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Tihar Jail की कॉल से खुला ज्‍वैलर्स से रंगदारी वूसली का ये पूरा मामला, तीन अपराधी दबोचे

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी की टीम ने तीन अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ज्‍वैलर्स से रंगदारी के मामले को सुलझा ल‍िया है.

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी की टीम ने तीन अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ज्‍वैलर्स से रंगदारी के मामले को सुलझा ल‍िया है.

Delhi Crime News: साउथ ईस्‍ट जिले के थाना न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी की टीम ने तीन अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ज्‍वैलर्स से रंगदारी के मामले को सुलझा ल‍िया है. गिरफ्तारी के साथ ही रंगदारी के लिए इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं. तीन मामलों को सुलझाने का दावा भी क‍िया गया है. रंगदारी वसूली का पूरा मामला त‍िहाड़ जेल नंबर-4 से जुड़ा हुआ न‍िकला.

  • News18Hindi
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    नई द‍िल्‍ली. द‍िल्‍ली पुलिस (Delhi Police) के साउथ ईस्‍ट जिले के थाना न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी (New Friends Colony) की टीम ने तीन अपराधियों अनवर @ ओमेश, अंकित @ गोलू और आसिम की गिरफ्तारी के साथ ज्‍वैलर्स से रंगदारी के मामले को सुलझा ल‍िया है. इनकी गिरफ्तारी के साथ ही रंगदारी के लिए इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं. इसके अलावा तीन मामलों को सुलझाने का दावा भी क‍िया गया है. रंगदारी वसूली का पूरा मामला त‍िहाड़ जेल नंबर-4 से जुड़ा हुआ न‍िकला.

    साउथ ईस्‍ट ज‍िला पु‍ल‍िस उपायुक्‍त आर पी मीणा ने बताया क‍ि 13 स‍ितंबर को, रविंदर वर्मा ने अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए थाना न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी का दौरा किया. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वह न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में रवि ज्वैलर्स के नाम से एक आभूषण की दुकान के मालिक हैं. 11 स‍ितंबर को उनके पास 901924xxxx नंबर से रंगदारी की कॉल आई जिसमें फोन करने वाले ने 4 लाख रुपये की मांग की और धमकी दी कि अगर चौबीस घंटे में पैसा नहीं दिया गया तो वे उसे मार देंगे. शिकायतकर्ता ने उक्त नंबर को ब्लॉक कर दिया. उसके बाद फोन करने वाला जान से मारने की धमकी के मैसेज भेजता रहता है. इस पर थाना न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में प्राथमिकी संख्या 304/2021 धारा 387 आईपीसी दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू कर दी गई.

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    ज्‍वैलर्स ने 2015 में भी फ‍िरौती की कॉल पर दे द‍िए थे 4 लाख रुपए
    डीसीपी आर पी मीणा के मुताबि‍क अपराध की गंभीरता को भांपते हुए एसआई विष्णु दत्त, सिपाही राम किशन, सिपाही जॉनी, और सिपाही मुकेश सहित इंस्पेक्टर सुमन कुमार/ एसएचओ के नेतृत्व में अवनीश कुमार एसीपी/एनएफसी के देख रेख में दोषियों को पकड़ने के लिए गठन किया गया था.

    टीम ने शिकायतकर्ता की दुकान का दौरा किया जहां उसने खुलासा किया कि 2015 में फिरौती की कॉल के जवाब में, उसने अज्ञात आरोपियों को 4 लाख रुपये दिए थे क्योंकि वह डर गया था और उसने पुलिस को भी इसकी सूचना नहीं दी थी. दोबारा 2015 में बंदूक की नोंक पर उससे लूटपाट की और आरोपी ने जबरन उससे 50,000/- नकद रुपये ले लिए.

    फिरौती की कॉल और मैसेजों की जांच पड़ताल में ऐसे लगा सुराग
    टीम ने फिरौती की कॉलों के साथ-साथ उन मैसेजों की भी जांच पड़ताल की गई जिनमें जबरन वसूली करने वाले ने शिकायतकर्ता को धमकी दी थी. 11 और 13 सितंबर 2021 को एक मोबाइल नंबर 901924xxxx से फिरौती की कॉल की गई थी. उक्त मोबाइल नंबर गिरिजेश यादव निवासी बरवा खुर्द जिला-महाराज गंज, यूपी के नाम से पंजीकृत पाया गया था. कई छापेमारी करने के बाद, टीम ने ओखला फेज- III,दिल्ली से गिरिजेश यादव का पता लगाया, जहां वो मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड में बढ़ई के रूप में काम कर रहा था.

    अब 11 व 13 सितंबर को ज्‍वैलर्स को कॉल कर फ‍िर मांगी गई रंगदारी
    इसकी जांच पड़ताल करने पर पता चला क‍ि उसका मोबाइल फोन 17 जुलाई को चोरी हो गया था. कई सीडीआर की जांच पड़ताल करने पर पता चला क‍ि ग‍िरिजेश के चोरी हुए मोबाइल फोन का सिम 19 अगस्‍त को एक एलवाईएफ मोबाइल फोन में डाला गया था. लेकिन कोई कॉल नहीं की गई. उसके बाद 04 सितंबर को उक्त सिम को एक इनफोकस कंपनी के मोबाइल फोन में डाल दिया गया और 11 व 13 सितंबर 2021 को शिकायतकर्ता को रंगदारी की कॉल की गई.

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    टीम ने दोनों मोबाइलों की आईएमईआई को सर्विलांस पर लगा दिया. सीडीआर विश्लेषण में पाया गया कि उक्त मोबाइल फोन का उपयोग पहले एक मोबाइल नंबर 966795xxxx द्वारा 14 नवंबर, 2020 को केवल डेढ़ घंटे के लिए किया था. हालांकि उस वक्त कोई खास कॉल नहीं की गई थी. इसके माल‍िक का पता चला क‍ि उक्त मोबाइल नंबर रेशमा निवासी तिगरी, दिल्ली के नाम से पंजीकृत पाया गया. कनेक्टेड नंबरों का विश्लेषण करने के बाद, एक मोबाइल नंबर 88XXXX1969 जो रेशमा भाई फिरोज के पास पंजीकृत था. उसमें एक सुराग था कि एक लैंडलाइन नंबर यानी 112852xxxx से कई इनकमिंग कॉल प्राप्त हुए थे.

    त‍िहाड़ जेल नंबर-4 में बंद कैदी से जुड़ा म‍िला पूरा मामला
    डीसीपी मीणा ने बताया क‍ि जांच करने पर पता चला कि नंबर तिहाड़ जेल नंबर-4 का है. टीम ने रेशमा के परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और यह पता चला कि रेशमा का दूसरा भाई अफरोज @ चेधा पुत्र यासीन थाना मालवीय नगर के एक हत्या मामले की प्राथमिकी संख्या -187/2017 में पैरोल पर है. वह तिहाड़ जेल नंबर-4 में बंद था. लेकिन, ड‍िटेल में पूछताछ के बावजूद, परिवार के सभी सदस्य नवंबर 2020 में इस्तेमाल किए गए इनफोकस मोबाइल फोन के बारे में याद करने में असमर्थ थे.

    टीम ने आगे कई सीडीआर की जांच पड़ताल की है और पता लगा है क‍ि 03 नवंबर, 2020 को केवल एक मिनट के लिए रिलायंस एलवाईएफ मोबाइल फोन में एक सिम नंबर 93XXXX2011 डाला गया था. उसके बाद मार्च 2021 से उक्त मोबाइल नंबर भी बंद कर दिया गया था. उक्त मोबाइल नंबरों के सीडीआर प्राप्त करने के बाद यह पता चला कि तिहाड़ जेल नंबर-4 के एक ही लैंडलाइन नंबर से विभिन्न इनकमिंग कॉल उस नंबर पर प्राप्त हुईं थीं.

    डीसीपी के मुताब‍िक टेक्‍नीकल सर्व‍िलांस के आधार पर टीम एक व्यक्ति अनीश @ मिठू पुत्र गंगाराम निवासी राज नगर पार्ट-2, पालम कॉलोनी, दिल्ली तक पहुंची, जो एक दूसरे की हत्या के मामले में जुलाई, 2017 से तिहाड़ जेल नंबर-4 में बंद था. और वर्तमान में पैरोल पर था. पूछताछ करने पर, अनीश @ मिठू और अफरोज @ चेड्ढा से जवाबी पूछताछ की गई और उन्होंने एक-दूसरे की पहचान की. इसके अलावा, उन्होंने खुलासा किया कि उनके एक दोस्त अंकित निवासी इस्माइलपुर, फरीदाबाद ने उनसे उक्त इंफोकस मोबाइल फोन दिया था.

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    2015 में रंगदारी वसूलने और लूटपाट का आरोपी ने क‍िया खुलासा
    लगातार पूछताछ के बाद, आरोपी अनवर @ ओमेश और असीम ने खुलासा किया कि उन्हें अंकित @ गोलू से उक्त मोबाइल फोन लिया था. उन्होंने उक्त जबरन वसूली मामले में अपनी संलिप्तता का खुलासा किया. उन्होंने उक्त मोबाइल फोन और चोरी की सिम से फिरौती के साथ-साथ शिकायतकर्ता को मैसेज भी किए.

    उन्होंने आगे खुलासा किया कि उन्होंने 2015 में शिकायतकर्ता को लूट लिया था जब वह अपने गहने की दुकान से अपने घर लौट रहा था. उन्होंने दोबारा शिकायतकर्ता से 2015 में ही 4 लाख जबरन वसूली की. उन्होंने आगे खुलासा किया कि, उन्होंने 2016 में एनडीएमसी के एक कानून अधिकारी की हत्या कर दी थी और 2016 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. तब से, वे तिहाड़ जेल नंबर -4 में बंद थे. 22 जुलाई 2021 को उनके पैरोल के बाद, उन्होंने फिर से शिकायतकर्ता से जबरन वसूली की योजना बनाई क्योंकि उन्हें ड्रग्स की लत पूरा करने के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी.

    नशे की लत को पूरा करने के ल‍िए क‍िया यह सब कुछ
    लगातार पूछताछ के बाद आरोपी अंकित @ गोलू ने खुलासा किया कि उसके पास आजीविका कमाने के लिए कोई काम नहीं है. उसने उक्त मोबाइल फोन अनीश @ मिठू से लिया, जिनसे वह तिहाड़ जेल में मिला था जब उसे एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और तिहाड़ जेल नंबर 4 भेज दिया गया था. उसने उक्त मोबाइल फोन और सिम आरोपी अनवर को 2,500/- रुपये में बेच दिया. शराब की अपनी लत को पूरा करने के लिए रुपये की जरूरत है.

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