कोरोना काल में सेवा देने के लिए तैयार हैं ये लोग, बचाना चाहते हैं लोगों की जान

महामारी के मुश्किल दौर में विदेश से पढ़े डॉक्टर्स भी आ सकते है देश के काम. (सांकेतिक फोटो )

महामारी के मुश्किल दौर में विदेश से पढ़े डॉक्टर्स भी आ सकते है देश के काम. (सांकेतिक फोटो )

कोरोना से बिगड़ते हालातों को देखते हुए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट अब अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं और इससे स्वास्‍थ्य व्यवस्‍था को एक सहारा भी मिलेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 11:32 PM IST
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नई दिल्ली. सरकार से लेकर सिस्टम तक लगातार कोरोना (Corona) के इस आपदा काल में डॉक्टर्स (Doctors) की कमी से जूझ रहे है. इस त्रासदी के बीच एक सकारात्मक बात ये है कि देश में इस वक़्त 30000 से ज्यादा फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स हैं जो देश की सेवा करना चाहते हैं.  इन डॉक्टरों की ओर से कहा जा रहा है कि आपदा की इस घड़ी में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ़ की कमी के कारण भारत में किसी भी नागरिक की जान नहीं जाय इसे वह सुनिश्चित करना चाहते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक इस समय देश में 25000 युवा डॉक्टर्स हैं जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं. 1.3 लाख डॉक्टर्स हैं जो NEET PG की तैयारी कर रहे हैं. 30000 से ज्यादा फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स हैं जो MBBS की पढ़ाई पूरी कर एंट्रेन्स एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं.  2.2 लाख से ज्यादा नर्सेज हैं जो योग्य हैं और देश की सेवा कर सकते हैं. ये सभी नर्सेज फाइनल एग्जाम नहीं दे पाने के कारण सेवा नहीं दे पा रहे हैं.

दरअसल ये बहस तेज हुई है 23 अप्रैल 2021 को जारी नेशनल मेडिकल कमीशन की एक ड्रॉफ्ट को लेकर, जिस ड्रॉफ्ट में कहा गया है कि विदेश से मेडिकल की शिक्षा लेकर आने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट देश में तभी प्रैक्टिस या सवास्थ्य सेवा दे सकते हैं जब वे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम पास कर लें. हालांकि देश भर के बुद्धिजीवी इस विषय पर अपनी-अपनी राय रख रहे है. इसी कड़ी में रूस एजुकेशन के वाईस चेयरमैन और सेवानिवृत्त एयर मार्शल डॉक्टर  पवन कपूर का कहना है कि देश में फिलहाल सवास्थ्य सेवाओं की जरूरत है, जिसे देखते हुए डॉक्टर्स, नर्सेज और सहायक सवास्थ्य कर्मियों को मौका देना चाहिए.

कपूर ने कहा कि इंजेक्शन दवाई , स्वास्थ्य उपकरण और हॉस्पिटल बेड समेत अस्पतालों की संख्या तो बढ़ाई जा सकती है. जिसको लेकर सरकार गंभीर भी है, लेकिन जरूरत के हिसाब से डॉक्टर्स की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा. सरकार चाहे तो फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट और नर्सेज की सेवाएं ले सकती है, ताकि देशवासियों की जान बचाई जा सके. हालांकि सरकार और सिस्टम इस वक्त सबसे ज्यादा पब्लिक हेल्थ केअर पर फोकस कर रहा है. सरकार की मंशा है कि कैसे देश में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए मेडिकल क्षेत्र के सभी दक्ष लोगों की सेवाएं ली जा सकें.
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