'अपाहिज' बेटी ने ज़ालिम मां की जान लेकर कहा 'और कोई रास्ता न था'!

'अपाहिज' बेटी ने ज़ालिम मां की जान लेकर कहा 'और कोई रास्ता न था'!
सांकेतिक चित्र

मां-बेटी की एक ऐसी कहानी, जिस पर एकबारगी यकीन होना मुश्किल है. मां बरसों तक बेटी पर अत्याचार कर उसे अपाहिज बनाती रही. अंजाम हुआ कि बेटी ने रच डाली कत्ल की साज़िश और फिर हुआ एक हैरतअंगेज़ खुलासा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2018, 8:26 PM IST
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इस बार भी पार्टी में उसे राज़ खुल जाने का डर सता रहा था इसलिए एक पल के लिए भी अपनी बेटी को छोड़ नहीं रही थी. व्हीलचेयर पर बैठी बेटी से कोई अगर कुछ पूछता तो वह खुद जवाब देती और कहती कि उसकी बेटी सबकी बातें समझती नहीं है. सबको बेटी की हालत से वाकिफ कराती और बेटी को चुप कराती वह पार्टी खत्म कर चली गई, तब उसकी बेटी ने पूछा - 'मां तुम मुझे किसी से बात क्यों नहीं करने देतीं?' इस सवाल पर उसने फटकारते हुए कहा - 'शट अप. किसी से कोई बात करने की ज़रूरत नहीं है.'

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'चलो जिप्सी, तुम्हारे सोने का वक्त हो गया है बेटा.' यह कहते हुए डी ने कंप्यूटर टेबल से व्हीलचेयर को बिस्तर के पास तक खिसकाया और सहारा देकर जिप्सी को बिस्तर पर लिटा दिया. चादर ओढ़ाकर, दवाएं दीं. ब्रीदिंग मशीन लगाई और बत्ती बुझाकर डी चली गई. कुछ देर बाद जिप्सी ने अपना छुपाकर रखा मोबाइल फोन निकाला और निक से धीमी आवाज़ में कुछ देर बातचीत की.



आज फिर मां ने मुझे किसी से बात नहीं करने दी. सबसे कहती रही कि मेरी उम्र भले 23 साल की है लेकिन दिमागी हालत 7 साल की बच्ची जैसी है! मां झूठ क्यों कहती है? मैं कितने सालों से ऐसे ही जी रही हूं. मेरी समझ नहीं आता कि कोई मां अपनी बेटी के साथ ऐसा क्यों और कैसे कर सकती है?

अमेरिका के विस्कॉन्सिन इलाके में बने इस मकान में डी अपनी बेटी जिप्सी के साथ लंबे वक्त से रह रही थी. डी ने अपने पति को सालों पहले छोड़ दिया था और उसे जिप्सी से कभी मिलने नहीं दिया था. बस उसे यह पता था कि जिप्सी नाम की उसकी एक बेटी है जो शारीरिक और मानसिक रूप से अपाहिज थी, व्हीलचेयर पर ही रहने वाली बच्ची. आखिर यह माजरा क्या था? हकीकत डी के अलावा किसी को नहीं पता थी.

जिप्सी की यादों में सब कुछ था. उसकी मां बचपन से ही उसे व्हीलचेयर पर ही रहने की हिदायत देती रही और जबरन उसे व्हीलचेयर का आदी बनाती रही. समय समय पर जिप्सी के सिर के बाल डी शेव कर देती थी और कहती थी कि कीमोथैरेपी में बाल जल जाने से तकलीफ होगी इसलिए ऐसा ज़रूरी था. डी ने बचपन से जिप्सी को यही बताया था कि उसे ल्यूकेमिया नाम की खतरनाक बीमारी और साथ ही, मेंटल डिसॉर्डर था.

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डी हर रात जिप्सी को ब्रीदिंग मशीन और कई दवाएं देती थी और कहती थी कि उसके इलाज के लिए ज़रूरी था. इन दवाओं और मशीन्स के कारण जिप्सी के बाल कमज़ोर हो चुके थे और उसके दांत गिर चुके थे. जिप्सी एक रोगी ही नज़र आया करती थी. इधर, पिछले कुछ वक्त से कुछ लोग जिप्सी की हालत का जायज़ा लेने घर आते थे और डी को अच्छी खासी रकम का चेक या कैश बतौर डोनेशन देते थे.

ऐसे ही एक दिन जब एक डॉक्टर ने जिप्सी की हालत को जांचा तो उसने डी से कहा कि उसे नहीं लगता कि जिप्सी को इस तरह की कोई खतरनाक बीमारी है. उस डॉक्टर ने यह भी कहा कि ठीक से जांच करवाई जाए और सच पता किया जाए कि डी जिस गलतफहमी की शिकार है, उसका सच क्या था. यह सुनकर डी ने उस डॉक्टर को घर से जाने के लिए कहा लेकिन अब जिप्सी के सवाल शुरू हो चुके थे.

जिप्सी : मां ये सब क्या हो रहा है? आखिर बात क्या है?
डी : यह कोई फ्रॉड डॉक्टर दिखता है. मैंने तुम्हारे टेस्ट ठीक से करवाए हैं और तुम्हें तो पता है कि तुम्हारा इलाज चल रहा है.
जिप्सी : लेकिन मां मैंने ल्यूकेमिया और मेंटल डिसॉर्डर के बारे में पढ़ा है और मुझे नहीं लगता कि मुझमें इसके सिम्पटम्स रहे हैं. हो सकता है आपको कोई डॉक्टर गलत फैक्ट्स दे रहा हो या जांच में कुछ गलती हुई हो.
डी : शट अप जिप्सी. मैं तुम्हारी मां हूं. जैसा कहती रही हूं, तुम बचपन से करती रही हो और ज़िंदगी भर करोगी. समझीं?

जिप्सी बचपन से ही अपनी मां से डरी सहमी रहा करती थी क्योंकि डी ने उसे सख़्ती बरतते हुए पाला था. बचपन में जब जिप्सी व्हीलचेयर पर न रहने की कोशिश करती थी, तो वह कई बार बुरी तरह मां से पिट चुकी थी. फिर इतने सालों से चल रही दवाओं के कारण भी जिप्सी में कई तरह की समस्याएं हो चुकी थीं लेकिन वह न तो पागल थी और न ही किसी तरह अपाहिज. अब उसने तय कर लिया था कि वह मां की कैद में और नहीं रहेगी.

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जिप्सी चोरी छुपे अपने बॉयफ्रेंड निक के साथ आॅनलाइन रिश्ता कायम कर चुकी थी. दोनों के बीच आॅनलाइन प्रेम प्रसंग चल रहा था जिसमें दोनों के बीच उत्तेजक चैटिंग भी होती थी. इंटरनेट पर पढ़कर और डॉक्टरों की बातों से जिप्सी को यह भी समझ आ रहा था कि वह नहीं, बल्कि उसकी मां एक खास किस्म के मेंटल डिसॉर्डर की मरीज़ हो सकती थी जिसे मुन्चॉज़िन सिंड्रोम कहा जाता है. इस सिंड्रोम से ग्रस्त मरीज़ समझता है कि कोई अपाहिज है और उसे उसकी पूरी देखभाल करनी है.

कुछ ही दिनों में जिप्सी ने अपनी आज़ादी का रास्ता बुनना शुरू कर दिया था. जून 2015 में एक दिन जिप्सी ने पहले फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा - 'आखिरकार वो कु** मर गई'. फिर पुलिस को अपने घर बुलाया और कहा कि उसकी मां की मौत हो गई थी. पुलिस उस मकान में पहुंची तो चाकू के हमलों से डी की लहूलुहान लाश बिस्तर पर पड़ी देखी. व्हीलचेयर पर बीमार सी दिखने वाली जिप्सी को देखकर पुलिस कैसे शक कर सकती थी?


पुलिस ने लाश को कब्ज़े में लेकर जांच शुरू की लेकिन कोई सिरा समझ नहीं आ रहा था कि डी की हत्या की वजह और हत्यारा कौन हो सकता था? अगले ही दिन पुलिस एक जनरल स्टोर के बाहर पहुंची तो यह देखकर चौंक गई कि वहां जिप्सी अपने बॉयफ्रेंड निक के साथ घूम रही थी, बिल्कुल किसी सामान्य लड़की की तरह. इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और सच सामने आ गया.

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जिप्सी ने कबूल किया कि उसने 10 सालों तक अपनी मां की प्रताड़ना झेलने के बाद इस कैद से आज़ाद होने के लिए मां की हत्या की साज़िश रची. डी को मारने में निक ने उसका साथ दिया. आॅटिज़्म डिसॉर्डर के शिकार निक ने भी कबूल किया कि वह जिप्सी की आज़ादी चाहता था और उसे इस तरह घुटते और जीते जी मरते नहीं देख सकता था इसलिए डी को मारना ज़रूरी था. जिप्सी के खिलाफ जब अदालत में केस की सुनवाई शुरू हुई तो वहां उसके बाप ने हैरानी जताई.

जिप्सी के बाप को उस दिन पता चला कि उसकी बेटी अपाहिज नहीं थी. आखिरकार जिप्सी को सज़ा दी गई और उसके बाप ने कहा कि सज़ा और इलाज के बाद जब भी जिप्सी रिहा होगी, उसके पिता के दरवाज़े उसके लिए हमेशा खुले हैं.

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