Analysis: झारखंड का झटका, सत्ता और संगठन दोनों को झकझोरने में लगे पीएम मोदी!

पीएम नरेंद्र मोदी ने संगठन और सरकार को सशक्त करने का प्रयास शुरू कर दिया है. (फाइल फोटो)

पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि अब 100 दिन के काम काज या फिर एक साल के रिपोर्ट कार्ड से ध्यान हटा कर सभी मंत्रियों को पूरे कार्यकाल के लिए तय किए लक्ष्यों पर काम करना होगा और उन्हें पूरा भी करना होगा.

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नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के पहले 6 महीने खासे व्यस्त रहे. पीएम मोदी ने एक के बाद एक बड़े और कड़े फैसले लिए तो दूसरी ओर विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना भी करना पड़ा. हरियाणा (Haryana) में जैसे तैसे सरकार तो बन गयी लेकिन महाराष्ट्र (Maharashtra) में विपक्ष के पैतरे भारी पड़े और झारखंड (Jharkhand) में ऐसा झटका लगा कि आला नेतृत्व सोचने पर मजबूर हो गया. उधर नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Law) को लेकर देश भर में फैली हिंसा ने भी बीजेपी (BJP) आलाकमान को चौकस कर दिया. सब जानते हैं दिल्ली की सत्ता में जनता के बड़े भारी बहुमत के साथ चुन कर भेजा है, लिहाजा उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना ज्यादा जरुरी होगा. ऐसे में कमान पीएम मोदी ने ही संभाली और जल्दी ही परत दर परत सरकार और संगठन में जोश दिखने लगा है.

सरकार को झकझोरने का काम पीएम मोदी ने झारखंड विधानसभा के नतीजों के आने के ठीक पहले ही शुरु कर दिया था. पीएम ने 21 दिसंबर को काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक बुला ली. दिल्ली में हुई इस बैठक में एजेंडा था 2024 का लक्ष्य निर्धारित करना. पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि अब 100 दिन के काम काज या फिर एक साल के रिपोर्ट कार्ड से ध्यान हटा कर सभी मंत्रियों को पूरे कार्यकाल के लिए तय किए लक्ष्यों पर काम करना होगा और उन्हें पूरा भी करना होगा. इससे उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट भीतैयार होती रहेगी. इस बैठक में पीएम मोदी द्वारा बनायी गयी ग्रुप ऑफ सेकेरेट्रीज ने अपने विभागों का प्रेजेंटेशन भी हुआ. संदेश साफ था, 'अब कमर कस लो मंत्रिमंडल के सहयोगियों चुनौती बड़ी है.'

बैठक में पीएम मोदी द्वारा बनायी गयी ग्रुप ऑफ सेकेरेट्रीज ने अपने विभागों का प्रेजेंटेशन भी हुआ.


पीएम लगा रहे हैं मंत्रियों की क्लास, दे रहे हैं होमवर्क
अभी मंत्रियों की क्लास खत्म नहीं हुई है. जनता को किए गए वायदों और सरकार द्वार निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पीएम मोदी खासे गंभीर नजर आने लगे हैं. पीएम मोदी ने काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की 2 दिनों की बैठक एक बार फिर बुलायी है. ये बैठक आज देऱ शाम शुरु होगी और 9.30 बजे राज तक चलेगी. इसमें कई मंत्रालयों के प्रेजेंटेशन भी होंगे. कल सुबह यानि 4 जनवरी की सुबह 9.30 बजे काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स फिर से मिलेगी और ये बैठक देर शाम तक चलेगी जिसमें प्रेजेंटेशन का दौर भी जारी रहेगा. बैठक का दौर यहीं नहीं थमेगा. सूत्र बताते हैं कि मकर संक्रांति से पहले यानि 13 जनवरी को एक बार फिर पीएम मोदी अपने मंत्रियों के साथ एक बड़ी बैठक करेंगे. यानि मंत्रियों को इस बात से अवगत भी करा दिया जाएगा कि अगले साढे चार साल के लिए उनका होमवर्क क्या है और दूसरे उनकी परफॉरमेंस रिव्यू भी हो जाएगी.

कार्यकर्ताओं को घर घर भेजने की तैयारी भी है शुरू
उधर संगठन में हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को हरकत में लाने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उमड़े लोगों की धार को कम करने के लिए बीजेपी ने देश भर में घर घर जाकर इसके पक्ष में जन जागरण अभियान चलाने का ऐलान कर दिया है. दिल्ली से लेकर तमाम राज्यों में सभी आला नेताओं के दौरे शुरु होंगे. कार्यकर्ताओं को लोगों के घर जाकर नागरिकता कानून के पक्ष में बाते बताने का निर्देश दिया गया है. उधर इंदौर में भी संघ की आला नेताओ की बैठक में नागरिकता कानून को लेकर जम कर मंथन हुआ. सूत्र बताते हैं कि बीजेपी के नागरिकता कानून के पक्ष में शुरु होने वाले कैंपेन में संघ भी जोर शोर से हिस्सा लेगा.

पार्टी आलाकमान का इरादा राज्यों में भी संगठनों को झकझोरने का है.


विधानसभा चुनावों में मिली हार की समीक्षा है जारी
झारखंड और दूसरे राज्यों में मिले झटकों के बाद आलाकमान उन राज्यों की समीक्षा में भी लग गया है जहां अगले 2 सालों में चुनाव होने वाले हैं. झारखंड में मुख्यमंत्री और सरकार से नाराजगी थी जिसे समय रहते निबटाया नहीं गया. ऐसे में आलाकमान पहले से ही सचेत हो गया है. ऐसे में सभी राज्यों में कमान संभाले क्षत्रपों का आंकलन भी आलाकमान कर रहा है.

इन राज्यों के संगठन पर आलाकमान की है पैनी नजर
सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान का इरादा राज्यों में भी संगठनों को झकझोरने का है. सबसे पहले नजर जाती है उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम समेत कई राज्य हैं. साथ ही यूपी में 200 विधायकों का विधानसभा में ही धरने पर बैठना, उधर बिहार में पार्टी में खींच तान तो चल ही रही है. जाहिर है उत्तराखंड जैसे राज्यों में जहां भारी बहुमत मिला था, वहां के नेतृत्व का आंकलन चल रहा है. माना जा रहा है कि आलाकमान ज्यादा देर तक नेतृत्व के मामले को लटका कर चुनावों में किरकिरी कराने के मूड में नहीं है. सूत्र बताते हैं कि इन राज्यों में शीर्ष नेतृत्व अपने स्तर पर सर्वे भी करवा रहा है ताकि अपने मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता और अलोकप्रियता का जायजा भी ले सके.

फरवरी तक कई राज्यों में नए अध्यक्ष का होगा ऐलान
फरवरी तक बीजेपी के नए अध्यक्ष का ऐलान भी हो जाएगा. कई राज्यों में संगठन चुनावों की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं. नए अध्यक्ष के आते हैं जल्दी ही नयी टीम का ऐलान भी होगा. और मंत्रियों की प्रेजेंटेशन के साथ जो उनकी परफॉर्मेंस रिव्यू चल रही है उससे संकेत तो यही आ रहे हैं कि आने वाले दिनों में पीएम मोदी की कैबिनेट में फेरबदल संभव हैं. लेकिन कब इस पर कोई अटकलें लगाना नहीं चाहता.


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