दिल्ली में इस महीने 77 हजार से ज्यादा मरीजों ने कोरोना को हराया, रिकवरी रेट हुई 87 फीसदी

दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की रिकवरी का रेट बढ़ रहा है.
दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की रिकवरी का रेट बढ़ रहा है.

दिल्ली सरकार (Delhi Government) के अस्पतालों में कोरोना संक्रमित(Corona infected) मरीजों के स्वस्थ्य होने की दर तेजी से बढ़ रही है. सितंबर महीने में एलएनजेपी अस्पताल(LNJP Hospital) में 8066 मरीजों ने कोरोना को हराया है. इस महीने रिकवरी रेट 84% से बढ़कर 87% हो गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 8:53 PM IST
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले भले ही बढ़ रहे हैं, लेकिन ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस महीने अब तक 77 हजार से ज्यादा मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं. ऐसा पहली बार है कि एक महीने से भी कम समय में इतने रोगी स्वस्थ हुए हैं. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और समय पर संक्रमितों की पहचान से यह मुमकिन हो पाया है.

दिल्ली में अबतक 2.32 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से जीत चुके हैं जंग

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में अब तक 2,32,912 लोग संक्रमण से उभर चुके हैं, इनमें से 77,234 इस माह ठीक हुए हैं. रोजाना औसतन 3500 मरीज स्वस्थ हो रहे हैं. इससे दिल्ली की रिकवरी दर भी 84 फीसदी से बढ़कर 87 हो गई है. दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, बेहतर चिकित्सा प्रबंधन से यह सफलता हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि ज्यादा जांच होने से संक्रमित मरीज ज्यादा मिल रहे हैं, लेकिन उतनी ही तेजी से रिकवर भी हो रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मरीजों की ट्रेसिंग रही है.



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एलएनजेपी हॉस्पिटल में बड़ी तादाद में कोरोना मरीजों का हो रहा है इलाज

दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) में अब तक के देश के किसी भी दूसरे अस्पतालों की अपेक्षा सबसे अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है. अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि 17 मार्च से अब तक अस्पताल से करीब कोरोना के पॉजिटिव और निगेटिव 10,775 मरीज़ ठीक होकर घर जा चुके हैं. सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीज जिनको इलाज कर भेजा जा चुका है, उनकी संख्या 8066 है. डॉ. सुरेश का कहना है कि कई मरीज़ अस्पताल में भर्ती होते हैं उसके बाद दो से तीन दिन में उनकी रिपोर्ट आती है. वहीं निगेटिव आने वाले मरीजों की 2709 है.



एलएनजेपी हॉस्पिटल में अब तक 1471 कोरोना मरीजों हो चुका है डायलिसिस

डॉ. सुरेश का कहना है कि अब तक अस्पताल में 1471 कोरोना मरीजों का डायलिसिस किया जा चुका है. अस्पताल में अब तक कोविड पीड़ित गर्भवती महिलाओं की सफल डिलीवरी की संख्या की बात करें तो अब तक सीजेरियन डिलीवरी 143 महिलाओं की कराई जा चुकी है. इसके साथ ही नार्मल डिलीवरी की बात करें तो अब तक 174 महिलाओं की डिलीवरी एलएनजेपी में की जा चुकी है, जोकि ठीक होकर अपने घर जा चुकी है.

317  कोविड पॉजिटिव महिलाओं की सफल डिलीवरी कराई गई

स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसूति के प्रोफेसर और डॉक्टर अंजली टेम्पे का कहना है कि अब 317 कोरोना पॉजिटिव महिलाओं की सफल डिलीवरी कराई जा चुकी है, जिसमें 3 से 4 बच्चों में ही कोरोना का संक्रमण पॉजिटिव पाया गया है, नहीं तो ज्यादातर बच्चें स्वस्थ्य पैदा हो रहे हैं. यह देखा गया है कि मां कोरोना पॉजिटिव है, लेकिन बच्चा निगेटिव पैदा होता है. जब पैदा होते ही बच्चा थोड़ी देर भी मां के आसपास रहता है, तो उसमें कोविड-19 होने का डर ज्यादा है.

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415 बच्चों ने कोरोना से जीती जंग

डॉ. सुरेश का कहना है कि अब तक कोविड-19 से संक्रमित 415 बच्चों का सफल इलाज किया जा चुका है जो कि ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं. इनमें से ज़्यादातर बच्चों की उम्र 12 साल से नीचे है. एक 11 साल की बच्ची को कोरोना और डेंगू दोनों था, जिसका सफल इलाज कर घर भेजा गया. अस्पताल की पीडियाट्रिक विभाग की प्रमुख डॉ. उर्मिला झांब ने बताया कि वयस्कों की तुलना में बच्चों पर इस वायरस का असर कम देखने को मिल रहा है. कोरोना का हल्का असर होने के कारण बच्चे जल्द ही ठीक हो जा रहे हैं. 415 कोविड-19 से संक्रमित बच्चों में से 70 से 80 बच्चे ही सीरियस हालत में एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हुए थे. इनमें से कुछ बच्चों में टीबी की बीमारी भी सामने आई थी. बच्चों में मृत्यु दर की बात करें तो एलएनजेपी अस्पताल में सिर्फ 3 से 4 बच्चों की ही मौत हुई है.

वहीं 12 साल तक के बच्चों के साथ अस्पताल में उनकी मां को रहने की अनुमति दी गई हैं. अधिकारी के मुताबिक, मरीजों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती हो सकती थी अगर मरीज एक या दो नहीं, बल्कि चार या आठ दिन में पता चलते. इसमें काफी हद तक सहयोग लोगों का रहा, जिन्होंने आगे आकर अपनी जांच कराई या कंट्रोल रूम में कॉल करके मदद ली.

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