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कत्ल करने के लिए कलेजा चाहिए होता है, वही ऐन वक्त पर ठंडा पड़ गया!

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 6, 2018, 7:58 PM IST
कत्ल करने के लिए कलेजा चाहिए होता है, वही ऐन वक्त पर ठंडा पड़ गया!
शराब के नशे में धुत पड़े एक अधेड़ को कटार से मारने की साज़िश तैयार थी लेकिन कातिल की हिम्मत ऐन लमहे पर जवाब दे गई. इसके बावजूद लुधियाना में कत्ल तो हुआ और आरोपियों के इकबालिया बयान के बाद भी सवाल का जवाब पहेली है कि कातिल कौन था?

शराब के नशे में धुत पड़े एक अधेड़ को कटार से मारने की साज़िश तैयार थी लेकिन कातिल की हिम्मत ऐन लमहे पर जवाब दे गई. इसके बावजूद लुधियाना में कत्ल तो हुआ और आरोपियों के इकबालिया बयान के बाद भी सवाल का जवाब पहेली है कि कातिल कौन था?

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  • Last Updated: August 6, 2018, 7:58 PM IST
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कत्ल हुआ कुलदीप का लेकिन असली कातिल कौन था? क्या न्यूटन, जिसने कटार से कुलदीप की छाती चीर दी या तेजपाल, जिसने हमला करने के लिए इस आदमी को हायर किया? गुत्थी सिर्फ इतनी ही नहीं है. क्या कुलदीप की बीवी गीता कातिल थी, जिसने कुलदीप का कत्ल करवाने की साज़िश रची या फिर कुलदीप की बेटी सुदीक्षा, जो तेजपाल से प्यार करने के कारण आए-दिन कुलदीप से मार खाती थी और जिसने कत्ल को छुपाने के लिए गीता का भरपूर साथ दिया?

एक लमहे की होती है किसी की जान जाने की वारदात लेकिन बहुत लंबी होती है कत्ल की कहानी. लुधियाना ज़िले के कुलदीप के कत्ल की कहानी की शुरुआत होती है तीन साल पहले जब उसकी बेटी सुदीक्षा को अपनी कॉलोनी के ही एक लड़के तेजपाल से मुहब्बत हो गई. 16-17 साल की थी सुदीक्षा जब वह करीब 18-19 साल के तेजपाल के साथ प्यार कर बैठी. प्यार ज़माने से छुपता नहीं है और इस उम्र का प्यार तो और जल्द सुर्खियों में आ जाता है तो कुलदीप को पता चलना ही था.

बड़ा हंगामा हुआ जब कुलदीप को पता चला कि सुदीक्षा एक लड़के के साथ पींगें लड़ा रही है. उसने घर पहुंचकर सीधे सुदीक्षा के मुंह पर एक तमाचा रसीद किया और बेतरह फटकार लगाते हुए उसे खबरदार किया कि अब वह उस लड़के के साथ दिखी तो अच्छा नहीं होगा. सुदीक्षा डर गई थी और बिलखने लगी थी. उस दिन अगर उसकी मां बीच में न आई होती तो शायद कहानी कोई और मोड़ ले सकती थी. बाप से पिट चुकी सुदीक्षा को सहारा देने आई उसकी मां गीता.

मां की भरपूर ममता जागती रही और सुदीक्षा को गीता से पूरा सपोर्ट मिलने लगा. सुदीक्षा चोरी छुपे तेजपाल से मिलती जुलती और इस बात को राज़ रखने में गीता पूरा साथ देती. कुलदीप को कभी कुछ पता चलता और वह सुदीक्षा को पीटने लगता तो गीता बीच-बचाव करती और अपनी बेटी को बचा लेती. इधर, कुलदीप शराब पीकर कुछ देर में अपने गुस्से को भूल जाता और उधर, सुदीक्षा इस मारपीट के दर्द को अपनी यादों का हिस्सा बना लेती.

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तेजपाल : क्या बात है? इतनी उदास क्यों हो?
सुदीक्षा : मेरे ज़ख्म दिखाई नहीं देते क्या?तेजपाल : कल रात फिर पीटा पापा ने?
सुदीक्षा : हां और इस बार तो ये धमकी भी दी है कि अब तुमसे मिलना नहीं छोड़ा तो तुम भी नहीं बचोगे.
तेजपाल : अच्छा! वो तो तुम्हारे पापा हैं इसलिए...
सुदीक्षा : अच्छा, नहीं तो क्या कर लेते तुम?
तेजपाल : कर तो बहुत कुछ सकता हूं लेकिन...
सुदीक्षा : हां मुझे पता है क्या कर सकते हो. बातों के शेर हो बस. तुम्हारे चक्कर में रोज़ मार खाती हूं मैं और तीन सालों में तुमसे इसका एक सॉल्यूशन नहीं निकला.
तेजपाल : मैं तो कितनी बार कह चुका हूं कि चलो भाग चलते हैं लेकिन तुम्हीं...
सुदीक्षा : भागने से क्या होगा तेज? ये कोई सॉल्यूशन है? कहां जाएंगे भागकर, क्या करेंगे, कहां रहेंगे, कैसे जिएंगे? पापा को इसी लिए तो मंज़ूर नहीं है तुमसे रिश्ता क्योंकि तुम कुछ करते नहीं हो और उनकी नज़र में बस आवारा हो. तुम क्या करोगे पता नहीं और मेरा क्या होगा? रोज़ ऐसे ही मार खाती रहूंगी और तुम देखते रहना बस.

इस बातचीत के बाद सुदीक्षा घर लौट आई और अपने कमरे में जाकर अकेली बैठी कुछ सोचने लगी. तीन साल हो चुके थे तेजपाल के साथ प्रेम संबंध हुए और सुदीक्षा को कोई भविष्य नज़र नहीं आ रहा था. एक कॉलेज में प्रोफेसर गीता जब घर लौटी तो उसने सुदीक्षा को उदास देखकर कहा कि वह घबराए नहीं. वक्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा.

रोज़मर्रा के इसी तनाव के बीच एक रात जब कुलदीप शराब पीकर घर आया तो सुदीक्षा ने दरवाज़ा खोला. कुलदीप को किसी तरह कमरे तक सहारा देकर सुदीक्षा ले गई. इस दौरान कुलदीप के हाथ सुदीक्षा के शरीर पर गलत ढंग से पड़े. सुदीक्षा को शक हुआ या उसे कुछ और सूझा, यह तो सुदीक्षा ही जानती है लेकिन उसने अगले दिन गीता से कहा कि उसके पापा यानी कुलदीप ने नशे में कल रात उसके साथ गलत हरकत की.

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यह सुनकर गीता आगबबूला हो गई. गीता को कुलदीप का नशा करना पसंद नहीं था और सालों से इस बात को लेकर दोनों के बीच तनाव रहता था. फिर सुदीक्षा के साथ रोज़ाना कुलदीप मारपीट करता था इसलिए भी गीता उससे नाराज़ रहा करती थी. पिछले कुछ समय से कुलदीप के लिए उसकी पत्नी और बेटी के मन में कोई हमदर्दी और इज़्ज़त नहीं रह गई थी. कुलदीप इन बातों से बेखबर था और उधर, गीता ने सुदीक्षा से कहा कि वह तेजपाल से मिलना चाहती है.

गीता पहले भी तेजपाल से मिल चुकी थी और उसे अपनी बेटी की पसंद पर कोई ऐतराज़ नहीं था लेकिन इस बार मिलने का मकसद कुछ और था. कुलदीप घर पर नहीं था तब तेजपाल मुलाकात के लिए गीता के घर आया. गीता ने उससे साफ बातचीत करते हुए कहा कि अब कुलदीप को रास्ते से हटाना ज़रूरी है और इसके लिए तेजपाल को ही पहल करना होगी. गीता का कहना था कि वह औरत है इसलिए वह खुद यह कर नहीं सकती. एक तरह से गीता ने शर्त रख दी कि अगर वह सुदीक्षा को चाहता है तो तेजपाल का कत्ल करना होगा.


तेजपाल ने कुछ देर सोचा तो उसे सुदीक्षा के दिए हुए वो ताने भी याद आए कि वह निकम्मा है, कुछ कर नहीं सकता. उसे कुछ ही लमहों में सुदीक्षा के सारे ज़ख्म, दर्द और तकलीफें भी याद आईं जो उसने तेजपाल के लिए सहीं. बातों बातों में गीता ने तेजपाल को मर्दानगी का वास्ता भी दिया था इसलिए इन तमाम वजहों से तेजपाल ने कुलदीप को कत्ल करने के लिए हामी भर दी.

कत्ल का पहला प्लॉट
तारीख तय की गई 18 जून 2018. गीता, सुदीक्षा और तेजपाल लगातार फोन पर संपर्क में बने हुए थे. प्लैन बहुत आसान था कि कुलदीप शराब के नशे में घर में सो रहा होगा. तब देर रात तेजपाल को आना है और कुलदीप को मारकर चुपचाप चले जाना है. प्लैन ठीक चल रहा था कुलदीप नशे की हालत में घर आ चुका था और बिस्तर पर सो चुका था. तेजपाल को फोन कर दिया गया था. तेजपाल एक कटार लेकर घर में दाखिल हुआ. उसे खयाल ही नहीं रहा कि कत्ल करने के लिए कटार नहीं कलेजा चाहिए होता है. किसी शायर ने खूब कहा है -

कत्ल करना मुझे आसान समझने वाले
हाथ हो जाएंगे पत्थर के अमल होने तक.

गीता और सुदीक्षा भीतर अपने कमरे में थीं. तेजपाल के हाथ में कटार थी और उसके सामने बिस्तर पर कुलदीप सोया हुआ था. पसीने-पसीने हो चुका तेजपाल एक कदम कुलदीप की तरफ बढ़ा तभी कुलदीप ने करवट बदली. तेजपाल लड़खड़ा सा गया और दो कदम पीछे हटा तो उसका पैर टेबल से टकरा गया. हल्की सी आहट हुई लेकिन कुलदीप की नींद नहीं टूटी. अब तेजपाल ने चारों तरफ देखकर फिर कुलदीप को देखा. तेजपाल के हाथ कांप रहे थे. उसने दोनों हाथों से कटार थामी और कुलदीप की छाती पर वार करने के लिए दोनों हाथ उठाए ही थे कि कुलदीप फिर नींद में कुछ हिला.

तेजपाल फिर रुक गया और उसने देखा कि उसके पैर कांप रहे हैं और हाथ जैसे जम गए हैं. तेजपाल ने पास रखा पानी पिया और कटार वापस शर्ट के अंदर छुपाकर वहां से चला गया. अगले दिन सुदीक्षा उससे मिलने आई तो वह तेजपाल से खासी नाराज़ थी.

सुदीक्षा : बड़े हीरो बनते थे, क्या हुआ? मैं तो कहती ही थी कि तुम बस बातों के शेर हो.
तेजपाल : यार, वो मेरे सामने थे, मैं मार सकता था लेकिन पता नहीं क्यों हिम्मत ही नहीं हुई.
सुदीक्षा : हिम्मत ही नहीं हुई... लेकिन अब क्या होगा? मां ने साफ कह दिया है कि जब तक यह काम नहीं होगा, हम एक दूसरे के नहीं हो पाएंगे.
तेजपाल : तुम फिक्र न करो, मैं कुछ इंतज़ाम करता हूं.

कत्ल का फाइनल प्लॉट
तेजपाल ने फिर एक चक्कर चलाया और उसने गीता के साथ बातचीत की. कुछ ही दिनों में एक डील फिक्स हुई और गीता ने करीब ढाई लाख रुपये में एक नामी गुंडे न्यूटन को इस काम के लिए सुपारी दी. तेजपाल के ज़रिये न्यूटन को कत्ल की सुपारी देने के बाद प्लैन बन गया और जुलाई के तीसरे हफ्ते में एक रात न्यूटन लगातार गीता के साथ फोन पर बात करने के बाद घर पहुंचा. सोए हुए कुलदीप की छाती में कटार भोंककर न्यूटन वहां से फरार हो गया.

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न्यूटन के वहां से जाते ही सुदीक्षा और गीता ने कुलदीप की छाती से बह रहे खून को एक तौलिये से रोकने की कोशिश की लेकिन कुछ ही देर में वह तौलिया भी खून से भीग गया. इस बीच गीता ने कहा कि इसकी ज़रूरत नहीं है. इधर, गीता ने पुलिस को फोन किया और उधर, सुदीक्षा ने अपना मोबाइल फोन, वह तौलिया और खून के दाग लग चुकी अपनी चुन्नी को छत पर एक कोने में पड़े कबाड़ के ढेर में छुपा दिया. पुलिस के आने से पहले गीता ने घर के सामान को बिखेर दिया.

पुलिस के आते ही गीता और सुदीक्षा ने रोना धोना शुरू करते हुए कहानी यह सुनाई कि कुछ लुटेरे आए थे. घर से रुपये, कुछ ज़ेवर वगैरह लूटकर ले गए और कुलदीप को मार डाला. लेकिन पुलिस के कई सवालों के ठीक जवाब गीता और सुदीक्षा दे नहीं पा रहे थे. सवाल जैसे घर में लुटेरे दाखिल कैसे हुए? केवल कुलदीप को ही क्यों मारा गया? बहुत रात नहीं थी और बस्ती में किसी ने इस पूरी घटना का शोर क्यों नहीं सुना?

कुल मिलाकर पुलिस को इस बनावटी कहानी में कई शक नज़र आ रहे थे और जब गीता व सुदीक्षा के मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच की गई तो बहुत हद तक सच की भनक लग गई और फिर सख्त पूछताछ के बाद गीता व सुदीक्षा ने इकबालिया बयान दे ही दिया.

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First published: August 6, 2018, 7:58 PM IST
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