आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सोनिया गांधी के सलाहकारों पर साधा निशाना, कही ये बातें
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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सोनिया गांधी के सलाहकारों पर साधा निशाना, कही ये बातें
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' के तहत शिवसेना-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती थी लेकिन ये मौका पार्टी ने गंवा दिया.

न्यूज18 से बात करते हुए कृष्णम ने कहा कि बीजेपी (BJP) यही चाहती थी कि शिवसेना (Shiv Sena) की सरकार महाराष्ट्र में नहीं बने और कांग्रेस ने वही किया.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 7:22 PM IST
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नई दिल्ली/मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने को लेकर समय रहते कांग्रेस (Congress) की ओर से फैसला नहीं लेने को लेकर कल्कि पीठाधीश्वर और कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के सलाहकारों को जिम्मेदार ठहराया है. न्यूज18 से बात करते हुए कृष्णम ने कहा कि बीजेपी यही चाहती थी कि शिवसेना की सरकार महाराष्ट्र में नहीं बने और कांग्रेस ने वही किया.

सोनिया गांधी के सलाहकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वैसे लोग पार्टी में निर्णय ले रहे हैं जो खुद चुनाव नहीं लड़ते और समय रहते पार्टी को फैसला नहीं लेने देते. यही राजनीतिक भूल कांग्रेस ने गोवा, मणिपुर और हाल ही में हरियाणा में भी किया है. महाराष्ट्र में कांग्रेस, 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' के तहत शिवसेना-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना सकती थी लेकिन ये मौका पार्टी ने गंवा दिया.

बीजेपी-पीडीपी साथ आ सकती है तो महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी क्यों नहीं?
आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी साथ आ सकती है तो महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी क्यों नहीं? गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रमोद कृष्णन ने कई मौकों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान दिए हैं. राहुल गांधी के इस्तीफे के वक्त भी उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं को इसके लिए जिम्मेदार बताया था. वहीं, अनुच्छेद-370 पर भी मोदी सरकार के फैसले को सही ठहराया था.
शिवसेना के साथ जाने को लेकर कांग्रेस में आम राय नहीं बन सकी 


बता दें कि दो दिनों तक दिल्ली में महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बैठकों का दौर चला, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला. सोनिया गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक तक की. महाराष्ट्र के सभी बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया, लेकिन शिवसेना के साथ जाने को लेकर आम राय नहीं बन पाई. एक तरफ जहां प्रदेश नेतृत्व शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर तैयार दिखे वहीं पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इसका खुलकर विरोध किया. पार्टी इसी उहापोह में लगी रही और इस बीच राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी.

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