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कोरोनाकाल में नन्हीं अभिजीता ने किताब लिखकर बना दिया रिकॉर्ड, मिले कई अवॉर्ड

झांसी की रहने वाली 7 साल की अभिजीता ने लॉकडाउन के दौरान लिखी किताब.
झांसी की रहने वाली 7 साल की अभिजीता ने लॉकडाउन के दौरान लिखी किताब.

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पोती दूसरी क्लास में पढ़ने वाली अभिजीता ने कोरोनाकाल में लागू लॉकडाउन के दौरान लिखी किताब. हैप्पीनेस ऑल अराउंड किताब के लिए उसे दिल्ली के प्रकाशन समूह की तरफ से मिले अवॉर्ड.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 2:13 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना के संक्रमण का डर तो अभी भी बना हुआ है, लेकिन एक दौर वह भी था जब पूरा देश ठहर गया था. लॉकडाउन की घोषणा के बाद हर कोई घरों में कैद होकर रह गया. बच्चों के स्कूल जो बंद हुए तो अब तक नहीं खुल पाए हैं. बच्चों के लिए स्कूल पूरी तरह बंद हो गए. लेकिन एक बच्ची ऐसी भी है जिसने लॉकडाउन में ही अपनी प्रतिभा का रिकॉर्ड कायम कर दिया. ये कहानी 7 साल की अभिजीता की है. अभिजीता गुप्ता राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त और सियारामशरण गुप्त की पोती है. हाल ही में उसकी लिखी किताब ने लोगों का ध्यान खींचा है. उसे कई सारे अवॉर्डों से भी नवाजा गया है.

लॉकडाउन के दौरान अभिजीता घर में ही कैद थी. टीवी और मोबाइल से दूर रहते हुए दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली इस बच्चे के मन में ख्याल उमड़ते हैं. इन्हीं ख्यालों को अभिजीता ने कॉपी में कविता के रूप में लिखना शुरू कर दिया. उसकी मां अनुप्रिया ये देखकर हैरान थीं. अनुप्रिया इंजीनियर हैं और फैमिली बिजनेस भी देखती हैं. पिता आशीष गुप्त चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. वे कहते हैं कि इकलौती बेटी ने 5 साल की उम्र में जब पहली बार कहानी लिखने की बात कही, तो परिवार में किसी को भी विश्वास नहीं हुआ. चूंकि लॉकडाउन के दौरान अभिजीता स्कूल नहीं जा रही थी और पूरे दिन खाली रहती थी. इसी दौरान उसने लिखना शुरू किया. अभिजीता ने जो लिखा उसमें सकारात्मक दृष्टिकोण साफ दिखता है. जो किताब लिखी उसमें कोविड-19 महामारी और बच्चों पर इसके प्रभाव को केंद्रित किया गया है. किताब में कुल 10 कविताएं और 4 कहानियां हैं. यह देख सभी काफी खुश थे, लेकिन अंदाजा नहीं था कि उनकी यह मेहनत और प्रतिभा उसे वर्ल्ड रिकॉर्ड और ग्रैंड मास्टर के खिताब तक पहुंचा देगी.

कविताओं की किताब पर मिले अवॉर्ड
अभिनेता ने सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हुए 'हैप्पीनेस ऑल अराउंड' किताब लिखी. इसके लिए दिल्ली स्थित इंटरनेशनल बुक आफ रिकॉर्ड्स ने उन्हें यंगेस्ट ऑथर आफ स्टोरी एंड पोयट्री बुक का अवॉर्ड दिया. वहीं, फरीदाबाद की संस्था एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने ग्रैंड मास्टर इन राइटिंग के खिताब से नवाजा. अभिजीता को यह खिताब ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया. अभिजीता मूल रूप से बुन्देलखण्ड के झांसी की रहने वाली है. वर्तमान में वह इंदिरापुरम में अपने माता-पिता के साथ रह रही है. 'हैप्पीनेस आल अराउंड' किताब लिखने के बाद अभिजीता सबसे कम उम्र की लेखिका बन गई हैं. अभिजीता ने यह किताब महज 3 महीने में लिखी है.
अभिजीता की मां अनुप्रिया अपनी बच्ची के साहित्यिक हुनर को देख बेहद खुश हैं. वे कहती हैं कि मैं उस परिवार की बहू हूं जिस परिवार का साहित्य, सरोकार और और लेखन से गहरा नाता रहा है. अभिजीता ने जब कॉपी के पन्नों पर अपने अंतर्मन के शब्दों से एक पूरी किताब को उकेर दिया तो मैं हैरान रह गई. अभिजीता ने जिस किताब को लिखा उसमें मुश्किल से एक या दो स्पेलिंग मिस्टेक थीं. मैं उसकी लिखने की क्षमता देखकर हैरान हूं. उन्होंने बताया कि अभिजीता ने अपनी पहली कहानी 'द एलिफेंट एडवाइज' लिखी थी. उसकी पहली कविता का नाम 'ए सनी डे' है.



अभिजीता कहती हैं - 'मेरे घर के भीतर सकारात्मक माहौल है और उसी पॉजीविटी के साथ में अपने विचारों को कॉपी पर उतारने की कोशिश करती हूं.' अभिजीता को रस्किन बॉन्ड और सुधा मूर्ति के बारे में पढ़ना पसंद है. वह कहती हैं, हमें दादाजी और नानाजी के साथ अपने माता पिता से लगातार संवाद कर बौद्धिक ऊर्जा प्राप्त होती है. वे हमारी प्रेरणा हैं.
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