ये है 'बौने' का 'लॉलीपॉप', अंडरवर्ल्ड में 20 साल चला जिसके नाम का सिक्का!

मैक्सिको के नार्को-टेररिज़्म में एल चापो के मुख्य सप्लायर ने कैसे खड़ा किया अपना कार्टेल? किन टैक्नीक्स से उसने टनों कोकीन की स्मगलिंग और कराड़ों डॉलर्स का कारोबार? और आखिर में कैसे बना सरकारी गवाह? पूरी कहानी.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 8, 2019, 8:26 PM IST
ये है 'बौने' का 'लॉलीपॉप', अंडरवर्ल्ड में 20 साल चला जिसके नाम का सिक्का!
न्यूज़ 18 हिंदी क्रिएटिव.
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 8, 2019, 8:26 PM IST
मैक्सिको के एक होटल की लॉबी से अपने सुरक्षा घेरे के बीच एल चापो गुज़र रहा था. तभी, चापो के एक खास आदमी ने उसके कान में कुछ कहा और चापो ने देखा कि एक नौजवान लड़का उसके सामने खड़ा था. चापो का फैन और उसके साथ काम करने की तमन्ना रखने वाला रैमिरेज़ 1990 में पहली बार चापो से मिल रहा था.

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उस वक्त मैक्सिको में ड्रग्स के धंधे में तस्करी करने वाले ज़्यादा से ज़्यादा 37 फीसदी मुनाफा पाते थे लेकिन रैमिरेज़ की डिमांड ज़्यादा थी. इसके बावजूद रैमिरेज़ का आत्मविश्वास देखकर चापो ने उसे ग्रीन सिगनल दिया लेकिन एक हिदायत के साथ.

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चापो के चेहरे पर एक मुस्कान थी क्योंकि अचानक उसे एक पुरानी बात याद आई थी. जब उसने इस लड़के की तरह ड्रग्स अंडरवर्ल्ड में शुरूआत की थी, तब तस्करी में तेज़ी की वजह से उसे 'रैपिडो' नाम मिला था. रैमिरेज़ में उसे अपनी नौजवानी दिखाई दी. 'वेलकम टू द गैंग, 'रैपिडो' जूनियर..' चापो ने रैमिरेज़ को अपना सप्लायर बनाया और रैमिरेज़ ने चापो का खास होने का सफर शुरू किया.

चापो की सीक्रेट हवाई पट्टी और रैमिरेज़ का अपना कार्टेल
रैमिरेज़ ने अपने टैलेंट से अपना नाम और रसूख़ बनाना शुरू किया. क्विंटलों में कोकीन की खेप की तस्करी होती थी और इसके लिए रैमिरेज़ ने हवाई ट्रांसपोर्ट का सहारा लिया. ये कोकीन से भरे प्लेन्स मैक्सिको में चापो की गुप्त हवाई पट्टी पर लैंड और वहीं से टेकऑफ होते थे. तस्करी के लिए इतना बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने वाले चापो की कामयाबी के पीछे रैमिरेज़ जैसे उसके हुनरमंद साथी थे.

रैमिरेज़ में दो कमाल की खूबियां थीं. पहली वो धंधे की बारीकियां और बदलते वक्त के साथ धंधे में पहल करने की रणनीति अपनाता था. और दूसरी ये कि अपनी हिफाज़त के लिए रैमिरेज़ कोई समझौता नहीं करता था. उसने चापो से रिश्वत देने की कला अपने आप ही सीखी और आला अफसरों को अपनी जेब में रखना शुरू किया. चापो की सीनालोआ कार्टेल के मुख्य सप्लायर के तौर पर रैमिरेज़ ने नॉर्थ वैली कार्टेल खड़ा किया और उसका सरगना बन बैठा.

रैमिरेज़ का अंडरवर्ल्ड में नाम था 'लॉलीपॉप'
चापो का खास हो जाने और चापो का हाथ सिर पर होने की वजह से अंडरवर्ल्ड में रैमिरेज़ को नाम मिला 'चुपेटा'. इस स्पैनिश शब्द का मतलब है लॉलीपॉप. कुछ ही वक्त बाद हवाई रास्ते से तस्करी जोखिम का काम हो गया क्योंकि अमेरिका ने इस रास्ते से हो रही तस्करी को रडार पर लिया. जोखिम से बचने के लिए अब लॉलीपॉप ने आसमान से सीधे समुन्दर में छलांग लगाई.

आसमान से सीधे समुन्दर में लगाई छलांग
फिशिंग बोट्स यानी मछली पकड़ने वाली नावों के ज़रिये कोकीन और बाकी ड्रग्स की तस्करी का दौर शुरू हुआ. समुन्दर के बीचों बीच ड्रग्स के कार्गो एक महफूज़ और छुपे हुए हिस्से में पहुंचकर माल की अदला बदली करते और ड्रग्स की तस्करी चलती रहती. चापो और लॉलीपॉप के बीच डील मक्खन की तरह चल रही थी और ये दोनों के लिए कितने फायदे का सौदा था? इसका आंकड़ा ये है कि 1990 से 1996 के बीच चापो ने लॉलीपॉप की सप्लाई की हुई ड्रग्स बेचकर 640 मिलियन डॉलर कमाए.

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चापो की सरपरस्ती के बावजूद लॉलीपॉप अपने धंधे में एक तरह से खुद का बॉस था. उसके अपने तरीके और कायदे थे. जब समुन्दर में तस्करी शुरू हुई, तब लॉलीपॉप ने रिश्वत और अपने रसूख़ के दम पर ड्रग्स से लदी मैक्सिकन नावों और कार्गो पर कोलंबियन कप्तानों की तैनाती करवाई. अपनी सुरक्षा के लिए उसने अपना खुद का समुन्दर रेडियो बनवाया, जिसके ज़रिये वो और उसके तमाम साथी समुन्दर में हो रही हर तरह के जहाज़ों की हलचल पर निगरानी रखते थे और संदेश भेजते थे.

इन्हीं पैंतरों की वजह से लॉलीपॉप का ड्रग्स स्मगलिंग का कारोबार ज़्यादातर सुरक्षित चला. कई बार उसके कार्गो और नाव सरकारी अफसरों को चकमा देने में कामयाब रहे. एक बार ये पैंतरा नाकाम भी हुआ था और तब लॉलीपॉप को भारी नुकसान भी हुआ. सरकारी निगरानी वाले जहाज़ रेड मारने के लिए मुस्तैद थे और तमाम तरकीबें अपनाने के बावजूद जब बचने का रास्ता नहीं मिला तो लॉलीपॉप के कहने पर ही 20 टन ड्रग्स से लदे उसके जहाज़ को उसके कप्तान ने ही समुन्दर में डुबो दिया था.

लॉलीपॉप ने पुलिस फाइल से अपने सभी निशान मिटाए
ये तमाम घटनाक्रम 90 के दशक में हो रहा था और लॉलीपॉप बराबर जांच एजेंसियों और पुलिस की नज़र में था. लेकिन, लॉलीपॉप की चालाकियां पुलिस की सोच से हमेशा आगे की साबित होती रहीं. वह अपने करियर की शुरूआत में जब कोलंबिया में गिरफ्तार हुआ था, तब घूस देकर ने केवल जेल से छूटा था बल्कि उसने सरकारी अफसरों को घूस देकर पुलिस और सरकारी रिकॉर्ड से अपनी पहचान और शिनाख्त के हर सबूत को खत्म करवाया था.

पुलिस से बचने के लिए लॉलीपॉप यानी रैमिरेज़ ने कई तरीके अपनाए थे. 90 के ही दशक में उसने एक छोटी प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी. लेकिन, 90 के ही दशक में वह फिर गिरफ्तार हुआ तो 24 साल की सज़ा हुई. और, एक बार उसने कई मिलियन डॉलर की रिश्वत देकर अपनी आज़ादी का रास्ता साफ किया. चार साल से भी कम वक्त जेल में रहकर वह आज़ाद हो गया.

प्लास्टिक सर्जरी और फिर गिरफ्तारी
इसके बाद रैमिरेज़ पुलिस के जोखिम से हर कीमत पर बचना चाहता था. उसने पहला पैंतरा यह अपनाया कि एक प्लास्टिक सर्जरी करवाकर अपनी शक्ल पूरी तरह बदल ली और सर्जरी के ज़रिये अपने फिंगर प्रिंट्स तक मिटाने की जुगत भिड़ाने की कोशिश भी की थी. दूसरी चाल उसने ये खेली कि उसने अपना पूरा कारोबार चापो और बाकी साथियों को सौंपने की डील की. 'मैं परदे पर नहीं, परदे के पीछे रहना चाहता हूं.' यह कहकर उसने अमेरिका में अपना कारोबार बंद कर दिया या एक तरह से बेच दिया.

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रैमिरेज़ प्लास्टिक सर्जरी से पहले और सर्जरी के बाद. चित्र साभार.


साल 2007 में वह ब्राज़ील में पकड़ा गया. लेकिन, तब वह अपना चेहरा बदल चुका था इसलिए पुलिस और जांच एजेंसियों को काफी मशक्कत करना पड़ी, ये साबित करने में कि वाकई रैमिरेज़ उनकी गिरफ्त में था. फिर 2010 में रैमिरेज़ ने अपने कुछ गुनाह कबूल किए. पिछले कुछ समय से अमेरिका के ब्रुकलिन में चल रहे चापो के ट्रायल में रैमिरेज़ बतौर सरकारी गवाह चापो के साथ 20 साल की अपनी पार्टनरशिप और धंधे के बारे में राज़ अदालत में खोल रहा है. चर्चा है कि रैमिरेज़ का सरकारी गवाह बन जाना, कैद से छूटने की उसकी एक और चाल भी हो सकती है क्योंकि वह लगातार आज़ाद होने की कोशिश में है.

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