हर 8 मिनट में एक बच्चा हो रहा है लापता, 5 सालों में दिल्ली से 41 हजार बच्चे गायब

प्रतीकात्मक फोटो

सूनी गोद भरने की चाहत, पुरानी रंजिश और मानव तस्करी के चलते बच्चों को अगवा करने या उनकी हत्या जैसी वारदातें देश में दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं.

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    देश में इन दिनों एक समस्या हर दिन बड़ी होती जा रही है, समस्या भी ऐसी कि इसकी चपेट में आने वाले परिवार का पूरा जीवन ही फिर दुख में डूबा बीतता है. यह समस्या है बच्चों का लापता होना. आंकड़ेां पर गौर किया जाए तो देश में हर 8वें मिनट एक बच्चा लापता हो रहा है. इसका मतलब यह है कि 24 घंटे के अंतराल में 180 मांओं की गोद से उनके बच्चे छीन लिए जा रहे हैं और उन्हें बिलखता हुआ छोड़ दिया जा रहा है. दिल्ली की तरफ देखा जाए तो यहां पर हाल बेहाल है. केवल पांच साल (2012 से 2017) के अंतराल में सुरक्षा का दम भरने वाली राष्ट्रीय राजधानी में 41,394 बच्चे गायब हो गए. कांग्रेस के नेता सुब्बारामी रेड्डी ने भी इस समस्या को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया.  के दौरान रा मसला है कि यह क्यों हो रहा है, इसे कर कौन रहा है और इसका हल क्या किया जा रहा है, इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट.

    सूनी गोद के चलते अपराध की ओर कदम
    बच्चों के लापता होने के कई मामले जब पुलिस ने सुलझाए तो पता चला कि इनके गायब होने के पीछे सूनी गोद रह जाना भी एक बड़ा कारण है. वजीराबाद में रहने वाली 60 साल की एक महिला मल्लिका बेगम की बेटी की गोद लंबे समय से सूनी थी. इसके चलते वह अवसाद में जा रही थी. इसको देख मल्लिका ने उसकी गोद भरने के लिए महाराष्ट्र के सरकारी अस्पताल से 5 दिन का नवजात बच्चा चुरा लिया. मल्लिका की बेटी उसे सउदी अरब ले जाने की फिराक में थी. लेकिन पुलिस ने 2 अक्टूबर 2018 को उसे गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पुलिस ने नवजात को उसके माता-पिता को सौंप दिया था.

    मानव तस्करी भी एक वजह
    इस मामले में मानव तस्करी भी एक बड़ा कारण सामने आया है. दिल्ली के लक्ष्मी विहार से 12 साल के किशोर का घर के बाहर से अपहरण कर लिया गया. परिजन ने 3-4 दिन तक तलाशने के बाद पुलिस में शिकायत दी. पुलिस ने 6 महीने की मशक्कत के बाद आखिर किशोर को ढूंढ निकाला. पूछताछ में पता चला कि बच्चे को अगवा कर एक दुकान पर रखा गया था, जहां उससे काम कराया जा रहा था.

    यौन शोषण का शिकार होते मासूम
    पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में इसी साल 11 मार्च को 12 साल का एक किशोर अचानक गायब हो गया. एक दिन तो परिजन ने खुद ही बच्चे की तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चलने पर पुलिस को इसकी सूचना दी गई. पुलिस ने खोजबीन की लेकिन पता नहीं चला. गायब होने के 12वें दिन किशोर का शव नाले में पड़ा मिला. इस दौरान पुलिस का पड़ाेसी पर शक गहराया. पूछताछ करने पर उसने सब उगल दिया. उसने बताया कि मासूम से कुकर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी. बाद में शव को बोरी में डालकर नाले में फेंक दिया.

    रंजिश में मासूमों की बली
    16 मई की शाम फतेहपुर बेरी में 6 साल के मासूम को एक युवक ने अगवा कर मार डाला. आरोपी बच्चे के पड़ोस में ही रहता था. घटना से कुछ दिन पहले बच्चे की मां का आरोपी युवक से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. महिला ने कई लोगों के बीच युवक को बुरी तरह लताड़ लगा दी थी. युवक इसी से नाराज होकर रंजिश रखने लगा था और उसने इस हत्या का अंजाम दे दिया.

    दहला देने वाले आंकड़े
    दिल्ली में लापता हुए बच्चों के आंकड़ेां पर गौर किया जाए तो सिर्फ 2017 में ही 6454 बच्चे लापता हो गए. इनमें 3915 लड़कियां और 2535 लड़के थे. सबसे ज्‍यादा मामले उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिमी दिल्ली में सामने आए.

    लगातार चला रहे हैं अभियान
    इस संबंध में पुलिस का कहना है कि लापता बच्चों को लेकर हर दिन अभियान चलाए जा रहे हैं। कई एनजीओ के साथ मिलकर बच्चों की तलाश कर उन्हें परिजन के हवाले भी किया जाता है. वहीं एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार गायब हुए बच्चे खुद ही वापस आ जाते हैं, ऐसे में पुलिस को उनकी जानकारी नहीं मिल पाती. ऐसा होने के कारण भी लापता बच्चों के आंकड़े बढ़ते जाते हैं.

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