Delhi-NCR में सांस लेना हुआ मुश्किल, ‘गंभीर श्रेणी’ में पहुंचा AQI

दिल्ली में एक्यूआई 500 पार कर चुका है. इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. (फाइल फोटो)
दिल्ली में एक्यूआई 500 पार कर चुका है. इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. (फाइल फोटो)

Air Pollution: दिल्‍ली समेत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 11:00 PM IST
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नोएडा. राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली (Delhi-NCR) समेत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद में गुरुवार को वायु गुणवत्ता स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया. वायु गुणवत्ता का यह स्तर न केवल स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है बल्कि उन लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है जो पहले से ही रोगों की चपेट में हैं. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) के अनुसार दिल्ली समेत इन पांच पड़ोसी इलाकों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर भी बेहद ज्यादा बना हुआ है.

ये AQI का पैमाना
उल्लेखनीय है कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से दिल्‍ली समेत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद में वायु प्रदूषण ने लोगों को जीना मुश्किल कर दिया है.

सीपीसीबी के समीर ऐप के अनुसार, गुरुवार शाम चार बजे गाजियाबाद में पिछले 24 घंटे में वायु गुणवत्ता का स्तर 464 दर्ज किया गया. जबकि यह दिल्‍ली में 500 के पार पहुंच गया है. इसके बाद ग्रेटर नोएडा में 457, नोएडा में 450, गुड़गांव में 443 और फरीदाबाद में 416 दर्ज किया गया. जबकि बुधवार को यह स्तर गाजियाबाद में 389, ग्रेटर नोएडा में 368, नोएडा में 345, फरीदाबाद में 331 और गुड़गांव में 290 दर्ज किया गया था. ऐप के अनुसार, दिल्ली के पड़ोसी इन पांच शहरों में मुख्य प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 है. जबकि सीपीसीबी का कहना है कि वायु गुणवत्ता का स्तर ‘गंभीर’ रहने से स्वस्थ लोग भी प्रभावित होते हैं जबकि जो लोग पहले से ही बीमार हैं, उन पर बेहद गंभीर असर पड़ता है.
बढ़ता वायु प्रदूषण दिमाग के लिए भी है खतरनाक


गंगाराम के सीनियर डॉक्टर मोहसीन वली ने कहा कि बढ़ता एयर पॉल्युशन किडनी, हृदय, लिवर, फेफड़े और आंख के साथ-साथ हमारे दिमाग पर भी असर डालता है. उन्होंने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है. उनकी याददाश्त कमजोर पड़ रही है. दिमाग थक रहा है. त्वचा पर असर पड़ रहा है. खासकर बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर हो रहा है. उनका बीपी बढ़ रहा है और जो लोग एयर पॉल्युशन बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, वे ज्यादातर इंडिया से बाहर छुट्टियां लेकर चले जाते हैं. फिलहाल तो वे भी कोविड-19 की वजह से अभी लोग बाहर नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में वे लोग घरों में ही प्यूरीफायर के जरिए अपनी जिंदगी का बचाव कर रहे हैं.
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