Delhi Violence: राघव चड्ढा का बड़ा आरोप, कहा- गवाहों से मिले सबूत बताते हैं कि दिल्ली दंगों में Facebook का हाथ
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Delhi Violence: राघव चड्ढा का बड़ा आरोप, कहा- गवाहों से मिले सबूत बताते हैं कि दिल्ली दंगों में Facebook का हाथ
फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में सह-अभियुक्त की तरह मानना चाहिए- राघव चड्ढा

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने कहा है कि दिल्ली दंगों (Delhi Violence) में फेसबुक (Facebook) का बड़ा हाथ था. इसलिए फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में सह-अभियुक्त की तरह मानना चाहिए और उसकी जांच होनी चाहिए.

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  • Last Updated: August 31, 2020, 6:18 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने कहा है कि दिल्ली दंगों (Delhi Violence) में फेसबुक (Facebook) का बड़ा हाथ था. इसलिए फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में सह-अभियुक्त की तरह मानना चाहिए और उसकी जांच होनी चाहिए. चड्डा ने कहा, ‘स्वतंत्र जांच एजेंसी की निष्पक्ष जांच के बाद फेसबुक के खिलाफ कोर्ट में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की जानी चाहिए. अपना बचाव करने और अपना पक्ष रखने के लिए फेसबुक इंडिया के अधिकारियों को कमेटी समन जारी करेगी.’ चड्डा के मुताबिक, फेसबुक पर जिस प्रकार के मटेरियल का प्रचार किया गया कोशिश यह थी कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले दंगा हो जाए, लेकिन सफल नहीं हुए. बता दें कि सोमवार को शांति एवं सद्भाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा की अध्यक्षता में दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति की बैठक में तीन गवाहों ने उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया है.

गवाहों ने दिल्ली दंगों से संबंधित कई नए सबूत दिए- राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘समिति ने सोमवार को फेसबुक के खिलाफ की गई शिकायतों के मसले पर बैठक बुलाई थी. बैठक में समिति के सामने तीन गवाह पेश हुए, जिसमें, आवेश तिवारी, जो एक पत्रकार और एक बड़े अखबार के संपादक रहे हैं. दूसरे, कुणाल पुरोहित यह भी पत्रकार रहे हैं और व्हाट्सएप और फेसबुक से संबंधित कई सारे मसलों पर खूब अध्ययन किया है और जांच कर रिपोर्ट किया है. तीसरे, सुभाष गड़के यह भी एक पत्रकार हैं. इन्होंने फेसबुक का क्या अन्य देशों में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने में भूमिका रही है, उस पर खूब रिसर्च किया है और उनकी पॉलिसी इस कम्युनिटी स्टैंर्ड से भलीभांति परिचित है.

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अपना पक्ष रखने के लिए फेसबुक इंडिया के अधिकारियों को कमेटी समन जारी करेगी.

फेसबुक के खिलाफ गंभीर आरोप- राघव चड्ढा


राघव चड्ढा ने कहा कि बीते कुछ दिनों की सुनवाई के दौरान जो शिकायतें हमें मिली हैं, उसके आधार पर और गवाहों को सुनने और उनके समिति के सामने जो समित रखे गए. इनको पढ़ने और अध्ययन करने के बाद यह कमेटी इस प्रारंभिक विचार पर पहुंची है कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि फेसबुक का दिल्ली दंगों में हाथ था और फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में एक सह-अभियुक्त की तरह मानना चाहिए. उसकी जांच होनी चाहिए और फेसबुक सह-अभियुक्त मानते हुए जांच के बाद उसके खिलाफ कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में पेश किया जाना चाहिए. दिल्ली दंगों का मसला अभी कोर्ट में चल रहा है. यह स्वतंत्र जांच एजेंसी निष्पक्ष जांच करने के बाद यदि यह पाती है कि फेसबुक के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, उनमें वजन है, तो एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी फेसबुक के खिलाफ कोर्ट में दिल्ली दंगों के मामले में दर्ज होनी चाहिए.’

फेसबुक का भारत में कुछ और दूसरे देशों में कुछ और नियम
चड्ढा ने कहा कि समिति के सामने एक बड़ी अहम चीज सबूत के तौर पर आई है कि जो कंटेंट दो समुदायों के बीच भाई-चारा, अमन, शांति आदि को बढ़ावा देता है. उस कंटेंट को फेसबुक हटा देता है और दूसरे प्रकार का कंटेंट, जो दो समुदायों और दो धर्मों के लोगों के बीच झगड़ा-फसाद और दंगा कराने में मददगार साबित होता है, उसे ज्यादा प्रचारित करता है. यह भी आज इस कमिटी के सामने प्रदर्शित किया गया कि कैसे अमेरिका में मई के महीने में एक जॉर्ज फ्लाइड नामक शख्स की हत्या हुई, इसके बाद पूरे अमेरिका में ब्लैक लाइट्स नाम से एक आंदोलन की शुरुआत हुई और वहां पर भी एफेडन अमेरिकन समुदाय में और कुछ दूसरे समुदाय के लोगों में झड़पें और विरोध हुआ, लेकिन उसमें उस समय फेसबुक ने अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड लागू करके अपने बॉयलॉज का पालन करते हुए आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए काम किया और और आपसी भाईचारे को चोट पहुंचाने वाला जो भी कंटेंट था, उसे अपने प्लेटफार्म पर दबाया या हटा दिया.

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लेकिन, वही कानून जो उन्होंने अमेरिका में लागू किया, उसे हिन्दुस्तान में दिल्ली दंगा-2020 में फेसबुक ने नहीं लागू किया. फेसबुक का दोहरा मापदंड साफ तौर पर सामने आया और दिल्ली दंगों में फेसबुक की जो भूमिका रही है, उस पर प्रथम दृष्टया इस कमिटी ने विचार किया है कि उनको सह-अभियुक्त की तरह मानना चाहिए और जांच के बाद उनके खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट तक फाइल होनी चाहिए.
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