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वायु प्रदूषण से जूझ रही है दिल्ली, अभी हालात सुधरने के आसार नहीं

आपको याद होगा पहले हमारे बड़े रोज सुबह शाम घर के बाहर सड़क पर पानी डाला करते थे. बस आपको भी यही करना है. घर के बाहर सड़क को गीला करें. ऐसा करने से धूल के दूषित कण हवा में नहीं उड़ेंगे.

आपको याद होगा पहले हमारे बड़े रोज सुबह शाम घर के बाहर सड़क पर पानी डाला करते थे. बस आपको भी यही करना है. घर के बाहर सड़क को गीला करें. ऐसा करने से धूल के दूषित कण हवा में नहीं उड़ेंगे.

ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट में भारत के प्रदूषण स्तर की बहुत ही भयावह तस्वीर पेश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के विश्व के तीन सबसे बड़े हॉटस्पॉट भारत में हैं और इनमें से एक दिल्ली-एनसीआर में है.

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    दिल्ली में वायु की गुणवत्ता लगातार गिरती ही जा रही है. देश के दस सबसे प्रदूषित जगहों में से अधिकतम दिल्ली-एनसीआर की हैं. दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है. एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार दिल्ली के लोधी रोड एरिया में पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों का स्तर 280
    हो गया. जो कि वायु की गुणवत्ता 'खराब' होने की ओर संकेत करता है. सोमवार को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 367 था जो कि 'अति खराब' स्तर में आता है. यह लगातार छठां दिन है जब दिल्ली में वायु की गुणवत्ता 'अति खराब' स्थिति में रही.

    गुरुग्राम, फरीदाबाद, ग़ाज़ियाबाद व नोएडा में भी वायु की गुणवत्ता काफी खराब रही. ग़ाज़ियाबाद में तो एक्यूआई का स्तर 430 था जो कि खतरनाक स्थिति को दर्शाता है.

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    इससे पहले दिल्ली की पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने बताया था कि अलग-अलग सरकारी विभाग प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस काम नहीं कर रहे हैं. सोमवार को जारी डब्ल्यूटीओ की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि साल 2016 में घरेलू और आम वायु प्रदूषण की वजह से 15 साल से कम उम्र
    के तकरीबन छह लाख बच्चों की मौत हुई. रिपोर्ट के मुताबिक इनमें करीब 1,10,00 बच्‍चों की मौत अकेले भारत में हुई है. इसमें भी इस प्रदूषण के शिकार काफी संख्या में बच्चे हो रहे हैं.

    इस बीच ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट में भारत के प्रदूषण स्तर की बहुत ही भयावह तस्वीर पेश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के विश्व के तीन सबसे बड़े हॉटस्पॉट भारत में हैं और इनमें से एक दिल्ली-एनसीआर में है. पीएम 2.5 और ओजोन के निर्माण के लिए नाइट्रोजन ऑक्साइड जिम्मेदार होता है.

    बता दें कि वायु की गुणवत्ता लगातार खराब होने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बाहर से आने वाले पेट्रोल के 15 साल पुराने और डीजल के 10 साल पुराने वाहनों को रोकने के आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा है.

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    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति को ‘बहुत ही चिंताजनक’ बताते हुए निर्देश दिया कि पेट्रोल से चलने वाले 15 साल पुराने और डीजल से चलने वाले 10 साल वाहनों की सूची केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और परिवहन विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए.

    उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने नवंबर के शुरुआती 10 दिनों के लिए सीपीसीबी की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया है. इन अनुशंसाओं में एक से 10 नवंबर के बीच सभी तरह की निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने को कहा गया है, जिनसे निकलने वाली धूल से प्रदूषण होता है.

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    अधिकारियों ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को नहीं अपनाने पर 113 उद्योगों को बंद करने का निर्देश दिया है. उपराज्यपाल अनिल बैजल के नेतृत्व में हुई एक बैठक में अधिकारियों ने एलजी को बताया कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ 1368 कारण बताओ नोटिस और 417 को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं.

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