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#SerialKillers: उसके हथियार थे 'मीठे' और निशाने थे नन्हे बच्चे

सांकेतिक चित्र

सांकेतिक चित्र

पंजाब के इस सीरियल किलर को बेबी किलर कहा गया क्योंकि एक खास समुदाय के खिलाफ बदले की भावना के चलते इसने 17 बच्चों को यौन शोषण के बाद बेरहमी से कत्ल किया था. इस सीरियल किलर को सिर्फ एक कत्ल के लिए पछतावा रहा, बाकी के लिए नहीं.

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देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले 5 सप्ताह में कई सनसनीखेज़ कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए पंजाब के उस सीरियल किलर की कहानी, जिसने एक खास समुदाय से बदला लेने के लिए एक के बाद एक 17 बच्चों का कत्ल किया.

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तज़्बीन की मां उससे कहकर गई थी कि वह छोटे भाई का खयाल रखे, अपनी पढ़ाई कर ले और जब नल में पानी आ जाए तो घर में पीने का पानी भरकर रख ले. रोज़ की तरह 10 साल की तज़्बीन इसी तरह अपने सारे काम करते हुए बीच में वक्त मिलता तो खेलने लगती. कभी अपने भाई के साथ तो कभी घर के बाहर गली में आसपास के बच्चों के साथ. 22 अगस्त को तज़्बीन ने जब देखा कि खाने के बाद उसका छोटा भाई सो गया है तो वह खेलने के लिए बाहर चली गई.

उस दिन वहां उसे कोई साथी नहीं मिला खेलने के लिए. तज़्बीन ने एक घर में जाकर अपनी सहेली अफिया से खेलने के बारे में पूछा तो तबीयत ठीक न होने की वजह से उसने उस वक्त खेलने से मना कर दिया. तज़्बीन घर की तरफ लौटी और अकेले ही कुछ खेलने लगी. छोटी सी गली में बैठी कभी कुछ पत्थरों से तो कभी एक गेंद से कुछ खेलती रही. यह छोटी सी गली जालंधर शहर की एक बस्ती की थी जहां ज़्यादातर उन परिवारों के छोटे छोटे घर थे जो बाहर से आकर यहां रहते थे और दिन भर मज़दूरी किया करते थे.

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तज़्बीन के माता पिता मज़दूरी के लिए गए हुए थे और वह अकेली गली में बैठी थी. कुछ ही देर में उसने ज़मीन पर कुछ लकीरें खींची और अकेले ही लंगड़ी खेलते हुए उन लकीरों से बने खानों में एक पैर पर कूदने लगी. एक पत्थर उछालती और फिर उन खानों में कूदती. एक खाने में जब उसने पत्थर फेंका तभी उस पत्थर के साथ उस खाने में एक टॉफी भी गिरी. उसने एक सेकंड टॉफी को देखने के बाद अपने पीछे देखा तो एक बूढ़ा आदमी खड़ा मुस्कुरा रहा था.

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तज़्बीन उस 50—52 साल के आदमी को देखकर मुस्कुराई और उसके इशारे के बाद तज़्बीन ने वह टॉफी उठा ली. रैपर खोला और टॉफी खा ली. उस आदमी ने अपने बैग से एक और टॉफी निकालकर तज़्बीन को दी. तज़्बीन ने जैसे ही वह टॉफी ली तो उस आदमी ने कहा कि 'तुम्हें समोसे अच्छे लगते हैं? और मिठाई?'. यह कहकर उसने एक मिठाई भी तज़्बीन को दी. तज़्बीन को कुछ समझ तो नहीं आ रहा था कि यह आदमी कौन है, लेकिन वह खुश बहुत थी.

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फिर उस आदमी ने और दो चार बातें करते हुए तज़्बीन से यह पता कर लिया कि उसके माता पिता इस वक्त मज़दूरी पर गए हैं और उसका छोटा भाई घर में सो रहा है. अब उसने तज़्बीन से अपने साथ चलने को कहा और लालच दिया कि उसके पास कई तरह के खिलौने हैं और बहुत सारी खाने पीने की चीज़ें भी. उसने तज़्बीन को भरोसा दिलाया कि पास ही उसकी दुकान है और वह अपनी साइकिल से उसे वापस छोड़ देगा. थोड़ी ही देर की बात थी इसलिए लालच में आकर तज़्बीन उसके साथ चलने को राज़ी हो गई.

यह आदमी तज़्बीन को अपनी साइकिल पर बिठाकर उस बस्ती से थोड़ी दूर ले गया. एक पुल के पास एक अलग—थलग सा घर था. उसने तज़्बीन को घर के अंदर ले जाकर जैसे ही दरवाज़ा बंद किया तो तज़्बीन को कुछ डर सा लगा और उसने कहा कि उसे घर जाना है. इस आदमी ने तज़्बीन को कुछ देर चुपचाप आराम से बैठने को कहा और शराब पीने लगा. तज़्बीन ने घर जाने की ज़िद करना शुरू कर दिया. चार—छह बार समझाने पर भी तज़्बीन चुप नहीं हुई तब इस आदमी को गुस्सा आया.

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उसने अपने बैग से एक चाकू निकाला और तज़्बीन को डरा धमकाकर चुप रहने को कहा. तज़्बीन कुछ लमहों के लिए तो बेहद घबरा गई लेकिन फिर उसने कहा कि अगर उसे जाने नहीं दिया गया तो वह शोर मचाएगी. उस आदमी ने तज़्बीन को जैसे ही गलत ढंग से छूना शुरू किया, वैसे ही तज़्बीन चीखने लगी. पहले उसने तज़्बीन का मुंह ज़ोर से बंद किया लेकिन तज़्बीन ने छटपटाते हुए विरोध करना जारी रखा. अब तैश में आ चुके इस आदमी ने एक हाथ से तज़्बीन का मुंह दबाकर रखा और दूसरे हाथ से चाकू उसके गले पर मार दिया.

गले से खून निकला और कुछ ही सेकंड्स में तज़्बीन खामोश हो गई. इस आदमी ने तज़्बीन को हिलाया डुलाया लेकिन उसकी खामोशी उसकी मौत की वजह से ही थी. कत्ल के बाद यह आदमी फिर टेबल की तरफ मुड़ा और बची हुई शराब पीने लगा. शराब पीते हुए उसने तज़्बीन की तरफ देखा और फिर तज़्बीन की तरफ आया. लाश बन चुकी तज़्बीन के साथ इस आदमी ने बलात्कार किया. फिर शराब पी और खाना खाया. अब उसने लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा.

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रात हो जाने के बाद वह इस लाश को एक चादर में लपेटकर गोदी में लिये पुल के नीचे एक वीरान हिस्से की तरफ गया. वहां आसपास देखकर उसने तज़्बीन की लाश को फेंक दिया और उस चादर पर कुछ और कबाड़ व कचरा डाल दिया. 22 अगस्त 2004 को इस कत्ल को अंजाम देने के दो दिन बाद फिर यह कातिल मज़दूरों की बस्ती में बच्चों को देख रहा था और अपना अगला शिकार तलाश रहा था. 5 साल का संजू इस कातिल का अगला शिकार था.

इस कातिल को नाम मिला 'बेबी किलर'
यह कातिल था दरबारा सिंह जिसे बाद में बेबी किलर का नाम दिया गया जिसने 17 बच्चों को मौत के घाट उतारा. दरबारा सिंह को अक्टूबर 2004 में पकड़ा गया था और उसके बाद उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा था -

मैं बाहर से आए मज़दूरों के बच्चों को बहला फुसलाकर अगवा कर लेता था और उनका गला काटकर उन्हें मार डालता था. ये बच्चे लड़कियां हों या लड़के, अगर मेरी हरकतों का विरोध करते थे तो मारे जाते थे और इनकी लाशों को मैं कहीं फेंक देता था, कभी किसी तालाब या नदी में भी. मैं इन्हें इसलिए मारता था ताकि मेरे खिलाफ कोई सबूत बाकी न रह जाए.


अस्ल में, पहले सेना में रहे दरबारा सिंह ने एक बाहरी मज़दूर की बच्ची के साथ बलात्कार की कोशिश करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी. इस इल्ज़ाम में उस बच्ची के परिवार ने दरबारा सिंह के खिलाफ केस लड़ा और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. 10 साल बाद लुधियाना जेल से जब वह छोड़ा गया तो उसने सभी बाहरी मज़दूरों को अपना दुश्मन मान लिया और उनके बच्चों को सज़ा देने का फैसला कर लिया. 2003 से 2004 के दरमियान उसने 17 ऐसे बच्चों को अपने बदले की भावना का शिकार बनाया.

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एक बार भूल से दरबारा एक पंजाबी लड़की को अपना शिकार बना बैठा था लेकिन उसे जब तक पता चला कि यह मज़दूरों की नहीं बल्कि पंजाबी लड़की है तब तक वह उसके साथ क्रूरता कर चुका था और उसने कोई गवाह या सबूत न छोड़ने के मकसद से उसका भी कत्ल कर दिया था. दरबारा का कहना था कि इस एक कत्ल के लिए उसको पछतावा रहा. बाकी जिन बच्चों को उसने मारा, उसके लिए कोई पछतावा नहीं था.

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सीरियल किलर दरबारा सिंह.


दरबारा को उसकी पत्नी ने घर से निकाल दिया था. उसकी पत्नी का इल्ज़ाम था कि वह अपने बच्चों केे साथ भी गंदी और अश्लील हरकतें करता था. दरबारा ने अमृतसर और जालंधर के आसपास कत्लों को अंजाम दिया और वह बहुत देर तक एक ठिकाने पर नहीं रहता था. उसे 2008 में सज़ा ए मौत सुनाई गई थी लेकिन बाद में इसे उम्र कैद में तब्दील कर दिया गया था. सज़ा काट रहा दरबारा सिंह इसी साल जब बीमार हुआ तो उसे जेल से अस्पताल ले जाया गया था और 6 जून 2018 को उसकी मौत हो गई.

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