• Home
  • »
  • News
  • »
  • delhi-ncr
  • »
  • गाजियाबाद : फ्लैट्स की रजिस्ट्री न कराने पर 22 बिल्डरों से जवाब तलब, सरकार को हुआ करोड़ों का नुकसान

गाजियाबाद : फ्लैट्स की रजिस्ट्री न कराने पर 22 बिल्डरों से जवाब तलब, सरकार को हुआ करोड़ों का नुकसान

22 बिल्डरों ने पिछले 4 साल में 15000 फ्लैट्स बेचे हैं.

22 बिल्डरों ने पिछले 4 साल में 15000 फ्लैट्स बेचे हैं.

Ghaziabad Property News: गाजियाबाद जिले के स्टांप और रजिस्ट्री विभाग (Stamp and Registry Department) ने 22 बिल्डरों (22 Builders) को नोटिस जारी किया है. दरअसल इन बिल्डरों ने जरूरी पंजीकरण के बिना खरीदारों को फ्लैट्स का कब्जा दे दिया है, जिससे सरकार को करीब 70 करोड़ का नुकसान हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    गाजियाबाद. राजधानी दिल्‍ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के स्टांप और रजिस्ट्री विभाग (Stamp and Registry Department) ने उन 22 बिल्डरों (22 Builders) को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने जरूरी पंजीकरण के बिना खरीदारों को फ्लैट्स का कब्जा दे दिया है. इस वजह से राज्य सरकार के खजाने को राजस्व का नुकसान हुआ है. विभाग ने इससे पहले भी इस प्रकार के उल्लंघन के मामले में 18 बिल्डरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

    अधिकारियों ने बताया कि इन 22 बिल्डरों ने पिछले चार साल में करीब 15,000 फ्लैट बिना रजिस्ट्री के ही बेच दिए हैं, जिस मद में 70 करोड़ रुपये बकाया हैं. जबकि स्टांप के सहायक महानिरीक्षक केके मिश्रा ने कहा कि नियम के अनुसार, किसी संपत्ति की रजिस्ट्री बिक्री के समय करने की आवश्यकता होती है, लेकिन कई मामलों में बिल्डरों ने जानबूझकर बिक्री विलेख निष्पादित करने के बाद भी इसे रोक दिया है. इस वजह से 70 करोड़ रुपये से ज्यादा फंस गए हैं.

    विभाग ने 18 दोषी बिल्डरों के खिलाफ दर्ज कराई थी प्राथमिकी
    विभाग ने 2019 में 18 दोषी बिल्डरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन यह उन्हें रजिस्ट्रियां करवाने के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त नहीं था. मिश्रा ने कहा कि हम अब सभी दोषी बिल्डरों को नए नोटिस जारी कर रहे हैं और पुलिस एवं जिला प्रशासन के समक्ष लंबित प्राथमिकी का मामला भी उठाएंगे. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि कुछ रिएल्टर जानबूझकर बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप जीडीए और यूपी हाउसिंग बोर्ड जैसे विकास प्राधिकरण उन्हें पूर्णता प्रमाण पत्र देने से इनकार करते हैं, जो रजिस्ट्री के समय अनिवार्य होता है.

    क्‍या जानबूझ कर बिल्डर कर रहे देरी?
    स्टांप के सहायक महानिरीक्षक केके मिश्रा ने कहा, ‘बिल्डर जानबूझकर रजिस्ट्रियों में देरी करते हैं जो खरीदारों को स्वामित्व का अधिकार देते हैं और ऐसे मामलों में ये रिएल्टर संपत्तियों के वास्तविक मालिक बने रहते हैं और सिंगल-प्वाइंट बिजली कनेक्शन प्राप्त करते हैं, ताकि बढ़े हुए बिजली बिलों के माध्यम से खरीदारों को लुभा सकें. साथ ही बतया कि जिन क्षेत्रों में यह परिपाटी प्रचलित है, उनमें इंदिरापुरम, राज नगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग रिपब्लिक शामिल हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज