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  • मौत सामने होने के बाद भी 'बेखौफ' पार कर रहे रेलवे पटरियां, दिल्‍ली में 9 महीने में 358 मौतें, जानें कहां है बुरा हाल

मौत सामने होने के बाद भी 'बेखौफ' पार कर रहे रेलवे पटरियां, दिल्‍ली में 9 महीने में 358 मौतें, जानें कहां है बुरा हाल

दिल्‍ली में रेलवे पटरियां पार करते वक्त 9 महीने में 358 मौतें.

दिल्‍ली में रेलवे पटरियां पार करते वक्त 9 महीने में 358 मौतें.

Death on Railway Tracks: दिल्‍ली में रेलवे पटरियों को पार करते हुए पिछले 9 महीने में 350 से ज्‍यादा लोग जान गंवा चुके हैं. इस दौरान सब्‍जी मंडी और सराय रोहिल्ला पर सबसे अधिक मौतें हुई हैं. यही नहीं, दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) के सामने असली चुनौती मृतकों की पहचान करना है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में रेलवे पटरियों (Railway Tracks) को पार करते वक्त होने वाली दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 15 सितम्बर तक 358 लोगों की मौत (Death) हुई है, जिनमें अधिकांश पुरुष हैं. वहीं, सबसे अधिक 78 मौत दिल्‍ली के सब्जी मंडी इलाके में रेल पटरियों को पार करते हुई हैं. यही नहीं, दिल्‍ली पुलिस के सामने असली चुनौती पटरी पार करते समय जान गंवाने वालों की पहचान करना है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष गत 15 सितम्बर तक रेलवे पटरियों को पार वक्त 358 व्यक्तियों की जानें गई हैं, इनमें 329 पुरुष और 29 महिलाएं शामिल हैं. रेलवे पटरियों को पार करते वक्त मौत के मुहं में समाने वालों ज्यादातर फैक्ट्री में काम करने वाले वर्कर्स और रेलवे पटरियों के निकट बसी झुग्गी बस्तियों के निवासी होते हैं.

    पुलिस के आंकड़े के अनुसार, दिल्‍ली के शव सब्जी मंडी के निकट पटरियों से सबसे अधिक 78 और सराय रोहिल्ला से 75 शव बरामद किए गए हैं. जबकि दिल्ली कैंट से 65, हजरत निजामुद्दीन से 51 और पुरानी दिल्ली से 50 शव मिले हैं. इसके अलावा आनंद विहार और नई दिल्ली के निकट स्थित पटरियों से क्रमश: 32 और 8 शव प्राप्त हुए हैं.

    अब तक सिर्फ 257 शवों की हुई पहचान
    अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर बार पटरियों पर शव सुबह या शाम को मिलते हैं, क्योंकि इन पटरियों को पार करके या उसके साथ-साथ सुबह कामगार फैक्ट्री जा रहे होते हैं या शाम को घर लौट रहे होते हैं. आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 257 शवों की पहचान की गई है, लेकिन 102 शवों की पहचान नहीं की जा सकी. इनमें से एक ही आत्महत्या का मामला था.

    मौत के डर के बाद भी क्‍यों पार कर रहे पटरियां?
    गत मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर नांगलोई रेलवे स्टेशन के पास कम से कम 50 स्कूली बच्चे रेलवे पटरियां पार करके घर लौटते देखे गए. जबकि कुछ मीटर की दूरी पर एक फुट ओवरब्रिज भी मौजूद है. एक अधिकारी ने कहा कि इस इलाके में कम से कम 6 स्कूल हैं. हर सुबह, बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए पटरियां पार करते हैं.

    इसके अलावा पटरियां पार करने वालों में शामिल आशीष (40) ने बताया कि पिछले 30 साल से मैं इन पटरियों को पार करके जाता रहा हूं. यहां हर कोई इसी तरह से पटरियां पार करता है. अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने नांगलोई रेलवे स्टेशन पर पिछले माह अवैध तरीके से घुसने के 20 से अधिक मामले दर्ज किए हैं. हालांकि इंडियन रेलवे एक्ट 1989 के तहत अवैध तरीके से पटरियां पार करना जुर्म की श्रेणी में आता है और इस पर 1000 रुपये का जुर्माना हो सकता है. इस गलती के लिए 6 महीने की सजा और साथ में 1000 रुपये जुर्माना या कारावास और दोनों एक साथ भुगतना पड़ सकता है.

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