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100 Crore Vaccination: भारत में वैज्ञानिकों ने कैसे तय किया 100 करोड़ वैक्‍सीनेशन का सफर, बता रहे हैं डॉ. एन के अरोड़ा

100 Crore Vaccination: भारत में वैज्ञानिकों ने कैसे तय किया 100 करोड़ वैक्‍सीनेशन का सफर, बता रहे हैं डॉ. एन के अरोड़ा

100 crore covid vaccination in india: भारत में 100 करोड़ वैक्‍सीन लगाने का सफर तय करने के लिए देश के वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत की है.

100 crore covid vaccination in india: भारत में 100 करोड़ वैक्‍सीन लगाने का सफर तय करने के लिए देश के वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत की है.

।00 Crore Covid19 Vaccination in India: कोरोना के आने से लेकर इसकी वैक्‍सीन बनने और इसे लगाने को लेकर न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्‍व में एक कौतुहल और संशय की स्थिति बनी हुई थी लेकिन भारत ने न केवल वैक्‍सीनों का निर्माण किया बल्कि विदेशों को वैक्‍सीन देने के साथ ही देश में भी टीकाकरण में कीर्तिमान बना दिया.

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नई दिल्‍ली. भारत ने आज देश में कोरोना वैक्‍सीन की 100 करोड़ डोज (100 Crore Covid-19 Vaccination) लगाने का लक्ष्‍य पूरा कर लिया है. वैक्‍सीनेशन के इस शतक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी देश के स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों और लोगों को बधाई दी है. वहीं कोरोना के खिलाफ चल रही इस वैश्विक लड़ाई (Global Fight with Corona) में भारत ने सातवें हिस्‍से का योगदान दिया है. विश्‍व में अभी तक 700 करोड़ वैक्‍सीन की डोज (Vaccine Doses) लगाई जा चुकी हैं जिनमें से अकेले भारत में 100 करोड़ खुराक लगाई गई हैं. वहीं खास बात है कि 16 जनवरी 2021 से शुरू हुए इस वैक्‍सीनेशन अभियान (Vaccination Drive) ने महज 9 महीने में यह उपलब्धि हासिल की है.

कोरोना के आने से लेकर इसकी वैक्‍सीन बनने और इसे लगाने को लेकर न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्‍व में एक कौतुहल और संशय की स्थिति बनी हुई थी लेकिन भारत ने न केवल वैक्‍सीनों का निर्माण किया बल्कि विदेशों को वैक्‍सीन देने के साथ ही देश में भी टीकाकरण (Vaccination) में कीर्तिमान बना दिया. हालांकि ये सफर इतना आसान नहीं था. इस संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के कोविड-19 टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा ने कोविड-19 वैक्सीन के संदर्भ में भारत की अभी तक की यात्रा और भविष्य से संबंधित कई विषयों पर बात की है.

सवाल. देश ने दस महीने से भी कम समय में टीकाकरण में सौ करोड़ का एक अहम पड़ाव हासिल कर लिया है, यह भारत में महामारी की स्थिति को किस तरह से बदलने वाला है?

जवाब– यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है. इस पड़ाव तक पहुंचने में हमारी सबसे अधिक सहायता वैक्सीन आत्मनिर्भरता ने की. हम एक बड़ी आबादी तक वैक्सीन को सिर्फ इसलिए पहुंचा पाएं क्योंकि हमनें न सिर्फ वैक्सीन को विकसित किया बल्कि देश में ही वैक्सीन का निर्माण भी किया गया, और यह सब एक रात में प्राप्त नहीं किया गया, यह पूरे एक से डेढ़ साल की रणनीतिक सोच का परिणाम है, और निश्चित रूप से उसे साकार करने के लिए की गई कड़ी मेहनत का भी.

हमारे देश में 94 करोड़ व्यस्क लोगों की आबादी कोविड वैक्सीन के लिए पात्र है. कुछ राज्यों में व्यस्क आबादी को कोविड वैक्सीन की पहली डोज का शत प्रतिशत (सौ प्रतिशत) टीकाकरण किया जा चुका है. भारत में वैक्सीन की मौजूद आपूर्ति और उत्पादन क्षमता के अनुसार हम अगले तीन महीने में अतिरिक्त 70 से 80 करोड़ टीकाकरण कर सकते हैं.

भारत में 94 करोड़ व्यस्क आबादी है और देश की आबादी का दोनों डोज का टीकाकरण कार्यक्रम पूरा करने के लिए 190 करोड़ अतिरिक्त डोज की आवश्यकता होगी.

पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के लिए वैक्सीन हिचकिचाहट या वैक्सीन हेजिटेंसी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान किया था, कोविड टीकाकरण के बारे में गलत सूचनाओं और भ्रांतियों को दूर करने के लिए भी वैसा ही तंत्र तैयार किया गया.

भविष्य में देश में कोविड19 की स्थिति प्रमुख पांच बातों पर निर्भर करेगी, पहला, लोग कोविड अनुरूप व्यवहार (Covid Appropriate Behaviour) का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं, दूसरा वेक्सीन की उपलब्धता, तीसरा भारत में कोविड की दूसरी लहर के दौरान किनते प्रतिशत लोगों को कोविड संक्रमण हुआ, चौथा आगामी महीनों में नये वेरिएंट (New Variant) की संभावना और पांचवा इस बात पर निर्भर करेगा कि कोविड के मामले बढ़ने पर हमारा स्वास्थ्य तंत्र कितना तैयार है.

दूसरी लहर के दौरान देश की 70 से 85 प्रतिशत आबादी किसी न किसी तरह से संक्रमण (Covid Infection) का शिकार हुई, बावजूद इसके बीते चार महीने में किसी नये वेरिएंट का प्रभाव नहीं देखा गया है. वहीं हम आईसीयू बेड, ऑक्सीजन आपूर्ति (Oxygen Supply) और जीवन रक्षक उपकरणों (Life saving tools) को बढ़ाने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं. पब्लिक प्राइवेट पार्टनर शिप या पीपीई के तहत जांच सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है. अब यह देश के लोगों पर निर्भर करता है कि वह आने वाले कुछ महीनों में त्योहारों के दौरान कितनी गंभीरता से कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करते हैं. मैं यह पूरे दृढ विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अनुशासन बनाए रखने से न सिर्फ कोविड के मामलों में कमी की जा सकती है बल्कि हम सामान्य स्थिति में भी पहुंच सकते हैं.

सवाल. भारत में बच्चों की वैक्सीन का सबसे अधिक उत्पादन होता है, लेकिन देश में वैक्सीन को विकसित नहीं किया जाता था, हालांकि महामारी के दौरान हमने कई टीके विकसित किए, यह कैसे संभव हुआ?

जवाब– पिछले दो दशक में देश ने विज्ञान अनुसंधान के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने में काफी प्रगति की है. सही मायने में परिवर्तन उस समय शुरू हुआ जबकि बीते साल नये टीकों के बुनियादी अनुसंधान और विकास को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया. मार्च वर्ष 2020 में इस संदर्भ में काफी मात्रा में निवेश बढ़ाया गया और वैक्सीन शोध के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाया गया. इससे न सिर्फ वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन मिला, बल्कि उद्यमी भी नये टीकों के विकास में सहयोग देने के लिए आगे आए. अंर्तराष्ट्रीय भागीदार, स्थानीय निर्माता, वैज्ञानिक और कई वैज्ञानिक लैबोरेटरी के साथ साक्षेदारी से नई तकनीकी विकसित और हस्तांतरित की जा सकीं. परिणाम स्वरूप महामारी शुरू होने के दस महीने से भी कम समय में भारत राष्ट्रव्यापी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर पाया. आज हमारे पर कोविड वैक्सीन की एक व्यापक रेंज है जिसमें निष्क्रिय वैक्सीन, सब यूनिट वैक्सीन, वेक्टर्ड वैक्सीन, डीएनए, आरएनए वैक्सीन (RNA Vaccine) हैं, जो देश में बच्चों के साथ ही व्यस्कों के लिए और अन्य देशों के लिए भी उपलबध होगी.

सवाल- इन सभी टीकों को बहुत कम समय में विकसित करके आपातकालीन प्रयोग की अनुमति दी गई यानि वैक्सीन के दीर्घकालीन प्रभाव को जानने से पहले लगाया गया ऐसे में वैक्सीन की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

जवाब– वैज्ञानिकों ने टीकों के संभावित दुष्प्रभावों और प्रभावों पर वर्ष 2020 के जून- जुलाई महीने से ही मंत्रणा करनी शुरू कर दी थी. इसी वर्ष सितंबर से अक्टूबर महीने के बीच भारत में कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों (Covid Vaccine Side Effects) का पता लगाने के लिए एक अतिरिक्त विशेषज्ञों का पैनल एईएफआई (एडवर्स इफेक्ट्स फॉलोविंग इम्यूनाइेशन) बनाया गया, जिसकी सहायता से राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर पाए एईएफआई या वेक्सीन के दुष्प्रभाव के किसी भी मामले को तुरंत पहचाना गया. इस पैनल में जनरल फिजिशियन, पल्मोनोलॉजिस्ट, कॉर्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया. वर्ष 2020 दिसंबर के अंत तक एईएफआई के सदस्यों के लिए वैक्सीन के दुष्प्रभावों का पता लगाने के लिए देशभर जांच और आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्रशिक्षिण शिविर आयोजित किए गए और टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने से पहले लगभग सभी को प्रशिक्षण दिया जा चुका था. इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी सूची तैयार की गई, जिसमें वैक्सीन के बाद अभी तक एडवर्स इफेक्ट के रूप में जानी जाने वाली मेडिकल स्थितियों को शामिल किया गया, लेकिन सूची में कुछ अतिरिक्त ऐसी शर्ते भी जोड़ी गईं जो सैद्धांतिक रूप से नया टीका होने की वजह से हो सकती थीं, इन्हें एईएसआई (एडवर्स इवेंट्स ऑफ स्पेशनल इंटरेस्ट) नाम से जाना गया.

पेरिफेरल और जिला अस्पतालों के टीकाकरण केन्द्र पर काम करने वाले डॉक्टर और नर्सों को वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया, और बताया गया कि किस तरह वैक्सीन की किसी भी प्रतिकूल घटना पर लेकर अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत और उसकी सूचना संबंधित अधिकारी को देना और उसका प्रबंधन आदि क्यों अति आवश्यक है. इस संदर्भ में बच्चों के मामलों में प्रतिकूल प्रभाव से निपटने में देश के मौजूदा निगरानी अनुभवों ने काफी मदद की.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने में काफी सहायता की. डब्लूएचओ के राष्ट्रीय कार्यालय में एक वैक्सीन सुरक्षा प्रभाग है, जो तकनीकि के साथ ही संसाधन संबंधी सहायता भी देता है.

लगभग सभी टीकाकरण केन्द्रों पर वैक्सीन लगने के बाद तीस मिनट तक बैठने का बंदोबस्त किया गया. यह व्यवस्था इसलिए की गई जिससे कि टीका लगने लगने के बाद किसी भी आपाति या गंभीर स्थिति जैसे एनॉफिलिक्ट जैसे मामलों में तुरंत नजदीक के अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुचाया जा सके. इस व्यवस्था से कई लोगों की जान को बचाया जा सका. यही नहीं वैक्सीन लगने के बाद 28 दिन तक यदि किसी तरह की प्रतिकूल प्रतिक्रिया देखी जाती है तो उसे भी एईएफआई के अंर्तगत चिन्हित किया गया, और आगे की संबंधी जांच की गई जिससे यह पता लगाया जा सके कि प्रतिकूल प्रतिक्रिया वैक्सीन या टीकाकरण से संबंधित है या नहीं? टीकाकरण की नियमित निगरानी की जानकारी के लिए देशभर में 20 से 25 साइटों पर अस्पतालों और सामुदायिक जगहों पर सक्रिय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया. इससे हमें टीकाकरण के किसी भी दीर्घकालीन प्रभाव की संभावना को जानने में मदद मिलेगी.

Tags: Corona vaccination drive, Corona vaccine, ICMR

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