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#SerialKillers: खुद को 'सुपरमैन' और 'भगवान' समझने लगा था यह कातिल

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 4:59 PM IST

पढ़िए मध्य प्रदेश के रमन राघव की कहानी. कुछ ही साल पहले सतना ज़िले में पकड़े गए इस कातिल को साइको किलर कहा गया. खुलासा हुआ कि इसने दो ज़बरदस्त उसूल बना रखे थे जिनके कारण यह लंबे समय तक किसी के हाथ न आने में कामयाब रहा.

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  • Last Updated: August 9, 2019, 4:59 PM IST
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देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले तीन सप्ताह में 7 कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए देश के हालिया दौर के एक ऐसे सीरियल किलर की कहानी जिसे साइको किलर माना गया और मध्य प्रदेश के रमन राघव का नाम दिया गया.

 

नशे में उस रात सरमन अपने दोस्त डबल को उस कत्ल की कहानी सुना रहा था, जो उसने इंदौर में कुछ ही समय पहले किया था. कहानी सुनाते हुए वह बयान कर रहा था कि कैसे खून बहा और खून देखकर उसे कितना सुकून मिला. सरमन कह रहा था कि बड़ी मेहनत का काम है कत्ल करना, इसलिए मारने के बाद भूख लगी तो पास की दुकान पर जाकर उसने चाट खाई. डबल भी नशे में था और उसने अचानक सरमन से पूछा कि 'क्या कभी किसी से मुहब्बत की है?' सरमन की लय टूटी और जैसे उसका नशा उतर गया. उसने डबल से कहा - 'अबे पागल हो गया है क्या? छोड़ और मत पी.'

सरमन अपनी फिलॉसफी को छोड़कर कुछ ही दिनों से इस लड़के के साथ मिलकर कुछ जरायम को अंजाम दे रहा था, जिसका फर्ज़ी नाम डबल था. डबल ने बातों-बातों में सरमन को बताया कि उसे एक लड़की से प्यार हो गया है और अब वह ये सब छोड़कर एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहता था. सरमन उस रात डबल पर बहुत नाराज़ हुआ और उसका यही कहना था कि इन सब फालतू चक्करों में पड़ना अपनी ज़िंदगी और करियर को तबाह करना है. फिर नशे में डबल को छोड़कर सरमन कहीं चला गया.

अगले दिन डबल ने सरमन से अपनी प्रेमिका को मिलवाने के बारे में बात की तो सरमन ने बाद में मुलाकात करने की बात कहकर उस वक्त बात टाल दी. अगली एक रात सरमन और डबल एक सुनसान जगह पर शराब पी रहे थे. सरमन ने जब देखा कि डबल नशे में आ चुका है, तब सरमन ने अपनी पिस्टल निकाली और डबल को एक और चीज़ दिखाते हुए कहा कि इसे साइलेंसर कहते हैं. इसे पिस्टल के मुंह पर ऐसे फिट करते हैं और इसको लगाकर जब गोली चलाते हैं तो गोली चलने की तेज़ आवाज़ नहीं होती.

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डबल नशे में यह सब देखकर खुश हो रहा था कि सरमन ने एक गोली डबल की छाती पर दाग दी. डबल एक हाथ अपनी छाती पर रखकर हैरानी से सरमन की तरफ देख रहा था तब सरमन ने कहा - 'लड़की के चक्कर में दोस्त से दगाबाज़ी. मैं इसलिए अकेले अपना काम करता था, क्योंकि तेरे जैसे पागलों को इस दुनिया से मोहब्बत हो ही जाती है. तूने कहा साथ में काम करेंगे. तेरा भरोसा किया मैंने लेकिन तू भी निकल लिया. अब दुनिया से निकलने का टाइम हो गया तेरा. चल बाय.' यह कहकर सरमन ने एक गोली और डबल को मारी और वह खत्म हो गया.
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सरमन के लिए यह न तो पहला कत्ल था और न आखिरी. मध्य प्रदेश के पन्ना ज़िले से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद इंजीनियर बनने के लिए सरमन ने सागर के एक कॉलेज में दाखिला लिया था लेकिन एक साल भी पूरा नहीं किया और कॉलेज छोड़ दिया. उसे छोटे मोटे अपराधों का चस्का लग चुका था. उसने मंदिर में चोरी की थी और वह पकड़ा नहीं गया था. उसने एक दुकान के गल्ले पर हाथ डाला ​था और वह फिर भी पकड़ा नहीं गया था. अब उसका डर कम होता जा रहा था और जल्दी अमीर होने की ख्वाहिश बढ़ती जा रही थी.

चोरी के कुछ पैसों से सरमन ने एक देसी कट्टे का जुगाड़ कर लिया था और अब वह छोटी-मोटी नहीं बल्कि अच्छी रकम के लिए हाथ मारना चाहता था. पन्ना में वह एक बड़े व्यापारी के बारे में जानता था. यह व्यापारी लाखों रुपये का कारोबार करता था. कुछ दिन सरमन ने उस पर नज़र रखी और फिर एक रात उसे यह जानकारी थी कि यह व्यापारी बड़ी रकम लेकर किस रूट से जा रहा है. वहीं एक सुनसान जगह घात लगाए बैठे सरमन ने उस व्यापारी को गोली मार दी और पांच लाख रुपये छीन लिये.

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अब सरमन को कत्ल करने का चस्का लग चुका था और वह लूट के मकसद से ही कत्ल करता था. तीन-चार कत्ल के बावजूद उसका सुराग किसी को नहीं लगा तो उसके हौसले और बुलंद हुए. अब वह कत्ल के बाद लाश को एक बैग में डालकर या किसी गाड़ी में रखकर किसी दूसरे शहर में फेंककर आता था, ताकि पुलिस कन्फ्यूज़ होती रही.

इसी दौरान एक दिन पिस्तौल मुहैया कराने वाले एक गुंडे से उसकी मुलाकात हुई तो सरमन ने अपने लिए एक पिस्तौल की जुगाड़ करने को कहा. कुछ ही दिनों में उसने एक पिस्तौल सरमन को दी तो सरमन फिल्मी अंदाज़ में उस पिस्तौल के साथ पोज़ करता रहा और उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके हाथ में कोई पावर आ गई है. फिर सरमन ने उस पिस्तौल के बारे में पूछताछ की कि यह ठीक से काम करेगी कि नहीं. अब वह उस पिस्तौल को अस्ल में जांचना चाहता था.

एक सुनसान इलाके में बने एक मकान में ताक-झांक करने के बाद वह भीतर घुसा. अगले ही पल एक औरत उसके सामने आई और उसने जैसे ही पूछा कौन? तो सरमन ने सिर्फ दो हाथ दूर से उस पिस्तौल से गोली दाग दी. वह औरत नीचे गिर पड़ी और उसकी जान चली गई. सरमन ने एक पल भी उस औरत को नहीं देखा बल्कि वह उस पिस्तौल को देखकर खुश हो रहा था.

उसने मन ही मन बुदबुदाया - 'कमाल की चीज़ है यार, अब अपन भी सुपरमैन हैं. अब अपन जो चाहें कर सकते हैं.' यह कहते हुए सरमन को महसूस हो रहा था कि उसे कोई अलौकिक शक्ति मिल गई है और वह भगवान बन बैठा है जो जिसे चाहे मार सकता है.


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अब सरमन कातिल से सीरियल किलर बनने के सफर पर चल पड़ा था. उसने अपने दो पक्के उसूल बना रखे थे, पहला उसूल था किसी के साथ मिलकर नहीं बल्कि अकेले कत्ल करना और दूसरा उसूल था मोबाइल फोन का इस्तेमाल कभी न करना. ये दोनों उसूल उसे लंबे समय तक कई कत्लों के बावजूद पुलिस से बचाए रखने में कारगर साबित भी हुए. फिर इंदौर के पास देवास में उसने एक दोस्त बना लिया था जिसके साथ कुछ जरायम को अंजाम भी दिया लेकिन जब यह दोस्त किसी लड़की के साथ प्यार में पड़ गया तो सरमन ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया और कसम खाई कि अब किसी को हरगिज़ अपने साथ शामिल नहीं करेगा.

इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, पन्ना और सतना ज़िलों में उसने ज़्यादातर कत्लों को अंजाम दिया. फिर साल 2011 में सरमन सतना पहुंचा.

25 जुलाई 2011 को अपने प्लैन के तहत सुबह 10 बजे सरमन सतना के मुख्तियारगंज में मौजूद था और अपने शिकार का इंतज़ार कर रहा था. उसे इंतज़ार था सराफा कारोबारी रामदत्त सोनी का. सोनी जैसे ही अपनी पत्नी शोभा के साथ अपनी दुकान के पास पहुंचा, वैसे ही घात लगाए बैठा सरमन सामने आया और उसने दोनों पर गोलियां दागना शुरू कर दिया. गोली लगने से शोभा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया लेकिन रामदत्त ने गोली लगने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और सरमन को पकड़ने की कोशिश की.

रामदत्त को इतनी हिम्मत से काम लेते हुए और लगातार शोर मचाने के कारण आसपास के नौजवानों और दुकानदारों ने भी रामदत्त का साथ दिया. काफी लोग सरमन पर टूट पड़े थे और कुछ ही देर में सरमन के हाथ से पिस्तौल छिटक चुकी थी और वह कई लोगों की पकड़ में था. ​फौरन पुलिस को बुलाया गया और सरमन को पुलिस के हवाले कर दिया गया.

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सतना स्थित मुख्तियारगंज इलाका जहां सरमन ने सराफा कारोबारी पर हमला किया.


इसके बाद थाने के टॉर्चर रूम में जैसे ही सरमन से सीनियर पुलिस अफसर ने पूछताछ शुरू की तो सरमन ने कहा -

साहब, मारिएगा नहीं. आप जो पूछेंगे, मैं सब बता दूंगा. सब कुछ कि मैंने किस-किस को कैसे कहां-कहां मारा. लेकिन आप मारना नहीं साहब. मैं जल्द ही बहुत बड़ा आदमी बनने वाला हूं... अभी चुनाव लड़ना है और फिर...


पुलिस अफसर को हंसी नहीं आ रही थी बल्कि हैरानी थी क्योंकि अंदाज़ा हो चुका था कि उनके हाथ मामूली बदमाश नहीं बल्कि सीरियल किलर लग चुका है. पूछताछ में 28-29 साल के सरमन ने कम से कम 22 लोगों को अलग-अलग शहरों में कत्ल कर देने का जुर्म कबूल किया और पुलिस ने उसके पास से लूट का माल भी बरामद किया. मध्य प्रदेश के रमन राघव कहे गए इस साइको किलर सरमन शिवहरे ने अपने एक शिकार के कत्ल का इरादा इसलिए बदल दिया था क्योंकि बिल्ली उसका रास्ता काट गई थी. फिलहाल कुछ मामलों में दोषी साबित हो चुका मध्य प्रदेश का सीरियल किलर सरमन जेल में है.

 

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मध्य प्रदेश का रमन राघव कहा गया सीरियल किलर सरमन शिवहरे.


 

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First published: July 8, 2018, 8:44 AM IST
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