Delhi Air Pollution: 1.15 करोड़ पेड़ लगे, 60 हज़ार वाहन हुए कम, फिर भी सांस फुला रहा प्रदूषण

दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए लागू होंगे कठोर नियम.
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए लागू होंगे कठोर नियम.

Air Pollution In Delhi-NCR: केन्द्र सरकार ने पराली को भी काटने के लिए किसानों को रियायत दर पर मशीन देनी शुरू कर दी है. हर साल यूपी, हरियाणा और पंजाब में 550 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा मशीन खरीदने पर खर्च किए जा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 7:59 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. सर्दियों की आमद के साथ ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में वायु प्रदूषण ने सांस फुलाना शुरू कर दिया है. बीते कुछ रोज से ही कुछ हॉटस्पॉट (Hotspot) से प्रदूषण के डराने वाले आंकड़े आने शुरू हो गए हैं. खेतों में पराली (Parali) का जलना भी प्रारंभ हो चुका है. इस बीच, दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कदम भी उठाए जा रहे हैं.

बीते 5 साल में एक करोड़ से ज़्यादा पौधे लगाए गए. ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे (Eastern peripheral expressway) बनने के बाद से दिल्ली में रोजाना आने वाले 60 हज़ार वाहन भी कम हो गए. इसके अलावा दूसरे कदम भी उठाए जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके वायु प्रदूषण (Air Pollution) कम होने का नाम नहीं ले रहा है.

20 एजेंसियों के साथ मिलकर हर साल लगाए इतने पौधे
दिल्ली विधानसभा में एक सवाल पर दिल्ली सरकार ने जवाब देते हुए बताया है कि दिल्ली वन विभाग ने 20 ग्रीन एजेंसियों के साथ मिलकर 2015 से लगातार दिल्ली में पौधे लगा रहा है. सरकार का टारगेट हर साल 10 लाख से ज़्यादा पौधे लगाने का है. अब ज़रा एक निगाह उन पौधों के नंबर पर डालिए जो दिल्ली में बीते 5 साल में लगाए गए हैं. 2015-2016 में 16.51 लाख पौधे, 2016-2017 में 24.75 लाख, 2017-2018 में 19.62 लाख, 2018-2019 में 28.95 लाख और 2019-2020  में (30.10.2019) तक 24.44 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं.
ये भी पढ़ें- दिल्ली: दूसरे धर्म की लड़की से फोन पर बात करने पर राहुल की पीट-पीटकर हत्या! 



20 हज़ार ट्रक और 40 हज़ार कारें अब नहीं आती हैं दिल्ली
136 किमी लम्बा ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे चालू हो चुका है. एक्सप्रेसवे पलवल से लेकर कुंडली (सोनीपत) तक बनाया गया है. इसका निर्माण नेशनल हाइवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने किया है. इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद करीब 20 हजार ट्रक और 40 हजार कारों का लोड दिल्ली से कम हो गया है.

ऐसे वाहन अब गाजियाबाद, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर जाने के लिए दिल्ली के अंदर से होकर नहीं जाते हैं. यूपी, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से आने वाले वाहन पलवल से एक्सप्रेसवे के जरिए गुजर जाते हैं. यहां से सीधे सोनीपत, हरियाणा में उतरते हैं. अगर उन्हें नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत जाना होता है, तो ऐसे वाहन रास्ते में बने इंटरचेंज पर उतर जाते हैं.



हर साल खरीदी जा रही हैं 550 करोड़ से ज़्यादा की मशीनें
मशीन से फसल काटने के बाद खेत में पराली बच जाती है. अगली फसल की तैयारी करने से पहले खेत साफ करने के लिए किसान इस पराली को जला देते हैं. पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलने वाली पराली का धुआं दिल्ली में भी आता है. केन्द्र सरकार ने पराली को भी काटने के लिए किसानों को रियायत दर पर मशीन देनी शुरू की है. साल 2018-19 में मशीनों के लिए 584.33 करोड़ रुपये दिए. वहीं 2019-20 में 594.14 करोड़ और 2020-21 में 548.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज