. इन रेनकोट्स और उस अकॉर्डियन की मदद से मॉरिस ने एक ऐसी नावनुमा चीज़ बनाने का ज़िम्मा लिया था, जो हवा की मदद से पानी में तैर सके. एलन का काम बाकी तीनों की मदद के लिए सामान जुटाने में मदद करना था. इनके साथ ही, जेल से चम्मचों और बटर नाइफ जैसे बर्तन भी चुराए जाते रहे, जो आगे काम आने थे.

जेल से निकलने के रास्ते थे बैरकों के छेद
जेल में पानी की सप्लाई के लिए पाइपों के ज़रिये समुद्र का खारा पानी बहता था. ये पाइप हर बैरक की दीवारों से होकर गुज़रते थे इसलिए खारे पानी की वजह से दीवारों का उतना हिस्सा कुछ कमज़ोर हो चुका था. मॉरिस को जेल की ये बारीकियां पता थीं इसलिए उसने बाकी तीनों को अपनी अपनी कोठरी में पाइप वाले हिस्से की तरफ से एक छेद बनाने को कहा, जो सीधे जेल के बाहर जाने का रास्ता होना था.

चारों रोज़ाना तीन से चार घंटे छोटी छोटी चम्मचों जैसे बर्तनों से काफी मोटी दीवार को तोड़कर छेद बनाने का काम करते रहे. इस काम के दौरान मॉरिस पूरे शोर के साथ अकॉर्डियन बजाता या उसमें ठोक पीट का काम करता था ताकि पहरेदारों को छेद किए जाने की आवाज़ें न आएं. छेद इतना बड़ा बनाया जाना था कि उसमें से पूरा आदमी निकल सके. मॉरिस को पता था कि इन बैरकों के पीछे जंगल जिम था और वो इन छेदों के ज़रिये उस जिम की छत पर निकल सकते थे और वहां से आसानी से भागा जा सकता था.

आखिरी तैयारियों तक पहुंची साज़िश
मई 1962 में एंगलिन भाइयों और मॉरिस के बैरकों में छेद तैयार हो चुके थे. इन छेदों की मदद से मॉरिस और किसी एक एंगलिन भाई के साथ बाहर की तरफ यानी जंगल जिम की छत पर निकलता और रेनकोट्स व अकॉर्डियन की मदद से वो ख़ास बोट तैयार करता. इस बीच बाकी दो का काम ये होता था कि वो पहरेदारों पर नज़र रखने के साथ ही, छेदों को कायदे से ढांककर रखें और कोठरी में इंसान जैसे दिखने वाले पुतलों को इस तरह रख दें कि पहरेदारों की नज़र पड़े तो उन्हें शक न हो.

फेल होने वाला था फुलप्रूफ प्लैन
जून 1962 की वह रात आ गई, जब चारों को भाग जाना था. उस रात कुछ देर के लिए बिजली चले जाने का फायदा भी चारों को मिला लेकिन, इसके बावजूद एक गड़बड़ की वजह से चारों की सांसें हलक में अटक गईं. चारों को अपनी कोठरियों के छेदों से बाहर निकलना था लेकिन, एलन अपनी कोठरी के छेद में अटककर रह गया क्योंकि छेद के आकार का उसका अंदाज़ा गलत साबित हुआ.

'दोस्तों, मैं यहां से निकल नहीं पा रहा हूं, प्लीज़ हेल्प मी.' कुछ सेकंड्स एलन की मदद करने के बाद तीनों की समझ में आ गया था कि एलन का इस तरह छेद में अटक जाना सबके लिए खतरनाक साबित हो सकता था. 'सॉरी एलन. तुम्हारी बदनसीबी के चक्कर में हम अब वापस नहीं लौट सकते. हमें उम्मीद है कि तुम समझोगे और हमारी मदद ही करोगे.'

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जेल तोड़कर भागने की कवायद के बाद बैरकों में दिखे इस तरह के सूराखनुमा रास्ते. साभार विकिपीडिया.


तीनों एलन को छोड़कर आगे बढ़ गए थे क्योंकि तीनों को पता था कि जो नाव बनाई गई थी, उस पर जितना कम वज़न हो, उतना अच्छा था. एलन के मन में एक बार खयाल आया कि वो चीख चिल्लाकर पहरेदारों को बुला ले और तीनों को भागने से रोक ले, लेकिन फिर उसने इरादा बदल दिया.

'खुश रहो दोस्तों. तुम्हें आज़ादी मुबारक हो. मेरी बदनसीबी कि मैं यहीं तक तुम्हारा साथ दे सका.'

जेल में सुबह तक नहीं हुई किसी को खबर
रात के वक्त तीनों जेल से भाग चुके थे और पहरेदारों से नज़रें चुराने के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे अपनी बनाई नाव के ज़रिये समुद्र में उतर चुके थे. उधर, सुबह तक जेल के किसी पहरेदार या अफसर को इसकी भनक तक नहीं लगी. सुबह जब एक गार्ड ने एलन को एक छेद में फंसे और जूझते देखा, तब उसने सायरन बजाकर सबको एलर्ट किया.

किसी तरह एलन को उस छेद से निकाला गया और उसके बाद एलन ने जेल प्रशासन की मदद करते हुए पूरी कहानी बयान की. फौरन बाद भागे हुए तीन कैदियों की तलाश शुरू हुई.

वो लाश किसकी थी?
जेल के आसपास और समुद्र में खोज के दौरान कुछ नहीं मिला. जेल के अफसरों को हैरानी इस बात की भी थी कि समुद्र के बेहद ठंडे पानी में कोई भी 20 मिनट से ज़्यादा तैर नहीं सकता था. अफसर ये भी मान रहे थे कि जो नाव तीनों ने बनाई थी, वो ज़्यादा देर समुद्र में तैर नहीं सकती थी.

काफी वक्त तक तलाश चली लेकिन पानी में या टापू के किनारों पर कहीं कोई सुराग नहीं मिला था. फिर नॉर्वे के एक जहाज़ ने गुज़रते हुए खाड़ी में एक लाश देखी और एल्कैट्रैज़ जेल को सूचित किया गया क्योंकि इस लाश के बदन पर जेल के ही कपड़े नज़र आ रहे थे. लेकिन जहाज़ रोककर इस लाश की शिनाख्त करना नामुमकिन था इसलिए लाश किसकी थी? ये सवाल ही रह गया.

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केस एफबीआई के पास था. सालों तक छानबीन चलती रही. जेल के किसी आदमी की मदद के बगैर इतनी बड़ी साज़िश कैसे बन सकती थी? तीन कैदी भागे तो समुद्र में बचे कैसे? और गए कहां? ये कुछ ऐसे सवाल थे जो एफबीआई के सामने हमेशा खड़े रहे. बहरहाल 15 सालों से लंबी जांच के बाद एफबीआई ने 70 के दशक में ये केस ये कहकर बंद कर दिया कि वो तीनों कैदी समुद्र में डूबकर मर गए.

जब सामने आया तीसरा एंगलिन भाई
सालों तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला और एफबीआई के निष्कर्ष को सही मान लिया गया कि तीनों मर चुके थे. फिर 2015 में एक डॉक्यूमेंट्री सामने आई जिसमें दावा किया गया कि तीनों भागने में कामयाब हुए थे और तीनों ने अपनी पूरी ज़िंदगी जी. इस दावे के बाद एफबीआई के साथ ही कई विभागों में खलबली मच गई.

अस्ल में, इस डॉक्यूमेंट्री में एल्कैट्रैज़ जेल से भागे दो एंगलिन भाइयों के तीसरे भाई रॉबर्ट ने 2013 में मरते वक्त सच का खुलासा करते हुए बयान दिए थे जिनमें उसने बताया था कि उसके दोनों भाई ज़िंदा थे और सालों से वह उनके संपर्क में था. लेकिन, क्या रॉबर्ट का बयान ही वो सबूत था जिससे यह मान लिया जाता कि तीनों ज़िंदा रहे थे?

फिर सामने आई एक चिट्ठी
इस दौरान जब कई तरह की अफवाहें और खबरें उड़ने लगीं तब एक चिट्ठी का खुलासा हुआ जो जेल से भागे जॉन एंगलिन ने अपने भाई रॉबर्ट को लिखी थी. इस चिट्ठी में जॉन ने कुछ जानकारियां दी थीं जैसे 1962 में वो तीनों एल्कैट्रैज़ जेल से भाग गए थे. तीनों समय समय पर एक दूसरे की खबर लेते रहे. जॉन ने बताया कि मॉरिस 2008 में मरा था और उसका भाई क्लैरेंस साल 2011 में. जॉन ने यह भी लिखा कि वो चिट्ठी लिखते वक्त 83 साल की उम्र में नॉर्थ डैकॉटा के मिनॉट इलाके में रहते हुए कैंसर से जूझ रहा था.

इस खुलासे के बाद जांच शुरू हुई. फिंगरप्रिंट्स, हैंडराइटिंग और मिनॉट में जॉन का पता तलाशा गया. फिर लंबे वक्त तक चली जांच के बाद कहा गया कि कोई सबूत इतना पुख्ता नहीं मिला जिससे साबित हो सके कि ये चिट्ठी जॉन ने ही लिखी थी.

आखिर में एक बयान और एक अनसुलझा सवाल
सारी जांचों और तफ्तीशों के बावजूद आज तक ये केस अनसुलझा रहस्य है. सच क्या था और क्या है? किसी को नहीं पता. एल्कैट्रैज़ जेल को 1963 में बंद कर दिया गया था और आखिरी वक्त तक जेल में गार्ड रहे जिम ने इस केस से जुड़ा बयान देते हुए साल 2018 में कहा कि उसे 'हमेशा लगता रहा और अब भी लगता है कि वो तीनों समुद्र में डूबकर मर गए होंगे.' जिम के मुताबिक तीनों ने एक मौका बनाया जो कल्पना से परे था क्योंकि जेल में ऐसे मौके की गुंजाइश थी ही नहीं.

इसके बावजूद अब तक एक सवाल है जिसका जवाब किसी को नहीं पता. वो सवाल ये है कि अगर वो चिट्ठी जॉन ने नहीं लिखी थी तो किसने और क्यों लिखी थी? और वो चिट्ठी लिखने वाले ने इतनी जानकारियां चिट्ठी में कैसे दीं? इसे किसी का मज़ाक या झूठ समझा जा सकता है लेकिन इस केस में मॉरिस, जॉन और क्लैरेंस के जेल से भागने के बाद अगले 50 सालों तक उनसे जुड़ा कोई सूत्र न होना अमेरिका जैसे देश के सिस्टम और एफबीआई जैसी जांच एजेंसी की प्रतिष्ठा पर सवाल तो खड़े करता ही है.

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