#SerialKillers : पुलिसकर्मी के रेप व मर्डर के बाद पकड़ में आया था ये कातिल

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 21, 2018, 2:14 PM IST

एक ऐसे सीरियल किलर की कहानी जिसने तमिलनाडु सहित पूरे दक्षिण भारत की पुलिस की नाक में दम कर रखा था. 30 रेप और 15 हत्याओं के मामले में आरोपी यह सीरियल किलर दो बार जेल से भागा. एक पुलिसकर्मी ने तो इस कातिल के कारण खुदकुशी कर ली थी.

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देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले 5 सप्ताह में कई सनसनीखेज़ कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए उस सीरियल किलर की कहानी, जो 13 हत्याओं और करीब 30 बलात्कारों का आरोपी रहा. इसकी वजह से एक पुलिस वाले ने खुद को गोली मारी थी तो इसने एक महिला पुलिसकर्मी को भी अपना शिकार बनाया था.

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23 अगस्त 2009 : कोयंबटूर से करीब 50 किलोमीटर दूर पेरुमनल्लूर में राजनीतिक एमके स्टालिन की सभा होने वाली थी. सभा के बंदोबस्त के इंतज़ाम चल रहे थे और पुलिस बल तैनात किया गया था. राजनीतिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की जा रही थी लेकिन उस दिन एक नयी कहानी सामने आने वाली थी क्योंकि एक पुलिस कॉंस्टेबल एक खतरनाक जुर्म की शिकार होने वाली थी.

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सभा के लिए बंदोबस्त किया जा रहा था. आला अफसर निर्देश दे रहे थे और जूनियर पुलिसकर्मी इधर उधर दौड़ धूप कर रहे थे. बैरिकेड्स लगाए जा रहे थे, लोगों के बैठने के लिए इंतज़ाम किया जा रहा था, सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा था और सभा में शामिल होने वाले लोगों की जांच के लिए व्यवस्था हो रही थी. महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से इंतज़ाम हो रहा था और इसके लिए महिला पुलिस भी इस बंदोबस्त में शामिल थी. कुछ लोगों का आना शुरू हो गया था.

आने वाले लोगों में एक आदमी था जो साधारण शर्ट पेंट पहने था और उसके कंधे पर काले रंग का एक बैग था. वह सभा में लोगों के बैठने की जगह पर न जाकर पूरे सभास्थल को देख रहा था. सभास्थल के आसपास का जायज़ा ले रहा था और वह अपनी धुन में एक तरफ चला गया. इसी बीच, 39 वर्षीय महिला कॉंस्टेबल जयामणि को एक फोन करना था और फ्रेश होना था इसलिए वह सभा की जगह से कुछ दूर बने वॉशरूम की तरफ गई.

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पेरुमनल्लूर सैटेलाइट नक्शा.

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कुछ तंबुओं के पीछे यह ऐसी जगह थी जहां कोई चहल—पहल नहीं थी. जयामणि बाथरूम गई और फ्रेश होने के बाद जैसे ही बाथरूम से निकली तो पीछे से उसके सर पर एक ज़ोरदार चोट हुई और वह लड़खड़ा सी गई. हमलावर ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा और उसके हाथ बांध दिए. यह सब उसने बड़ी फुर्ती से किया इसलिए जयामणि को न तो चीखने का मौका मिला और न ही कोई विरोध करने का. इसके बाद लगभग बेहोशी की हालत में हमलावर किसी तरह खींचकर जयामणि को पास खड़ी मोटरसाइकिल तक ले गया.

किसी तरह उसने जयामणि को मोटरसाइकिल पर बिठाया और एक कपड़े से उसे अपने साथ बांध लिया. मोटरसाइकिल से वह जयामणि को एक सुनसान इलाके में बनी एक छोटी सी झोपड़ी में ले गया. जयामणि को कुछ होश आया तो उसने देखा कि वह एक झोपड़ी में फर्श पर पड़ी हुई है और पीठ पीछे उसके दोनों हाथ और एक साथ दोनों पैर बंधे हुए हैं. जयामणि चीखना चाह रही थी लेकिन मुंह में ठूंसे गए कपड़े की वजह से उसकी आवाज़ ज़्यादा तेज़ निकल नहीं पाई.

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इस झोपड़ी में जब हमलावर दाखिल हुआ तो करीब एक मिनट तक जयामणि को बड़ी बड़ी आंखें निकालकर देखता रहा. जयामणि घबराने लगी थी और लगातार चीखने की कोशिश कर रही थी. अब वह जयामणि के पास आकर बैठा और बोला — 'चिल्लाना है? यहां कौन सुनेगा तेरी आवाज? ले चिल्ला ले.' और यह कहकर उसने जयामणि के मुंह से कपड़ा निकाल लिया. चार—छह बार चीखने के बाद जयामणि को समझ आ गया कि यह जगह आबादी से दूर है इसलिए चीखने का कोई फायदा नहीं.

अब जयामणि ने पूछा — 'कौन हो तुम? क्या चाहते हो?' उस हमलावर ने तिरछी हंसी के साथ कहा — 'मैं शंकर. और मैं तुझे चाहता हूं.' अब जयामणि को यकीन हो चुका था कि उसके साथ ज़बरदस्ती होने वाली है. वह छूटने की कोशिश में छटपटा रही थी और शंकर उसे देखकर खुश हो रहा था. इसके बाद जैसे शंकर ने जयामणि के कपड़े खींचने शुरू किए, उसने चीखना शुरू कर दिया लेकिन वहां उसकी चीखें सुनने वाला कौन था.

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लगातार चीख रही जयामणि को देखकर शंकर हंसता जा रहा था और उसके कपड़े फाड़ता जा रहा था लेकिन जब जयामणि का चिल्लाना बंद नहीं हुआ तो थोड़ी देर बाद शंकर के चेहरे पर हंसी नहीं बल्कि गुस्सा था. अब उसने चीखकर जयामणि के मुंह पर एक घूंसा मारा और उसे चुप रहने को कहा. मुंह पर ताकत से पड़े करारे घूंसे के कारण जयामणि के मुंह से खून निकलने लगा और वह डरकर चुप हो गई. उसके खून को शंकर ने चाटा और जयामणि के विरोध के बावजूद पूरी ताकत से जयामणि को काबू कर शंकर ने बलात्कार किया.

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बलात्कार के बाद शंकर झोपड़ी से बाहर चला गया और जयामणि वहीं पड़ी सिसकती रही. उस झोपड़ी में कोई चीज़ नहीं थी यानी बर्तन, कपड़े, बिछाने ओढ़ने का कोई सामान और न ही कोई ईंट, पत्थर, कुछ नहीं. हाथ पैर बंधे होने के कारण जयामणि अपने फटे हुए कपड़ों को भी ठीक नहीं कर पा रही थी. कुछ कोशिश करने के बाद वह एक तरफ करवट लेकर पड़ी रही. कुछ देर बाद शंकर खाना लेकर आया और उसने जयामणि से खाने के लिए पूछा. जयामणि ने मना किया तो उसका हिस्सा एक तरफ रखकर अपना हिस्सा खाने लगा.

शाम ढल चुकी थी और खाना खाकर शंकर वहीं सो गया. जयामणि जागती रही और भागने की कोई तरकीब सोचती रही. काफी देर सोचने और जुगत लगाने के बीच जयामणि की आंख लग गई. आधी रात हो चुकी थी और अचानक जयामणि को अपने शरीर पर कोई छुअन महसूस हुई. उसने आंखें खोलीं तो देखा कि शंकर एक बार फिर जानवरों की तरह उसे घूरते हुए उसके शरीर को छू रहा था. जयामणि ने नफरत से खुद को दूर करना चाहा लेकिन शंकर ने फिर उसे घूंसा दिखाया और फिर बलात्कार किया.

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अगले कुछ दिनों तक इस झोपड़ी में जयामणि के साथ कई बार शंकर बलात्कार कर चुका था. एक दिन उसने जयामणि के हाथ पैर रस्सियों में नहीं बंधे थे. उसने मौका देखकर भागने की कोशिश की तो शंकर ने उसे पकड़ लिया. शंकर ने जयामणि को बहुत पीटा और खुले हाथों वाली जयामणि ने भी हाथ में आई रस्सी से शंकर को मारना शुरू किया. रस्सी के वार से शंकर का गला छिल गया तो वह गुस्से में आ गया. उसने जयामणि को धक्का देकर गिराया और अपने काले बैग से बड़ा सा चाकू निकाल लिया.

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अब डरी हुई जयामणि के पास भागने के सिवा कोई चारा नहीं था. वह झोपड़ी से बाहर की तरफ भागी तो शंकर उस पर झपटा और उसने जयामणि की कमर पर चाकू घोंप दिया. कराहकर गिर पड़ी जयामणि पर शंकर ने चाकू से और हमले किए और जयामणि ने दम तोड़ दिया. रात होने तक शंकर ने इंतज़ार किया और फिर वहीं झोपड़ी के पास उसने झाड़ियों के बीच फेंककर लाश को घास और झाड़ियों से ढंक दिया.

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इधर, एक महिला कॉंस्टेबल के अगवा होने के बाद से ही पुलिस हरकत में आ चुकी थी और छानबीन कर रही थी लेकिन कई दिनों तक पुलिस को यह तक पता नहीं था इस कांड के पीछे किसका हाथ है. अपहरण के करीब एक महीने बाद 9 सितंबर 2009 को पुलिस ने जयामणि की लाश बरामद की. उधर, जयामणि को मारने के बाद ही शंकर वहां से जा चुका था. अपने एक साथी सेल्वम के साथ मिलकर उसने एक और आदमी का कत्ल किया. इसके बाद 10 सितंबर को शंकर की तलाश के लिए पुलिस ने बड़ी मुहिम छेड़ी.

सामने आई सीरियल किलर की कहानी
एक महीने बाद यानी 10 अक्टूबर को शंकर पुलिस की पकड़ में आ गया. उसे जेल भेजा गया. बाद में पता चला कि शंकर यानी एम जयशंकर एक सीरियल किलर था और वह करीब 13 बलात्कार और हत्याओं को अंजाम दे चुका था. जयशंकर हाईवे पर ढाबों के आसपास से जिस्मफरोशी का धंधा करने वाली औरतों को अपना शिकार बनाता था और कभी खेतों या जंगलों में अकेली दिखने वाली औरतों को भी. अकेली औरतें उसका शिकार थीं जिनके साथ बलात्कार के बाद वह उन्हें मौत के घाट उतार देता था.

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सीरियल किलर एम जयशंकर


अक्टूबर 2009 में पहली बार जेल भेजे जाने के बाद शंकर ने दिमागी मरीज़ होने का ड्रामा भी किया लेकिन दिमागी डॉक्टरों ने उसे बिल्कुल ठीक करार दिया तो उसे जेल भेजा गया. इसी के चलते मीडिया में जयशंकर को साइको किलर का नाम मिल चुका था. 2011 में वह पहली बार पुलिस की कैद से भागा था. पुलिसकर्मी चिन्नास्वामी की पकड़ से जब जयशंकर भागा था, तब चिन्नास्वामी ने शर्मिंदगी के कारण खुदकुशी कर ली थी. जेल से भागने के बाद उसने रेप और कत्ल करने का सिलसिला बदस्तूर जारी रखा. 2013 में वह फिर पकड़ा गया लेकिन मई 2013 में वह फिर नाटकीय ढंग से जेल से भागकर सुर्खियों में था.

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इस बार वह जेल की 15 फीट की दो दीवारों के बाद 30 फीट की एक दीवार चढ़कर जेल से बाहर कूदा था. साथ ही उसने बिजली के तारों का सुरक्षा घेरा भी भेदा था. इस तरह भागने के चक्कर में शंकर की टांग टूट गई थी. जेल में उसकी दोस्ती एक अपराधी पाशा से हुई थी और वह जेल से भागने के बाद पाशा से मदद लेना चाहता था. पाशा ने उसे मोटरसाइकिल दिलवाकर भागने में मदद करने का भरोसा दिलाया और करीब तीन चार दिन तक वह जेल के पास ही छुपा रहा. लेकिन इस बीच पाशा पुलिस से मिल गया और उसने जयशंकर को पकड़वा दिया.

 

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30 बलात्कार और 15 हत्याओं के आरोपी जयशंकर को कुछ मामलों में दोषी करार दिया जा चुका था और वह बेंगलूरु जेल में सज़ा काट रहा था. इसी साल फरवरी में जयशंकर ने फिर जेल से भागने की साज़िश रची थी लेकिन उसकी यह साज़िश नाकाम कर दी गई. उसे जेल में तगड़ी सुरक्षा के बीच सबसे अलग एक कोठरी में रखा जाता था. भागने की साज़िश नाकाम होने के बाद 27 फरवरी 2018 को जयशंकर ने दाढ़ी बनाने वाले ब्लेड से अपना गला काटकर जेल में ही खुदकुशी कर ली.

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First published: July 21, 2018, 1:53 PM IST
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