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Pollution: दिल्‍ली-एनसीआर में इस बार फिर गहरा सकता है प्रदूषण, पंजाब में पराली के लिए नाकाफी इंतजाम

पंजाब में पराली जलाने के कारण हर साल दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण की चादर तन जाती है. इस बार पंजाब ने पराली प्रबंधन के लिए काफी इंतजाम किए हैं.

पंजाब में पराली जलाने के कारण हर साल दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण की चादर तन जाती है. इस बार पंजाब ने पराली प्रबंधन के लिए काफी इंतजाम किए हैं.

Air pollution in Delhi-NCR: पंजाब के पटियाला, संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब, तरन तारन, मोगा और मानसा को सबसे अधिक प्रभावित जिलों की श्रेणी में रखा गया है. इन जिलों में पिछले साल 4000 से ज्‍यादा पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई थीं.

  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली. सितंबर गुजरने के साथ ही दिल्‍ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) को लेकर चिंता शुरू हो जाती है. सांसों को घोंटने वाला यह संकट सिर्फ राजधानी दिल्‍ली को ही नहीं, बल्कि आसपास के शहरों को भी अपनी जद में ले लेता है. हर साल का सबसे बड़ा संकट बन चुके इस प्रदूषण को लेकर पंजाब के खेतों में जलने वाली पराली को जिम्‍मेदार ठहराया जाता है. पिछले साल पंजाब में धान की पराली को खेतों में ही जला देने के मामलों में 44 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. वहीं विशेषज्ञों की मानें तो इस साल पंजाब सरकार की ओर से पराली जलाने (Stubble Burning) पर रोक लगाई गई है लेकिन इंतजाम नाकाफी होने के चलते इस साल भी दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण गहराने की आशंका है.

पंजाब में पराली जलाने के रोकने के इंतजामों को लेकर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्‍य सचिव करुनेश गर्ग का कहना है कि राज्‍य के अधिक प्रभावित गांवों में पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए 8500 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं. इसके साथ ही आग की घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं. जिनसे डाटा लेकर मोबाइल एप से डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा. वहीं सम्बन्धित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को जरूरी हिदायतें पहले ही जारी कर दी गई हैं कि इन गांवों में विशेष ध्यान दिया जाए, जहां पिछले सीजन के दौरान हर पराली को आग लगाने की 25 से अधिक घटनाएं घटीं थीं.

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हर साल सर्दियों में दिल्‍ली में वायु प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

गर्ग कहते हैं कि नोडल अधिकारी किसानों को पराली जलाने से परहेज करने के प्रति जागरूक करने के अलावा धान की कटाई के बाद के कार्यों पर भी नजर रखेंगे. पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, सहकारिता, राजस्व, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, कृषि, बागबानी और भूमि संरक्षण सहित अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी किसान बैठकें, पराली क निपटारे के लिए मशीनों का बंदोबस्त करना, गांवों में प्रचार सामग्री बांटने का काम करेंगे.

पराली के लिए नाकाफी हैं इंतजाम

इस साल पराली प्रबंधन को लेकर न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में पंजाब सरकार के नोडल अधिकारी और कृषि विभाग में संयुक्‍त निदेशक मनमोहन कालिया कहते हैं कि धान के बचे हुए हिस्‍से को खेतों में जलाने से रोकने के लिए सरकार की ओर से काफी व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं. लेकिन इंतजामों की बात करें तो वे पर्याप्‍त नहीं हैं. पराली को निपटाने के लिए जितने बजट की मांग की गई थी, केंद्र सरकार की ओर से उसका एक तिहाई ही राज्‍य को दिया गया है. पिछले तीन वर्षों में पंजाब सरकार ने काफी मेहनत की और किसानों के लिए 76,626 कृषि मशीनें या यंत्र सप्लाई किए. ये मशीनें किसानों को 50 से 80 फीसदी की सब्सिडी पर दी गईं. आज ये स्थिति है कि बड़ी संख्‍या में किसान ये मशीनें लेने के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन राज्‍य सरकार के पास उनकी मांगें पूरी करने के लिए संसाधन ही नहीं हैं.

कालिया कहते हैं कि इस एक ही समय में फसल की बुवाई और बिजाई का काम होने के चलते निश्चित समय के लिए हर गांव में ज्‍यादा मशीनों की जरूरत होती है. इसी को देखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से एक लाख और मशीनों की मांग की थी, ताकि किसानों की मांग के अनुरूप सप्‍लाई हो सके. लेकिन केंद्र की ओर से सिर्फ एक तिहाई बजट मिलने के कारण इस साल एक लाख की मांग की जगह सिर्फ 31 हजार मशीनें ही और उपलब्‍ध कराई जा सकेंगी. मशीनें लेने आ रहे सभी लोगों को इस बार मशीनें नहीं मिल सकेंगी.

किसानों का विरोध प्रदर्शन भी प्रदूषण की वजह

कृषि विशेषज्ञ और वरिष्‍ठ पत्रकार ओम प्रकाश कुशवाह का कहना है कि जहां तक पराली जलाने की बात है, तो पिछले साल कृषि बिलों के विरोध में किसानों ने खेतों में जगह-जगह पराली जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था. वहीं इस साल की बात करें तो किसान अभी भी दिल्‍ली-एनसीआर में धरने पर बैठे हुए हैं. किसान लगातार अपनी मांगों पर अड़े हैं ऐसे में आशंका है कि विरोध के चलते पहले की तरह किसान खेतों में पराली जलाने की प्रक्रिया दोहरा सकते हैं और दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण स्‍तर बढ़ सकता है.

पंजाब में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल 44 फीसदी बढ़ गई थीं. (सांकेतिक फोटो)

पंजाब में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल 44 फीसदी बढ़ गई थीं. (सांकेतिक फोटो)

इस बारे में कालिया कहते हैं कि जैसा कि कई रिपोर्ट में भी कहा गया था कि पंजाब में पिछले साल 44 फीसदी ज्‍यादा पराली जलाई गई, लेकिन अगर मात्रा को देखें तो पिछले साल पराली जलाने की मात्रा कम थी हालांकि विरोध के चलते स्‍थानों की संख्‍या ज्‍यादा थी. इस बार किसानों से ऐसा न करने की अपील की जा रही है.

पिछले साल ये जिले थे हॉटस्‍पॉट

पंजाब राज्‍य के पटियाला, संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब, तरन तारन, मोगा और मानसा को सबसे अधिक प्रभाविज जिलों की श्रेणी में रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक इन जिलों में पिछले सीजन में सबसे ज्‍यादा पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं. पिछले साल भी पराली जलाने पर रोक थी और किसानों से मशीनों का इस्‍तेमाल करने की अपील की गई थी, लेकिन कई जिलों में धान की पराली को आग लगने की 4000 से अधिक घटनाएं तक दर्ज की गई थीं. लिहाजा इस बार पराली पर कितना नियंत्रण हो पाता है यह देखना होगा.

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