लाइव टीवी

धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?
Delhi-Ncr News in Hindi

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 8, 2017, 6:09 PM IST
धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?
दिल्ली में प्रदूषण: फाइल फोटो

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक पिछले दो दिनों में आखों में जलन के करीब 30 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2017, 6:09 PM IST
  • Share this:
सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है...शहरयार की इन लाइनों को हम थोड़ा बदलकर आंखों में जलन, फेफड़ों में तूफान सा क्यों है कर देते हैं. दिल्ली में भयंकर प्रदूषण से सांसों पर लगी इमरजेंसी के हालात तो यही कह रहे हैं.

दिल्ली में जारी जहरीले स्मॉग को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने रविवार तक सभी स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है. पूरी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र इस वक्त जहरीले धुंआ का चैंबर बन गया है. हर कोई यही कह रहा है कि आंखों में इतनी जलन क्यों है. दिल्ली वाले रहेंगे कैसे? सवाल वाजिब है, लेकिन सवाल हमें खुद से पूछना चाहिए कि आखिर ये हालात पैदा क्यों हो रहे हैं. हम खुद इसके लिए कितना जिम्मेदार हैं?

ये कहते हैं वैज्ञानिक
हम सभी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं को समझ रहे हैं, लेकिन कुछ वैज्ञानिक इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार धूल को मान रहे हैं. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (आईआईटी), कानपुर की एक रिसर्च के अनुसार प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पीएम10 में सबसे ज्यादा 56 फीसदी योगदान सड़क की धूल का है. जबकि पीएम 2.5 में इसका हिस्सा 38 फीसदी है.



With Delhi being officially declared as a gas chamber by the Chief Minister Arvind Kejriwal himself, the capital is helplessly continuing to inhale toxic smoke.          प्रदूषण की वजह से सेहत खराब होने का खतरा है

इस धुंए में शामिल है ये
पीएम यानी पर्टिक्युलेट मैटर, ये हवा में वो पार्टिकल होते हैं जिस वजह से प्रदूषण फैलता है. पर्टिक्युलेट मैटर में धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. जो डस्ट, कंस्ट्रहक्शपन कार्य और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ती है. ये कण आसानी से नाक और मुंह के जरिए बॉडी के अंदर तक पहुंच कर लोगों को बीमार बनाते हैं. इस समय यही हो रहा है. धूल और धुएं से हवा जहरीली हो गई है और यह आंखों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है.

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एजेंसी सिस्टम ऑफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में पिछले 24 घंटों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत स्तर 406 और 645 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. यह सुरक्षित स्तर 60 और 100 से कई गुना अधिक है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के कई निगरानी केंद्रों ने प्रदूषण के सभी स्तर को पार कर जाने के कारण काम करना बंद कर दिया.

Air pollution in Delhi, dust, Vehicle, air pollution, Most Polluted City In The World, PM10, PM 2.5, पीएम10, पीएम 2.5, odd even formula, Air Quality, वायु गुणवत्ता, what is air pollution, iit kanpur report on delhi pollution, Central Pollution Control Board, trucks and road dust are bigger pollutants than cars in Delhi, vehicle pollution, वाहन प्रदूषण           नोएडा: महामाया फ्लाईओवर के पास रोड पर धूल ही धूल

आंखों में जलन...वाले मरीज बढ़े 

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक पिछले दो दिनों में आखों में जलन के करीब 30 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं. लोग आंखों में एलर्जी होने की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में जरूरी हो तभी बाहर निकलें, चश्मा लगाएं और ठंडे पानी से आंंख धोएं.

दिल्ली सरकार ने बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और दमा व हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों सहित ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है. इनके इससे प्रभावित होने का खतरा अधिक है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 8, 2017, 6:09 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर