गैस चैंबर बनती दिल्लीः सिर्फ दिल या फेफड़े ही नहीं दिमाग पर भी गहरा असर डाल रहा है प्रदूषण

दिल्ली में एक्यूआई 500 पार कर चुका है. इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. (फाइल फोटो)
दिल्ली में एक्यूआई 500 पार कर चुका है. इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. (फाइल फोटो)

एनजीटी ने भी यह कहा कि हम उत्सव के साथ नहीं, बल्कि जीवन के साथ हैं. हम जीवन से खेलवाड़ नहीं होने देंगे. हालांकि एनजीटी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 7:53 PM IST
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नोएडा. कोविड-19 (Covid-19) के साथ-साथ दिल्ली (Delhi) का बढ़ता प्रदूषण (Pollution) यहां रहनेवालों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है. सीनियर डॉक्टर मोहसीन वली का कहना है कि यह AQI जिस तरीके से दिल्ली में 500 का नंबर पार कर गया है, यह छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए जहर है, यह जानलेवा है. हर साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच वायु प्रदूषण से दिल्ली का हाल बुरा होता है. इन तीन महीनों में हम तमाम एहतियात बरतने की बात करते है. पर उसके बाद फिर हमसब सबकुछ भूल जाते हैं. बढ़ते वायु प्रदूषण हमारे जीवन के लिए खतरनाक है और आज एनजीटी ने भी यह कहा कि हम उत्सव के साथ नहीं, बल्कि जीवन के साथ हैं. हम जीवन से खेलवाड़ नहीं होने देंगे. हालांकि एनजीटी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. डॉक्टर ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हमें ज्यादा गाड़ियां सड़क पर नहीं दौड़ानी है. धुआं नहीं करना है और उन्होंने कहा कि एयर पॉल्युशन के लिए यह जो हैंड मेड डिजास्टर है, उस पर रोक लगाना बेहद आवश्यक है. हमारा शरीर ऐसी हवा में सांस लेने के लिए नहीं बना है. उसे बिल्कुल शुद्ध हवा चाहिए. और अब जिस तरीके से हवा में प्रदूषण का मिक्चर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, यह चिंता का विषय है. अब तक दिवाली के बाद दिल्ली का प्रदूषण स्तर खतरनाक लेवल पर होता था, लेकिन आज वह इससे भी ज्यादा नजर आ रहा है.

बढ़ता वायु प्रदूषण दिमाग के लिए भी है खतरनाक

डॉक्टर वली ने कहा कि बढ़ता एयर पॉल्युशन किडनी, हृदय, लिवर, फेफड़े और आंख के साथ-साथ हमारे दिमाग पर भी असर डालता है. उन्होंने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है. उनकी याददाश्त कमजोर पड़ रही है. दिमाग थख रहा है. थकान हो रही है. त्वचा पर असर पड़ रहा है. खासकर बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर हो रहा है. उनका बीपी बढ़ रहा है. और जो लोग एयर पॉल्युशन बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, वे ज्यादातर इंडिया से बाहर छुट्टियां लेकर चले जाते हैं. फिलहाल तो वे भी कोविड-19 की वजह से अभी लोग बाहर नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में वे लोग घरों में ही प्यूरीफायर के जरिए अपनी जिंदगी का बचाव कर रहे हैं.




ग्रीन कैपिटल होने के बाद भी क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण

डॉक्टर वली ने कहा कि दिल्ली ग्रीन कैपिटल है. पर उसके बाद भी लगातार एयर पॉल्युशन हर साल दिल्ली में बढ़ता जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण है गाड़ियों की बढ़ती तादाद. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं हमारे वातावरण को दूषित कर रहा है. दूसरी वजह है दिल्ली में बढ़ता कंस्ट्रक्शन. कंस्ट्रक्शन के काम से निकलने वाला धुआं, धूल और मिट्टी वायु को प्रदूषित कर रहे हैं. नतीजा है कि दिल्ली की हवा आज खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है. डॉ. वली ने कहा कि पराली पूरे भारत की समस्या नहीं, नॉर्दन इंडिया की समस्या है. पराली भी एक कारण है लेकिन इसके साथ-साथ तमाम ऐसे कारण हैं जो दिल्ली की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं.

जेनसटे भी है प्रदूषण का बड़ा कारक

वायु को प्रदूषित करने का एक सबसे बड़ा कारण जेनसेट भी है. लगातार चलने वाले जनरेटर से निकलने वाला धुआं भी है और एक बड़ा कारण और है जिस पर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया. पीएम 1 वह पार्टिकल है जो जो बहुत छोटा है, जो हमारे जूते और चप्पल के जरिए आता है और जब कोई हवाई जहाज लैंड करता है तो टायर के घर्षण से कई गुना पार्टिकल हवा में जाता है और उसे दूषित कर देता है.

डॉक्टर ने असर और उपाय बताए
वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है और अगर आप देखें तो पोस्टमार्टम के समय दिल्ली में ऐसे कई लोगों की बॉडी मिलती है, जिनके फेफड़े बिल्कुल काले निकलते हैं.
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हमें गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को कम करना होगा. पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से ज्यादा धुआं निकलता है. हमें ईंधन के रूप में सीएनजी का इस्तेमाल बढ़ाने पर विचार करना होगा.
हम आप सभी जानते हैं कि पराली जलाना खतरनाक है. यह भी पता है कि दिल्ली एनसीआर की हवा इस पराली की वजह से भी प्रदूषि होती है. इसलिए हमें हर हाल में पराली जलाने पर पूरी तरीके से रोक लगानी चाहिए.
कंस्ट्रक्शन वर्क करनेवालों को नियमों का खूब ध्यान रखना चाहिए. कंस्ट्रक्शन वर्क से  निकलने वाली धूल-मिट्टी हवा में न मिले इसके लिए बताए गए गाइडलाइन का पालन करना चाहिए.
जबतक बेहद ज्यादा जरूरी न हो तब तक अपने घरों से बाहर न निकले और मास्क का इस्तेमाल करें जो कोविड-19 के साथ बढ़ते वायु प्रदूषण से भी हमें सुरक्षा देगा.
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