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पत्नी से भयभीत व्यक्ति पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट, जान बचाने के लिए मांगी सुरक्षा, जानें पूरा मामला

याचिका के मुताबिक, 2019 में रिश्तों में खटास आने के बाद से याचिकाकर्ता की पत्नी अलग रह रही है.

याचिका के मुताबिक, 2019 में रिश्तों में खटास आने के बाद से याचिकाकर्ता की पत्नी अलग रह रही है.

Delhi High Court: याचिकाकर्ताओं ने अदालत से उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया है. वकील धर्मेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिका के मुताबिक, व्यक्ति की शादी 2006 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं जोकि देहरादून में अपनी मां के साथ रह रहे हैं. याचिका के मुताबिक, 2019 में रिश्तों में खटास आने के बाद से याचिकाकर्ता की पत्नी अलग रह रही है.

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नई दिल्ली. एक व्यक्ति और उसके पिता ने अलग रह रही अपनी पत्नी और उसके परिवार वालों से धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा की मांग के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है. याचिकाकर्ताओं के वकील की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने मामले की सुनवाई 21 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की. दिल्ली के नजफगढ़ निवासी व्यक्ति और उसके पिता द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया कि व्यक्ति से अलग रही उसकी पत्नी और उसके परिवार वाले उन्हें धमका रहे हैं और आरोपी कई बार उनके घर में घुसने का प्रयास कर चुके हैं.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया है. वकील धर्मेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिका के मुताबिक, व्यक्ति की शादी 2006 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं जोकि देहरादून में अपनी मां के साथ रह रहे हैं. याचिका के मुताबिक, 2019 में रिश्तों में खटास आने के बाद से याचिकाकर्ता की पत्नी अलग रह रही है.

सभी प्रासंगिक कारकों के बीच संतुलन होना चाहिए
वहीं, बीते हफ्ते दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधान के तहत पत्नी का भरण पोषण आने वाले सभी समय के लिए व्यापक दायित्व नहीं है और पति या पत्नी की परिस्थितियों में बदलाव होने पर इसे बढ़ाया या घटाया जा सकता है. न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि अंतरिम या स्थायी गुजारा भत्ता देने के पीछे का इरादा पति या पत्नी को दंडित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विवाह के नाकाम रहने के कारण आश्रित पति या पत्नी बेसहारा नहीं रह जाएं. उन्होंने कहा था कि इस संबंध में सभी प्रासंगिक कारकों के बीच संतुलन होना चाहिए.

उसके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं था
निचली अदालत के आदेश के अनुसार पति द्वारा दी जाने वाली भरण-पोषण राशि में वृद्धि के लिए एक महिला द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर फैसला करते समय अदालत ने यह टिप्पणी की थी. इस मामले में, याचिकाकर्ता ने 35,000 रुपये के मासिक भरण-पोषण का अनुरोध किया और कहा कि निचली अदालत द्वारा 3,000 रुपये की राशि तय की गई थी जो उसके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं था.

Tags: DELHI HIGH COURT, Delhi news, Delhi news updates

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