Delhi Violence: फेक न्यूज पर AAP सरकार का शिकंजा, बनाई समिति, MLA भारद्वाज के हाथ में कमान
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Delhi Violence: फेक न्यूज पर AAP सरकार का शिकंजा, बनाई समिति, MLA भारद्वाज के हाथ में कमान
दिल्‍ली विधानसभा ने सोमवार को 9 सदस्‍यीय 'शांति व सद्भाव समिति' का गठन किया. (फोटो साभार: twitter)

राष्ट्रीय राजधानी इलाके में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए दिल्‍ली विधानसभा ने सोमवार को 9 सदस्‍यीय 'शांति व सद्भाव समिति' का गठन किया. मनगढ़ंत और फेक न्यूज देने वालों के ऊपर यह समिति कार्रवाई करवाने में मदद करेगी.

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नई दिल्ली. दिल्ली हिंसा की घटनाओं के बाद दिल्ली सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. राष्ट्रीय राजधानी इलाके में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए दिल्‍ली विधानसभा ने सोमवार को 9 सदस्‍यीय 'शांति व सद्भाव समिति' का गठन किया. इस समिति का नेतृत्‍व आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज कर रहे हैं. इसके गठन के बाद एमएलए सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि मनगढ़ंत और फेक न्यूज देने वालों के ऊपर यह समिति कार्रवाई करवाने में मदद करेगी.

इस तरह की फेक न्यूज प्रसारित करने वालों को 3 साल की सजा का प्रावधान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के संदेशों से समाज में दुश्मनी और नफरत की भावना बढ़ रही है.
समिति के पास इस तरह भेजी जा सकती है शिकायतदिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता करने के बाद एमएलए सौरभ भारद्वाज ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि हम जल्द ही एक फोन नंबर और एक ईमेल आईडी जारी करने जा रहे हैं, जहां लोग सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले संदेशों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इस तरह का मैसेज दिखता है तो स्क्रीन शॉट लेकर विधानसभा समिति को भेजें. जिसकी जांच विधानसभा की यह समिति करेगी.

कार्रवाई की होगी अनुशंसा
उन्होंने बताया कि ऐसी शिकायतों की जांच करने के बाद इसे कानून को लागू करने वाली संस्थाओं के पास भेजा जाएगा. भारद्वाज ने यह भी बताया कि बैठक के दौरान इस तरह का सुझाव सामने आया कि शिकायतकर्ताओं को 10,000 रुपये देकर पुरस्कृत किया जाना चाहिए. हालांकि, इनाम की राशि अभी तय नहीं की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि फेक न्यूज को चेक करने के लिए एक एजेंसी की सहायता ली जाएगी, जो इस तरह के मामले में फैक्ट चेक करेगी.



रिटायर्ड आला अधिकारियों की ले जाएगी सेवा
उन्होंने बताया कि इस समिति ने यह फैसला लिया है कि इसके लिए पुलिस के कुछ रिटायर्ड आला अधिकारियों की भी सेवाएं ली जाएगी. जिससे इस तरह के मामलों के आरोपियों से कानूनन निपटा जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि वॉट्सऐप और इस तरह के एप को संचालित करने वाली कंपनियों के अधिकारियों से भी बातचीत की जाएगी. जिनसे यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि ऐसी गतिविधियों की रोकथाम में वे कैसे मदद कर सकते हैं.

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