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विशेषज्ञों की चेतावनी, Delhi-NCR में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही कहर बरपा सकती हैं ये बीमारियां

विशेषज्ञों की चेतावनी, Delhi-NCR में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही कहर बरपा सकती हैं ये बीमारियां

दिल्‍ली में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही विभिन्‍न बीमारियां का खतरा पैदा हो गया है. photo-News18english

दिल्‍ली में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही विभिन्‍न बीमारियां का खतरा पैदा हो गया है. photo-News18english

Air Pollution in Delhi-NCR: दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण स्‍तर बढ़ने के साथ ही अगर कोरोना की तीसरी लहर भी आ जाती है तो काफी खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है. पिछले साल कोरोना के दौरान बहुत कुछ पाबंदियां रहीं और लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए सावधानियां भी बरतीं, लेकिन इस बार सभी चीजें सामान्‍य रूप से खुली हुई हैं और लोग लापरवाही कर रहे हैं.

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नई दिल्‍ली. विजयादशमी के गुजरते ही दिल्‍ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में एक बार फिर प्रदूषण स्‍तर बढ़ने लगा है. इस दौरान राजधानी से सटे इलाकों में एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (AQI) तेजी से ऊपर बढ़ रहा है. आज दिल्‍ली सहित एनसीआर के कई शहरों में वायु गुणवत्‍ता (Air Quality) काफी खराब मिली है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है. वहीं, इन हालातों पर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ अब चेतावनी दे रहे हैं.

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र का कहना है कि ठंड का मौसम आते ही रेस्पिरेटरी बीमारियां (Respiratory Illnesses) बढ़ने लगती हैं. वहीं जब प्रदूषण स्‍तर (Pollution Level) ऊंचा होने लगता है तो ये बीमारियां काफी खतरनाक हो जाती हैं. सर्दी का मौसम आने पर अक्‍सर हार्ट अटैक (Heart Attack) और ब्रेन स्‍ट्रोक (Brain Stroke) के मामले तेजी से बढ़ते हैं. वहीं, दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण के जो हालात अभी पैदा हुए हैं. उसके बाद कई बीमारियां बढ़ने की संभावना और हो गई है. इनमें फेफड़ों की बीमारियां सीओपीडी (COPD), श्‍वसन संबंधी बीमारियां जैसे दमा या अस्‍थमा, सीने में दर्द और हीमोपटाइसिस यानी बलगम में खून आना, तपेदिक या टीबी (TB), फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) आदि.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि कोरोना भी एक रेस्पिरेटरी बीमारी है. इसने भी लोगों के फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाया है. कोरोना से ठीक हुए मरीजों के फेफड़ों में अभी भी कोई न कोई सिंड्रोम या पोस्‍ट कोविड इफेक्ट (Post Covid Effect) के रूप में बीमारियां देखी जा रही हैं. ऐसे में अब प्रदूषण स्‍तर बढ़ने से ऐसे मरीजों के सामने काफी दिक्‍कतें आ सकती हैं. यहां तक कि बड़ों से लेकर बच्‍चों तक में सांस संबंधी रोग या पोस्‍ट कोविड इफैक्‍ट उभरकर सामने आ सकते हैं. बच्‍चों में न्‍यूमोनिया (Pneumonia) संबंधी रोग सामने आ सकते हैं. शरीर में ऑक्‍सीजन (Oxygen) की कमी होने से अन्‍य कई परेशानियां हो सकती हैं.

वे कहते हैं कि ठंड के मौसम में प्रदूषण के बढ़ने से बीमारियों को फलने-फूलने के लिए उचित माहौल मिलता है. ऐसे में मान लीजिए अगर कोरोना की तीसरी लहर भी आ जाती है तो कितनी खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है. पिछले साल कोरोना के दौरान बहुत कुछ पाबंदियां रहीं और लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए सावधानियां भी बरतीं लेकिन इस बार सभी चीजें सामान्‍य रूप से खुली हुई हैं. वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी इस बार काफी है. पंजाब, हरियाणा, उत्‍तराखंड और दिल्‍ली में भी पराली जलाने को लेकर इंतजामों के बावजूद पूरी तरह रोक नहीं लगी है. लिहाजा प्रदूषण बढ़ने से हालात खराब होने की आशंका जताई जा सकती है.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि ऐसे नाजुक समय में लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सभी गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए और कोविड अनुरूप व्‍यवहार जैसे मास्‍क (Mask) पहनना, हाथों को बार-बार धोना, घरों से बाहर कम से कम निकलना, बाहर जाते या किसी से मिलते समय सावधानियां बरतना जरूरी है. मास्‍क सिर्फ कोरोना ही नहीं बल्कि प्रदूषण से बचाने का भी प्रमुख हथियार है.

Tags: Air pollution, Air pollution delhi, Central pollution control board, Respiratory Syncytial Virus

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