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नए शैक्षणिक सत्र का शुल्क भरने को राजी JNU के छात्र, हॉस्टल फीस पर 'रार' बरकरार
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Updated: January 12, 2020, 6:00 PM IST
नए शैक्षणिक सत्र का शुल्क भरने को राजी JNU के छात्र, हॉस्टल फीस पर 'रार' बरकरार
JNUSU प्रेसिडेंट आईशी घोष (फाइल फोटो)

छात्रों (Students) से कहा गया है कि अगले शैक्षणिक सत्र के वे फीस के रूप में 120 रुपये का शुल्क जमा करवा दें. हालांकि छात्रों से हॉस्टल (Hostel) की बढ़ी हुई फीस न भरने को कहा गया है.

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  • Last Updated: January 12, 2020, 6:00 PM IST
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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुई हिंसा को पूरा एक सप्ताह हो गया है. भारी विरोध के बाद अब छात्र नए शैक्षणिक सत्र का शुल्क भरने को राजी हो गए हैं. हालांकि छात्रों ने बढ़ी हुई हॉस्टल फीस (Hostel Fee) का बहिष्कार जारी रखने का फैसला लिया है. जेएनयू के छात्रों का कहना है कि जब तक फीस वृद्धि पूरी तरह वापस नहीं ली जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

चाहे कितना भी समय लगे, विरोध जारी रहेगा
छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष के मुताबिक, उन्होंने यह फैसला मानव संसाधन मंत्रालय की अपील पर लिया है. JNUSU अध्यक्ष को उम्मीद है कि इस फॉर्मूले के बाद परिसर में स्थित सामान्य हो जाएगी. उन्होंने कहा, 'जब तक फीस वृद्धि पूरी तरह वापस नहीं ली जाती, तब तक हम विरोध जारी रखेंगे. भले ही इसके लिये छह महीने लगे या फिर उससे भी अधिक समय.'

हॉस्टल की फीस नहीं भरेंगे



इस फैसले की जानकारी सभी छात्रों को भी मोबाइल संदेश के जरिए पहुंचाई जा रही है. जेएनयू छात्रा मीनाक्षी का कहना है कि उन्होंने अधिकांश छात्रों को यह जानकारी दे दी है. छात्रों से कहा गया है कि अगले शैक्षणिक सत्र के वह फीस के रूप में 120 रुपये का शुल्क जमा करवा दें. हालांकि छात्रों से हॉस्टल की बढ़ी हुई फीस न भरने को कहा गया है.

हमने उठाया पहला कदम, अब JNU प्रशासन की बारी
इससे पहले शुक्रवार को छात्रसंघ के नेताओं व मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव अमित खरे के बीच बैठक हुई थी, जिसमें अमित खरे ने छात्रों से नए सेमेस्टर में शामिल होने की अपील की थी. जेएनयू छात्रा संगीता मेहरा का कहना है, 'सचिव ने हमसे पहला कदम आगे बढ़ाने की अपील की थी.' जेएनयू छात्रों का कहना है कि सचिव अमित खरे की अपील को मानते हुए उन्होंने सेमेस्टर फीस भरने का फैसला किया है. उनका कहना है, 'हमने तो पहला कदम बढ़ा दिया, अब बारी जेएनयू प्रशासन की है. हमने जैसे मानव संसाधन मंत्रालय पर भरोसा किया है, वैसे ही प्रशासन को अपनी ओर से एक कदम आगे बढ़ाकर हमारी मांगें माननी चाहिए.'

वीसी के दावे को किया खारिज
वहीं छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष ने पुलिस व जेएनयू के कुलपति एम. जगदीश कुमार के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि 5 जनवरी से पहले ही विश्वविद्यालय का सर्वर बाधित कर दिया गया था. पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी कैमरे भी सर्वर से जुड़े थे, जिसके चलते कई स्थानों पर कैमरे काम नहीं कर रहे थे. पुलिस व प्रशासन के दावे को नकारते हुए शनिवार शाम कई छात्रों ने प्रशासन की ओर से जारी किए गए ईमेल सबूत के तौर पर सामने रखे. छात्रों का दावा है कि ये सभी ईमेल 5 जनवरी को उसी सर्वर के माध्यम से भेज गए थे.

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First published: January 12, 2020, 3:44 PM IST
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