#SerialKillers: क्राइम आॅफ सेंचुरी- 100 बच्चों को मार डालना था उसका टारगेट

जैसे ही इस सीरियल किलर ने सौवें बच्चे का कत्ल किया, वैसे ही पुलिस और अखबार को चिट्ठी लिखकर गुनाह कबूल किया और खुदकुशी करने चला गया. पाकिस्तान के साथ दुनिया के इतिहास में भी इस किलर का नाम सबसे क्रूर और नृशंस कातिलों में शुमार है.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 22, 2018, 2:19 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: July 22, 2018, 2:19 PM IST
देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले 5 सप्ताह में कई सनसनीखेज़ कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए पाकिस्तान के वहशी सीरियल किलर की कहानी, जिसने सौ बच्चों का कत्ल किया.

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एक शुरुआती टीनेजर लड़का जब मालिश के लिए ग्राहक के साथ उसके घर गया तो वह ग्राहक उसे इतने पैसे देने वाला था, जितने वह तीन हफ्तों में कमा पाता. उस ग्राहक का बर्ताव देखकर यह लड़का सोच रहा था कि कोई फरिश्ता उसकी ज़िंदगी में आ गया है. इस लड़के को यह थोड़े ही पता था कि फरिश्ते और मौत के फरिश्ते की शक्ल में क्या फर्क होता है.

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मुस्लिमों के संघर्ष का प्रतीक माना जाने वाला स्मारक था मीनार-ए-पाकिस्तान, जहां उस वक्त कई टूरिस्ट आया करते थे. टूरिस्टों के अलावा दरगाहों की तरफ जाने वाले लोग भी इसी चौक से होकर गुज़रा करते थे. 70 लाख की आबादी वाले शहर लाहौर का यह इलाका घना बसा हुआ और भीड़-भाड़ वाला था जहां कोई भी भीड़ और शोर में आसानी से गायब हो सकता था. यह जगह जुर्म के लिए कितनी मुफीद थी!

एक शाम इसी भीड़भाड़ में 14-15 साल का एक लड़का एजाज़ अपने छोटे भाई रियाज़ के साथ हाथ में संदूकची लेकर आने-जाने वालों को देखते हुए पुकारा करता था- 'मालिश, भाईजान मालिश, साहब मालिश'. उसकी संदूकची में कई तरह के इत्र, तेल और कपास वगैरह था. फूलों वाली एक सफेद शर्ट पहने एजाज़ के बाल तेल चुपड़े हुए थे, लोहे का एक छल्ला उसके अंगूठे में था और एजाज़ मालिश के लिए ग्राहक खोज रहा था, तभी एक ग्राहक मिला.

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उस ज़माने में अगर एजाज़ कभी 20 रुपये की कमाई कर लेता था तो उसे लगता था कि यह पूरा हफ्ता बहुत अच्छा गुज़रा. सफेद शर्ट पहने, ग्रे बालों वाले करीब 40—45 बरस के दिख रहे उस ग्राहक ने एजाज़ से पूछा- 'कितने पैसे लेगा?' एजाज़ ने कहा- 'अरे साहब, आराम से बड़ी क्या चीज़ है? जो जी में आए दे देना.' ग्राहक ने कहा- 'मुझे लकवा हुआ था इसलिए पीठ और पैरों की हड्डियों में दर्द रहता है, तुझे ठीक से मालिश करना आती है ना?' एजाज़ बोला- 'ख़ुदा माफ़ करे बड़ी बात करूं तो लेकिन साहब, इन मासूम हाथों में जादू है, हर दर्द का इलाज है.'

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मीनार ए पाकिस्तान, लाहौर


अब ग्राहक ने कुछ तिरछा मुस्कुराकर कहा- 'चल, 50 रुपये दूंगा. ठीक है?' एजाज़ इतने पैसे सुनकर दो बल्ली उछल गया और इस मौके के लिए तो वह कुछ भी करता. 'अल्लाह आपको बरकत दे, हुज़ूर. आइए, तंबू में चलिए.' एजाज़ के यह कहने पर उस ग्राहक ने तंबू की जगह अपने घर चलकर एजाज़ से मालिश करने को कहा तो एजाज़ राज़ी हो गया. 'ओए रिज़्ज़ू, चल उठा संदूकची, साहब की कोठी पर चलेंगे.' अपने छोटे भाई को साथ लेकर एजाज़ उस ग्राहक के पीछे चल दिया.

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छोटी-छोटी गलियों से गुज़रते हुए थोड़ी देर में सब रावी किनारे बने एक मकान में पहुंचे जिसमें तीन छोटे छोटे कमरे थे. अंधेरा, सन्नाटा, अस्त-व्यस्त पड़ी चीज़ें इस घर की कुछ अजीब तस्वीरें ज़हन में बनाती थीं. ग्राहक ने मालिश की तैयारी करने की हिदायत एजाज़ को दी और रियाज़ से जाने के लिए कहा. एजाज़ ने भी रियाज़ को जाने के लिए कह दिया और थोड़ी देर बाद खुद लौटने की बात कही. रियाज़ चला गया.

शाम ढल गई, रात हो गई लेकिन एजाज़ नहीं लौटा. कुछ फिक्र करने के बाद रियाज़ ने उस रात अकेले खाना खाया और अपने तंबू में सो गया. सुबह उठा तो रियाज़ ने आसपास देखा कि एजाज़ अब तक नहीं लौटा. रियाज़ सुबह उसी मकान पर गया जहां पिछली शाम एजाज़ को वह ग्राहक ले गया था. उस ग्राहक से रियाज़ ने कहा, 'साहब, भाईजान कल शाम आए थे मालिश करने, अब तक लौटे नहीं! कहां हैं?' उस ग्राहक ने कहा, 'लौटा नहीं तो कहां गया? यहां से तो थोड़ी देर में मालिश के बाद चला गया था. जाकर ढूंढ़ किसी दोस्त वोस्त के साथ कहीं मस्ता रहा होगा.'

रियाज़ चला अया और एजाज़ को ढूंढ़ता रहा, लेकिन उसे उस वक्त यह खबर ही नहीं थी कि अब एजाज़ उसे कभी नहीं मिलने वाला. तो एजाज़ के साथ हुआ क्या? क्या वह किसी हादसे का शिकार हुआ या उसके गायब होने के पीछे वही ग्राहक था जो उसे घर ले गया था?


पिछली शाम मालिश के बाद एजाज़ को उस ग्राहक ने नीले रंग की एक नयी शर्ट दी और उसे पहनने को कहा. एजाज़ को लगने लगा था कि वह किसी फरिश्ते के साथ वक्त बिता रहा है. एजाज़ ने शर्ट पहनी तो उसने एजाज़ का एक फोटो कैमरे से खींचा. एजाज़ ने फोटो के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह उसे कहानी बना देगा. पहले भी उसने कई बच्चों को किस्सा बना दिया है और एजाज़ का नंबर है 57. कुछ समझा, कुछ नहीं लेकिन एजाज़ उसकी बातों में रम सा चुका था.

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फिर उस आदमी ने एक डायरी उठाई और एजाज़ से उसकी पिछली ज़िंदगी के बारे में सवाल करता रहा और एजाज़ के जवाबों को अपनी डायरी में दर्ज करता रहा. एजाज़ को लग रहा था कि यह आदमी कोई किताब लिखेगा. फिर उस आदमी ने एजाज़ से पूछा, 'मटन खाएगा?' और पूछते ही उसे मटन खाने को दिया. रात हो चुकी थी और एजाज़ ने मटन खाने के बाद कहा कि उसका छोटा भाई इंतज़ार कर रहा होगा, अब वह जाना चाहता था.

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'अब इतनी रात कहां जाएगा? यहीं सो जा, सुबह चले जाना. सुबह सिवइयां लाएगा मेरा खादिम, अपने छोटे भाई के लिए लेकर जाना.' उस आदमी ने एजाज़ से इस तरह की ज़िद की तो एजाज़ को मानना ही पड़ा और वह कमरे के एक कोने में एक छोटे से पलंग पर सो गया. देर रात एजाज़ को नींद में अपने बदन पर छुअन सी महसूस हुई. एजाज़ की नींद उचटी तो उसने देखा कि उसकी शर्ट खुली हुई थी और वह आदमी पलंग पर पास बैठकर उसके शरीर पर हाथ फेर रहा था.

एजाज़ को थोड़ी हैरानी हुई तो उसने सवाल किए और वह आदमी उठकर अपनी अलमारी के पास गया. फिर एजाज़ के पास लौटा और उसने एक रस्सी से एजाज़ को पलंग पर पेट के बल लिटाकर सिरहाने से एजाज़ के हाथ बांध दिए. इसके बाद उस आदमी ने एजाज़ की पतलून उतारी और उसके साथ अप्राकृतिक यौन क्रियाएं कीं. एजाज़ सिसकता रहा. एकाध बार एजाज़ ने चिल्लाने की कोशिश की तो उस आदमी ने उसे ज़ोर से मारा और धमकाकर चुप करवा दिया.

थोड़ी देर बाद उस आदमी ने तड़पते हुए एजाज़ के हाथ खोल दिए और उसके पास ही पलंग पर बैठा उसे घूरता रहा. एजाज़ रोते हुए अपने कपड़े पहन रहा था और कह रहा था कि अब वह यहां एक पल भी नहीं रुकेगा. जैसे ही एजाज़ कपड़े पहनकर पलंग से उठा और दरवाज़े की तरफ बढ़ा, उस आदमी ने पीछे से एक चेन उसके गले में डाल दी और धीरे—धीरे उसका गला घोंट दिया. अब एजाज़ की लाश उस कमरे में पड़ी थी.

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देर रात के वक्त 17 साल का साजिद और 15 साल का नदीम इस मकान में दाखिल हुए. साजिद और नदीम की मदद से उस आदमी ने इस लाश को काट पीट कर ठिकाने लगाने का काम किया. इस मकान के एक हिस्से में एसिड का एक बैरल रखा था और एजाज़ की लाश को उस बैरल में डाल दिया गया ताकि वह लाश कंकाल बन जाए. लाश को ठिकाने लगाने के बाद साजिद और नदीम ने उस आदमी को देखा और कहा — 'अब कितने हो गए भाईजान?' उसने कहा — 'बस, सेंचुरी में तीन और बाकी हैं.' और तीनों के चेहरे पर एक खौफनाक हंसी थी.

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ये था पाकिस्तान के इतिहास का सबसे खतरनाक सीरियल किलर
एजाज़ का यह कातिल था जावेद इकबाल जिसे पाकिस्तान के इतिहास में सबसे खतरनाक सीरियल किलर माना जाता है. जावेद ने 6 से 16 साल के 100 बच्चों को मौत के घाट उतारा था. 1998 और 99 में सौ कत्लों को लाहौर में अंजाम देने के बाद जावेद ने 1999 में ही पुलिस और एक अखबार को एक चिट्ठी लिखकर अपना गुनाह कबूला था जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया. पुलिस के सामने इकबालिया बयान देने के बाद हालांकि कोर्ट में जावेद इन कत्लों से मुकर गया था लेकिन उसके खिलाफ कई सबूत और गवाह थे.

— जावेद के घर से मिली डायरी में जावेद ने हत्याओं और मक्तूल बच्चों के बारे में बहुत कुछ विस्तार से दर्ज किया था कि कैसे उसने कत्ल किए और उन बच्चों का परिचय वगैरह. उसकी डायरी में इस तरह की बातें लिखी थीं —

मैंने सौ बच्चों के साथ यौन शोषण करने के बाद उनका कत्ल किया और उनकी लाशों को एसिड से ठिकाने लगा दिया. अपने घर पर कुछ बच्चों की लाशें या लाशों के टुकड़े मैंने जान बूझकर छोड़ दिए हैं ताकि पुलिस या अफसरान वहां से इन्हें बरामद कर लें. हर बच्चे की लाश को ठिकाने लगाने के लिए मुझे करीब 120 रुपये खर्च करना पड़े. मेरी डायरी और नोटबुक सारे कत्लों का हिसाब है जो मेरा कबूलिया बयान समझा जाए.


— जावेद के घर से उसके शिकार हुए कई बच्चों के फोटो मिले जिन पर बाकायदा कोई नंबर लिखा हुआ था.
— उसके घर में खतरनाक एसिड का एक बैरल और कई बोतलें मिलीं जिनके ज़रिये उसने कई लाशों को ठिकाने लगा दिया था.
— एक चेन, कुछ कपड़े और कई बच्चों का खून उसके घर के फर्श और दीवारों पर पाया गया.

जावेद के कत्लों की फैक्ट फाइल
जावेद को जब पहली बार अदालत ने सज़ा सुनाई तो उसमें कहा गया था कि जावेद की क्रूरता को मद्देनज़र रखते हुए उसे मौत दी जाए. सरेआम चौराहे पर उसका गला घोंटकर उसे मार डाला जाए और उसकी लाश के सौ टुकड़े कर एसिड में गला दिया जाए. हालांकि इस सज़ा का काफी विरोध हुआ था. बाद में, जावेद और उसके एक साथी ने जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी.

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सीरियल किलर जावेद.


कहा जाता है कि जावेद के साथ बचपन में यौन शोषण किया गया था और इसी के चलते वह गलत यौन आदतों का शिकार हो चुका था. इसी के चलते वह बच्चों के साथ इस क्रूर अपराध को अंजाम दिया करता था. उसके शिकार गरीब, बेसहारा और यतीम बच्चे बने. उसने कई तरह के काम और धंधे किए थे लेकिन कहीं भी ज़्यादा देर नहीं टिका था.

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उसने 100 बच्चों को मार डालने का इरादा कर रखा था और इस आंकड़े के बाद उसने पुलिस और अखबार को अपने कनफेशन की चिट्ठी लिखकर नदी में कूदकर खुदकुशी की कोशिश की थी लेकिन वह मरा नहीं और पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

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