PAGE-3 मर्डर : ताकत की जंग में दौलत के लिए औरत का इस्तेमाल

PAGE-3 मर्डर : ताकत की जंग में दौलत के लिए औरत का इस्तेमाल
सांकेतिक चित्र

मुंबई के हाई प्रोफाइल मर्डर केस की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. राजनीति और कारोबार से जुड़े किरदारों के बीच डीलिंग, ब्लैकमेलिंग, सेक्स, साज़िश और रंजिश हर तरह के मोड़ से गुज़रती यह कहानी हत्या तक कैसे पहुंचती है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2018, 6:38 AM IST
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मायानगरी में हुए कत्ल की कहानी में दौलत की माया भी है, औरत की भी और ताकत की लड़ाई भी. इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में यों तो करीब दर्जन भर किरदार हैं लेकिन कहानी चार-पांच किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है. कत्ल को क्यों और कैसे अंजाम दिया गया? इस कहानी के खास किरदारों की झलक कुछ इस तरह है.

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राजेश्वर - घाटकोपर का 57 वर्षीय मशहूर हीरा व्यापारी और ज्वैलर. महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री का पर्सनल असिस्टेंट रह चुका सचिन, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में सक्रिय है और बीजेपी का सदस्य भी. 41 वर्षीय डॉली, कहने को एक ब्यूटीशियन लेकिन लड़कियों को सचिन से मिलवाती है और दोनों मिलकर उन्हें बॉलीवुड या शॉर्ट फिल्मों में काम दिलवाने का दावा करते हैं. दिनेश, रेप के आरोप में सस्पेंड पुलिस कॉंस्टेबल, जो लोकल आर्म्स यूनिट में रह चुका है. इन किरदारों के साथ कहानी शुरू होती है.



डॉली : सचिन भाऊ, कितना टाइम हो गया, कोई काम नहीं? हमें भूल गए क्या?
सचिन : तुम्हें भूल जाएंगे डॉली डार्लिंग तो अपन लोग का काम कैसे चलेगा. बस, यूं ही.. ये लड़की कौन है? फ्रेश पीस है क्या?
डॉली : क्या भाऊ? मेरी कज़िन है, ज़ारा. खूबसूरती तो देख ही रहे हो, टैलेंट भी है इसमें. इसको सैटल करवाना है बॉलीवुड में. आपके साथ इतना काम किया है, एक फेवर तो मेरा हक बनता है.
सचिन : ज़रूर, ज़रूर. ज़ारा, ऐसा है डार्लिंग कि बॉलीवुड में सीधी एंट्री मुश्किल है लेकिन चक्कर चलाएंगे अपन. तब तक कुछ शॉर्ट फिल्मों में काम करना होगा लेकिन डोंट वरी, पैसा-वैसा सब मिलेगा. डॉली इसके लिए जल्दी प्रोजेक्ट जुगाड़ता हूं.

हर तरह की अय्याशी से लबरेज़ एक पार्टी में डॉली ने सचिन और ज़ारा की मुलाकात करवाई थी. ज़ारा का हुस्न देखकर ही सचिन मन ही मन उस पर लट्टू हो चुका था. इधर, सचिन की हैसियत के बारे में ज़ारा को डॉली से पता चल चुका था इसलिए उसे भी उम्मीद थी कि जल्द काम मिलेगा. पार्टी में कई लोग थे और सचिन कुछ से मिल रहा था. डॉली कुछ लोगों के बारे में ज़ारा को बता रही थी.

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'ये एक डायमंड मर्चेंट है, नाम राजेश्वर है और सच में राजा है. इसे किंग कहते हैं सोसायटी में. वो हट्टा-कट्टा बंदा महेश है. सचिन का खास है और सचिन इससे ही बहुत से काम करवाता है. और उसको तो तू जानती ही है. हां वही, टीवी एक्ट्रेस. ऐसी कई लड़कियों को सेट करने के पीछे सचिन का ही हाथ रहा है..'

पार्टी में ज़ारा देख रही थी कि टीवी में कभी कहीं दिख चुकीं कई लड़कियां मौजूद थीं जिनमें से कुछ किसी के साथ जा रही थीं तो कुछ किसी के साथ. कई तरह के लोगों के बीच आंखों ही आंखों में इशारेबाज़ी चल रही थी. एक-दो लोग ज़ारा से भी मिलने आए और उसे ड्रिंक्स आॅफर करने के साथ ही अपनी झूठी शान दिखाने की कोशिश की. उधर, सचिन और किंग के बीच बात चल रही थी.

किंग : ये देख सचिन, मेरी आठ उंगलियों में सात हीरे हैं. अब तू बता, तेरे पास कोई हीरा है या नहीं?
सचिन : खास लोगों की खास खिदमत करना अपन को आता है किंग. डोंट वरी, आज तक जिस हीरे पर आपने उंगली रखी है, वो आपके लिए हाज़िर किया गया है. आप बस हुक्म करो.
किंग : यही तो मुश्किल है सचिन, हुक्म करना पड़ता है इतने टाइम बाद भी. आंखें पढ़ना कभी सीखेगा तू? कुछ कर यार. फोन पर ये मॉडल्स के साथ बकबक करने से अब मन नहीं भरता. समझ रहा है ना? कुछ कर.

जो पेज 3 पार्टी दिख रही थी, अस्ल में, कई लोगों के कारोबार का अड्डा थी. अब यहां से कहानी कुछ इस तरह आगे बढ़ी कि सचिन और किंग के बीच में कई तरह की पुरानी डीलिंग्स हो चुकी थीं और सचिन पिछली डील के पेमेंट के लिए किंग को फोन किया करता था. ऐसा नहीं था कि किंग पैसा देना नहीं चाहता था लेकिन किंग की अपनी मुश्किलें थीं. एक लड़की के साथ संबंधों की तस्वीरों को लेकर किंग को कोई ब्लैकमेल कर रहा था.

किंग को यकीनन नहीं पता था लेकिन उसे शक था कि सचिन इसके पीछे था. सचिन इस ब्लैकमेलिंग से जुड़ी किसी भी बात से इनकार कर चुका था. इधर, सचिन ने कुछ एड्स के लिए ज़ारा को वीडियोज़ में बतौर मॉडल काम दिलवाया था. ज़ारा को वह मन ही मन अपनी मिल्कियत समझने लगा था. ज़ारा के लिए किंग की नीयत भी खराब हो चुकी थी और वह सचिन से कुछ एक बार कह चुका था कि वह कोई भी कीमत देने को तैयार है.

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सचिन पहले भी कुछ मामलों में दिनेश की मदद ले चुका था. दिनेश और महेश अक्सर सचिन के लिए वसूली का काम करने में मदद करते थे. दिनेश कुछ ज़्यादा ही गुस्सैल मिज़ाज का था यानी तैश में जल्दी आ जाता था. अब बात इस मोड़ तक पहुंच गई कि किंग के पास सचिन की एक रकम फंस गई थी. उस पर किंग अक्सर ज़ारा को लेकर सचिन को मजबूर करता था. अब सचिन को खुराफात सूझी तो उसने एक प्लैन बनाया.

ज़ारा के साथ किंग का एक वीडियो बनाना है, ऐसा कि किंग नाम की मुर्गी हमारे जाल में फंस जाए और सोने के अंडे देती रहे. ज़ारा को इस काम के लिए मैं किसी तरह राज़ी कर लूंगा. होशियारी से तू ये काम करना. और अगर ज़रूरत पड़े तो, समझ गया ना... और हां, दिनेश तेरे साथ रहेगा. बाकी का प्लैन बाद में बताता हूं.


इसके बाद सचिन और किंग के बीच एक बहस भी हुई जिसमें किंग ने अपनी दौलत और धाक का जलवा दिखाया और सचिन ने भी अपनी पहुंच का. लेकिन, बात फिर संभल गई और दोनों आगे बढ़ गए. फिर भी दोनों के मन में एक खलिश तो रह ही गई. इधर, सचिन ने डॉली से बातचीत की और एक वीडियो शूटिंग के सिलसिले में ज़ारा को फिक्स किया. ज़ारा तैयार हो गई क्योंकि वह पहले भी सचिन के लिए कुछ काम कर चुकी थी और उसे उम्मीद थी कि सचिन के ज़रिये बॉलीवुड में एंट्री मिल सकती थी.

फिर सचिन ने अपने एक साथी के कॉंटैक्ट के ज़रिये एक गैरेज में काम करने वाले सुहैल से एक कार पर नकली नंबर प्लेट लगाने को कहा. नकली नंबर 1111 था. सुहैल ने पूछा तो सचिन ने वीडियो शूटिंग का बहाना बना दिया. अब सचिन इस गैरेज का पुराना कस्टमर था और रसूखदार आदमी था इसलिए उस पर शक करने या उसकी बात से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठा. सचिन ने सुहैल को कार ड्रॉप करने की जगह भी बताई. अब प्लैन पूरी तरह तैयार था.

बीते 29 नवंबर को प्रणीत ने ज़ारा को होटल से पिक किया और आॅर्डर के मुताबिक उस कार में बैठा जो सचिन ने भिजवाई थी. सुहैल और लिनोज़ नकली नंबर वाली इस कार में प्रणीत और ज़ारा को लेकर निकले. विक्रोली के पास इंतज़ार कर रहे किंग के पास ये गाड़ी पहुंची. किंग के पास फोन पहुंचा - 'गाड़ी का नंबर है चार इक्के. आप उसमें आ जाओ. उसमें आपकी डिलीवरी भी है और यहां रेव पार्टी में आपका बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है.'

एक सिगनल पर इंतज़ार कर रहा किंग इस कार में बैठा और पीछे की सीट पर ज़ारा के साथ छेड़खानी की कोशिश करने लगा. कुछ ही देर में कार ऐरोली के पास पहुंची और एक फोन पर मिले आॅर्डर के बाद कार रुक गई. सुहैल और लिनोज़ कार छोड़कर चले गए और यहां से कार में महेश, दिनेश और सिद्धेश दाखिल हुए. ज़ारा आगे ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठी और सिद्धेश और दिनेश पीछे की सीट पर किंग के अगल-बगल बैठ गए जबकि महेश ड्राइविंग सीट पर था. प्रणीत कार को किसी और गाड़ी से फॉलो कर रहा था.

किंग : तुम सब पागल हो गए हो क्या? मैं अभी बात करता हूं सचिन से.
दिनेश : बड़ा महंगा फोन लगता है ये तो किंग! इधर लाओ. सचिन से काय को बात करने का, अपन है ना. सचिन ही भेजेला है अपन को. और तुम्हारे वास्ते केक भी भेजेला है. ये केक खाने का और चुप रहने का.
किंग : आखिर तुम लोग चाहते क्या हो? मेरे और सचिन के बीच सब कुछ क्लियर है, तुम उससे बात तो करो.

किंग को दाल में काला नज़र आ चुका था इसलिए वह बचने का रास्ता तलाश रहा था. तभी, दिनेश ने केक उसे जबरन खिलाने की कोशिश की. किंग को बेहोश करने के लिए इस केक में कुछ मिला दिया गया था. किंग ने जब केक खाने से मना किया तो दिनेश ने उसके मुंह पर केक मसलकर जबरन खिलाने की कोशिश की. किंग चीखता रहा और ज़ारा हैरानी से सवाल करती रही लेकिन तीनों ने मिलकर ज़ारा को चुपचाप रहने को कहा और अब किंग को काबू करने की कोशिश की.

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किंग को काबू करने के चक्कर में गाड़ी रोकी गई. इसी मारपीट और तैश में तीनों ने मिलकर किंग की सांस रोककर उसे मौत के घाट उतार दिया. ज़ारा ये सब देखकर पसीने पसीने हो चुकी थी. 'मुझसे बोला था कि बस एक इंटिमेट सीन के वीडियो की शूटिंग करना है. लेकिन तुम लोगों ने तो.. ये सब..!' दिनेश और महेश ने ज़ारा को डराकर उसे खामोश रहने को बोला. 'तुझे पता नहीं है, यहां किसकी कितनी ताकत नहीं है, इसलिए भूल जा सब कुछ. तूने कुछ नहीं देखा, समझी, एकदम चुप रहने का.'

फिर तीनों ने फोन पर बातचीत की और गाड़ी को पनवेल की तरफ एक सुनसान जगह पर ले गए. दिनेश, महेश और सिद्धेश ने मिलकर लाश को वीराने में फेंक दिया. इसके बाद, प्रणीत के साथ महेश अपने घर चला गया. सिद्धेश और दिनेश वहीं पास के एक होटल में चले गए और ज़ारा फोन पर मिले आॅर्डर के हिसाब से इन दोनों के साथ होटल चली गई. ज़ारा रात भर होटल के उस कमरे में अकेली परेशान जागती रही.

अगले दिन सचिन होटल पहुंचा और वहां से ज़ारा को ले गया. सचिन ने ज़ारा को उसके ओशिवरा के घर पर छोड़ा और चला गया. अगले करीब आठ-दस दिन तक तफ्तीश चलती रही लेकिन लापता डायमंड मर्चेंट का कोई पता नहीं चला. फिर कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड के आधार पर कड़ियां जुड़ना शुरू हुईं और लाश की बरामदगी के साथ एक के बाद एक सब पुलिस के हत्थे चढ़ते चले गए. सुहैल, लिनोज़ और ज़ारा गवाह बन चुके हैं जबकि इस केस में बयानों के आधार पर कई थ्योरीज़ को लेकर पुलिस जांच कर रही है.

(सच्ची घटनाओं पर आधारित यह कहानी अब तक पुलिस जांच के हवाले से मीडिया में आई खबरों पर आधारित है.)

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