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वाराणसी, लखनऊ सीट को लेकर भाजपा के ‘दिग्गजों में’ रस्साकशी

लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश की सत्ता के लिए सबसे प्रबल दावेदार बनकर चुनाव मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी में टिकटों के बंटवारे की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख सीटों बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की सीट और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी की रह चुकी लखनऊ सीट के लिए भाजपा नेतृत्व में छिड़ी जंग का असर अब वाराणसी और लखनऊ दोनों ही महानगरों में दिखने लगा है।
लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश की सत्ता के लिए सबसे प्रबल दावेदार बनकर चुनाव मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी में टिकटों के बंटवारे की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख सीटों बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की सीट और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी की रह चुकी लखनऊ सीट के लिए भाजपा नेतृत्व में छिड़ी जंग का असर अब वाराणसी और लखनऊ दोनों ही महानगरों में दिखने लगा है।

लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश की सत्ता के लिए सबसे प्रबल दावेदार बनकर चुनाव मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी में टिकटों के बंटवारे की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख सीटों बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की सीट और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी की रह चुकी लखनऊ सीट के लिए भाजपा नेतृत्व में छिड़ी जंग का असर अब वाराणसी और लखनऊ दोनों ही महानगरों में दिखने लगा है।

  • Last Updated: March 8, 2014, 11:28 PM IST
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लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश की सत्ता के लिए सबसे प्रबल दावेदार बनकर चुनाव मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी में टिकटों के बंटवारे की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख सीटों बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की सीट और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी की रह चुकी लखनऊ सीट के लिए भाजपा नेतृत्व में छिड़ी जंग का असर अब वाराणसी और लखनऊ दोनों ही महानगरों में दिखने लगा है।

वाराणसी सीट से जहां भाजपा के अंदरखाने की रणनीति के तहत पार्टी की ओर से घोषित प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी को लड़ाने की तैयारी है वहीं लखनऊ सीट पर पार्टी के ही सिटिंग सांसद और स्वयंभू घोषित अटल के उत्तराधिकारी लालजी टण्डन का पत्ता साफ कर यहां से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को उम्मीदवार बनाने की कोशिशों को झटका देने के लिए भाजपा के अन्दर ही खेमेबाजी तेज हो गई है।

वाराणसी में मुरली मनोहर जोशी समर्थकों का खेमा जोशी को ही दोबारा से वाराणसी से भाजपा उम्मीदवार बनाने के लिए सड़कों उतर चुका है वहीं पार्टी के अन्दर ही पनपा जोशी विरोधी खेमा मोदी की उम्मीदवारी के पक्ष में लामबन्दी में जुट गया है।



जोशी समर्थक वाराणसी की संकरी गलियों से मुख्य मार्गों पर जोशी के समर्थन में ‘बोले काशी विश्वनाथ देंगे साथ डा. जोशी का’ पोस्टर चस्पा कर अपने सांसद की उपस्थिति दर्ज कराने को कोशिश में हैं तो दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी समर्थक बोले की इस नगरी में ‘काशी नगरी करे पुकार-नरेन्द्र मोदी इस बार’ नारे लिखे पोस्टर व बैनरों के जरिए जोशी के विरोध का इजहार और मोदी को वाराणसी से उम्मीदवार बनाने की मांग भाजपा नेतृत्व तक पहुंचाने की कवायद में हैं।
इस बीच पार्टी के भरोसेमन्द सूत्रों के अनुसार यह खबरें भी छन कर आ रहीं हैं कि जोशी वाराणसी की सीट मोदी के लिए न छोड़ने पर अड़ गए हैं। लखनऊ का भी कमोबेश यही हाल है। यहां से भाजपा के सांसद टण्डन ने भी पार्टी में खुले तौर पर जता दिया है कि वह भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के लिए लखनऊ की अपनी सीट छोड़ने को राजी नहीं है। उनक दावा है कि वह अभी इतने बूढ़े और अक्षम नहीं हुए हैं कि लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ सकें।

वारणसी और लखनऊ में सीटों की दावेदारी को लेकर हो रहे द्वंद से मोदी को देश के भावीप्रधानमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही भाजपा और उसके मातृ संगठन संघ का चिन्तित होना स्‍वाभाविक है।

मोदी को प्रदेश की धर्म नगरी वारणसी से अपना उम्मीदवार बना कर जहां संघ और भाजपा की अपने पुराने एजेण्डे अयोध्या, मथुरा और फिर काशी को दोबारा से धार देने की तैयारी को जोशी के वाराणसी सीट पर अड़ने से गहरा झटका लगने की आशंका बढ़ गई है वहीं साथ ही प्रदेश के पूर्वांचल को भगवा रंग में रंगने की उसकी कोशिशों में भी रोड़े आने की सम्‍भावनाएं प्रबल हैं। पूर्वाचल में हिन्दुओं की आबादी में सवर्णो के अलावा पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलितों की अबादी भी अच्छी तादाद में है।

यही नहीं एक दर्जन से अधिक सीटों पर मुस्लिम आबादी भी निर्णायक भूमिका में है। और शायद यही वजह इस क्षेत्र की बहुतायत सीटों पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का कब्जा है। 2009 के लोकसभा चुनाव परिणाम इसके सबूत हैं जब पूर्वांचल से लगभग नकारे जाने के चलते भाजपा को महज दस सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। पर, इस बार गुजरात के विकास पुरुष नरेन्द्र मोदी की लहर के दावों के बीच भाजपा मोदी को उत्तर प्रदेश की वाराणसी से उतार कर न केवल पूर्वांचल में अपने जनाधार को मजबूती देने की रणनीति पर है बल्कि बहुत सी सीटों को विरोधियों से झटक कर दिल्ली की राह के मुख्य केन्द्र उत्तर प्रदेश में अपनी सीटों को चालीस के आंकड़े तक पहुंचाने की जुगत में भी है।

हालांकि लखनऊ सीट पर लाल जी टण्डन की दावेदारी की बरकरारी से पार्टी नेतृत्व के लिए एक संकट अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लेकर भी है। पूर्वांचल के चन्दौली जिले के मूल निवासी राजनाथ जातीय गुणा के तहत बीते दो चुनावों से अपना गृह क्षेत्र छोड़ पश्चिम की गाजियाबाद सीट से ही लड़ते आ रहे थे। उन्हें जीत भी मिली। लेकिन देश और प्रदेश के मौजूदा राजनैतिक हालात में वह गाजियाबाद सीट को अपने लिए सुरक्षित नहीं मान रहे। वह भी गाजियाबाद छोड़ दूसरी जगह से लोकसभा में इस बार का प्रवेश दर्ज कराना चाहते हैं।

लखनऊ सीट को सबसे मुफीद मान रहे। राजनाथ की सीट बदलने की वजह के तौर पर देश के राजनीतिक क्षितिज पर धूमकेतु की तरह उभरी आम आदमी पार्टी का दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में लोक सभा चुनावों में भी मजबूत प्रभाव दिखने की प्रबल संभावना माना जा रहा है। ऐसा राजनीति पर बारीक नजर रखने वालों व अन्य जानकारों का भी मानना है। ऐसे में राजनाथ या प्रदेश का कोई दूसरा बड़ा नेता इस क्षेत्र विशेष से दूरी ही बनाए रखने में भलाई समझ रहा है। पर, लालजी टण्डन के लखनऊ सीट न छोड़ने की जिद से पार्टी नेतृत्व सकते में है।

बहरहाल जोशी-टण्डन के अड़ियल रुख से अब भाजपा के अन्दरखाने में यह भी समझा जा रहा है कि यदि दोनों ही नहीं माने तो संभावना यह भी हो सकती है कि मोदी को वाराणसी के बजाए लखनऊ सीट पर और राजनाथ को उनकी पुरानी सीट पर ही भेजा जाए। जोशी वाराणसी से ही दोबारा पार्टी उम्मीदवार रहेंगे।

हालांकि इन मसलों पर अंतिम निर्णय तो बुनियादी तौर पर संघ यानि राष्ट्रीय सेवक संघ को ही लेना है। और मौजूदा समय में उसकी तीन दिनी बैठक कर्नाटक के बंगलुरू में चल रही। वहीं के मंथन पर पार्टी के इस ताजा विवाद पर फैसला टिका है। हालांकि संघ के दिग्गज लोग यह दावा कर रहे कि यह मसला भाजपा का है वही इसका निपटारा करेगी संघ तो एक ‘सांस्कृतिक संस्था’ है।
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