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lockdown diaries: 18 दिन तक एक जोड़ी कपड़े पहने, 7 दिन मम्मा से रहा दूर, भगवान किसी को मत देना कोरोना

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कोरोना से जंग लड़कर लौटे 12 साल के बच्चे विधान (बदला हुआ नाम) ने News18Hindi को बताईं कोरोना पॉज़िटिव (Corona Positive) से नेगेटिव होकर घर लौटने तक की पूरी कहानी. यहां पेश है दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाले विधान के परिवार की कहानी विधान की जुबानी.

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नई दिल्ली. "कोरोना (Covid 19) बहुत खराब है. ये मम्मा-पापा को भी बच्चों से दूर कर देता है. पिछला एक महीना बहुत गन्दा था.18 दिन तक हॉस्पिटल के एक कमरे में बन्द रहना पड़ा. वहां दिनभर कोई नहीं आता था. न खेल सकते थे, न पापा से मिल सकते थे, न किसी से बात कर पाते थे. मुझे बहुत खांसी थी लेकिन 3-4 दिन में एक बार दवा (Medicin) मिलती थी. सब बहुत खराब था. भगवान किसी को भी कोरोना मत देना."

ये बातें कोरोना से जंग लड़कर लौटे 12 साल के बच्चे विधान (बदला हुआ नाम) ने News18Hindi को बताईं. दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाले विधान की कोरोना पॉज़िटिव से नेगेटिव होकर घर लौटने तक की पूरी कहानी यहां पेश उन्हीं की जुबानी है.

12 अप्रैल को पापा को अचानक छींकें आने लगीं. फिर 14 तारीख को उनकी तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ गयी. पापा ने मुझे, दीदी और मम्मा को पास आने से मना कर दिया और वे एक कमरे में रहने लगे. पापा से दूर होने पर मुझे बहुत गुस्सा आता था लेकिन इसके बाद तो और भी ज्यादा प्रॉब्लम हो गयी. पापा ने हेल्पलाइन पर खुद ही फोन किया और दिल्ली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में टेस्ट कराकर घर आ गए और कमरे में बंद हो गए. मम्मी टेबल पर खाना रख देती थीं.

जब से लॉकडाउन हुआ था तब से मैं पापा के साथ ही रोजाना खेलता था. पापा मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं लेकिन ये सब अचानक बन्द हो गया. 18 अप्रैल को पापा की रिपोर्ट आ गयी जिसमें पॉज़िटिव बताया. पापा, मम्मा और दीदी सब रोने लगे.

इसके बाद शाम को 5 बजे एक एम्बुलेंस आयी, उसमें डॉक्टर, पुलिस, और मास्क पहनकर आये लोग थे. वो पापा को साथ ले जाने लगे. हमारे सभी पड़ौसी बालकोनी में खड़े होकर हमें देख रहे थे. मेरी मम्मा और दीदी तेज-तेज रो रहीं थीं. मैं भी रो रहा था और कह रहा था कि पापा को मत ले जाओ. तभी एक और एम्बुलेंस आई और मुझे, दीदी और मम्मा को भी ले जाने लगी.

एम्बुलेंस में बैठे लोगों ने हमसे बोला कि बस टेस्ट कर के एक घण्टे में छोड़ जाएंगे. हम लोग एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे. वहां उन्होंने हमें छोड़ दिया और पापा को हॉस्पिटल के अंदर ले गए. रात के 11 बजे थे और मुझे तेज खांसी हो रही थी. मम्मा अस्पताल वालों को डांट रही थीं कि उनका टेस्ट क्यों नहीं कर रहे. करीब आधा घण्टे बाद हम अस्पताल में अंदर गए और खाना मिला जो मुझे गन्दा लगा और मैंने नहीं खाया.

मैंने 18 दिन मम्मा ने 24 दिन एक ही कपड़े पहने

दूसरे दिन सुबह 11 बजे हमारा टेस्ट हुआ. हम तीनों को उन्होंने एक कमरे ( वार्ड) में बंद कर दिया. 21 अप्रैल को हमें कहा गया कि हम सब को कोरोना हो गया है. वो लोग हमें नीचे दूसरे कमरे में ले गए. वहां कई मरीज थे. मम्मा ने नहाने के लिए कपड़े मांगे तो उन्होंने कहा कपड़े नहीं मिलेंगे जो हैं उन्हें ही पहनो.

हमने नहाकर वो ही कपड़े पहन लिए.मम्मा और दीदी डॉक्टर और नर्सों से कपड़ों के लिए कहती रहतीं पर वे मना कर देते. 18 दिन तक मैंने और दीदी ने एक ही जोड़ी कपड़े पहनकर रखे. जबकि मम्मा ने एक ही कपड़े 24 दिन पहने. ये सब बहुत खराब था.

पापा की याद आती थी, रोना आता था

मुझे गुस्सा आता था तो मैं बैड में घूंसे मारता था. रोता भी था. मुझे पापा की बहुत याद आती थी. मेरे पास वहां खेलने के लिए भी कुछ नहीं था. मम्मा समझाती थी और कहती थी जल्दी बाहर जाएंगे. लेकिन हमें वहां कमरे से बाहर ही नहीं जाने दिया. वे लोग मुझे कभी-कभी सिरप देते थे खांसी की लेकिन दीदी को तो कोई दवा नहीं दी. वहां का खाना अच्छा नहीं लगता था. कोई हमसे बोलता भी नहीं था. डॉक्टर भी कभी कभी आते थे.

फिर मुझे और दीदी को छोड़ दिया लेकिन मम्मा को अस्पताल में रख लिया

मम्मा उनसे दोबारा टेस्ट करने के लिए रोज कहती, तो उन्होंने 15 दिन बाद फिर टेस्ट किया. जिसमें मै मुझे और दीदी को नेगेटिव बताया और घर जाने के लिए कह दिया लेकिन उन्होंने मम्मा को नहीं छोड़ा, बोले उनका टेस्ट पॉज़िटिव आया है. उस रात मैं रोता रहा कि मैं अस्पताल में ही मम्मा के पास रहूंगा, मैं उनके बिना घर नहीं जाऊंगा पर वो लोग नहीं माने. फिर मम्मा ने भी बोला मैं जाऊं वो आ जाएंगी. 7 दिन तक मैं पहली बार मम्मा के बिना रहा.

मम्मा-पापा आ गए, फिर से अच्छा लग रहा है

इतने टाइम के बाद मम्मा पापा सब घर पे हैं तो अच्छा लग रहा है. मैं अब फिर से पापा के साथ खेल सकता हूँ. मुझे कोरोना का बहुत ज्यादा समझ में तो नहीं आया लेकिन इतना तो है कि ये बीमारी किसी को भी न हो. हालांकि इससे डरना भी नहीं चाहिए, हिम्मत और सावधानी रखकर इससे हम बच भी सकते हैं.

पापा बताते हैं कि एटीएम से फैला कोरोना!

पापा ने सबको ये ही बताया कि वे 9 अप्रैल को पास के ही एटीएम से पैसे निकालने गए थे. उसके बाद ही उनकी तबियत खराब हुई. शायद उन्हें एटीएम से ही बीमारी लगी थी.

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