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Air Pollution: दिल्‍ली से भी ज्‍यादा प्रदूषित निकले NCR के ये तीन शहर, वजह कर देगी हैरान

सीएसई की आई रिपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि राजधानी में  प्रदूषण को काबू करने में सफलता हासिल की है. (File Photo)

सीएसई की आई रिपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि राजधानी में प्रदूषण को काबू करने में सफलता हासिल की है. (File Photo)

सीईएसई की रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्‍ली की हवा के मुकाबले उत्‍तर प्रदेश के दो बड़े शहर गाजियाबाद और नोएडा वहीं राजस्‍थान का भिवाड़ी शहर ज्‍यादा प्रदूषित है. यहां पीएम 2.5 प्रदूषक तत्वों का औसत दिल्‍ली से काफी ज्‍यादा है. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, बागपत, बुलंदशहर और गुरुग्राम का हाल भी बेहाल है.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में प्रदूषण (Pollution) और सांस लेने में हो रही तकलीफ को देखते हुए अगर आप भी एनसीआर (NCR) के किसी और शहर में बसने की योजना बना रहे हैं तो एक बार फिर सोच लीजिए. प्रदूषण से न केवल दिल्‍ली (Delhi) बल्कि एनसीआर के 26 शहर बुरी तरह प्रभावित हैं. साथ ही एनसीआर के इन तीन बड़े शहरों की हवा (Air) से भी ज्‍यादा प्रदूषित है.

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की हाल ही में कैपिटल गेन्‍स, क्‍लीन एयर एक्‍शन इन दिल्‍ली-एनसीआर: व्‍हाट नेक्‍स्‍ट नाम से आई रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्‍ली-एनसीआर के 26 शहरों में प्रदूषण स्‍तर सालाना औसत स्‍तर के मानकों से काफी ज्‍यादा है. जो काफी खतरनाक स्थिति पैदा कर रहा है. इतनी प्रदूषित हवा (Polluted Air) में लोगों का दम घुट रहा है.

सीईएसई की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि दिल्‍ली की हवा के मुकाबले उत्‍तर प्रदेश के दो बड़े शहर गाजियाबाद (Ghaziabad) और नोएडा (Noida) वहीं राजस्‍थान का भिवाड़ी (Bhiwadi) शहर ज्‍यादा प्रदूषित है. यहां पीएम 2.5 प्रदूषक तत्वों का औसत दिल्‍ली से काफी ज्‍यादा है. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद (Faridabad), बागपत, बुलंदशहर और गुरुग्राम (Gurugram) का हाल भी बेहाल है.



आंकड़े बताते हैं कि दिल्‍ली में पीएम 2.5 का सालाना औसत स्‍तर 106 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. जबकि गाजियाबाद का सबसे ज्‍यादा 123 है. इसके बाद दूसरे नंबर पर भिवाड़ी है जहां पीएम 2.5 का स्‍तर 110 है. तीसरे नंबर पर नोएडा है यहां 107 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. ऐसे में प्रदूषण के मामले में दिल्‍ली चौथे नंबर पर है. जहां तक सामान्‍य स्‍तर की बात है तो पीएम 2.5 का स्‍तर अधिकतम 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए लेकिन इन शहरों में ये कई गुना ज्‍यादा है.
ये है इन शहरों में दिल्‍ली से ज्‍यादा प्रदूषण की बड़ी वजह

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के वायु प्रदूषण विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्‍याय ने न्‍यूज 18 हिंदी को बताया कि यूपी के दो और राजस्‍थान के एक शहर के प्रदूषण में दिल्‍ली से भी आगे रहने की एक बड़ी वजह यह है कि यहां कोयले का इस्‍तेमाल प्रतिबंधित नहीं है. तमाम नियमों के बावजूद अचरज है कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कड़ाई कम है. एक और जो वजह है वह यह है कि यहां ग्रीन कवर कम है जबकि कंस्‍ट्रक्‍शन लगातार बढ़ रहा है. वहीं दिल्‍ली की तरह ही इन शहरों में आबादी बढ़ने के साथ ही ट्रैफिक भी लगातार बढ़ रहा है.

दिलचस्‍प है कि बीते कुछ समय में दिल्‍ली से इन शहरों में मूव करने वालों या बाहर से आकर दिल्‍ली के बजाय गाजियाबाद और नोएडा में बसने वालों की संख्‍या भी बढ़ी है. यही वजह है कि पीएम 2.5 की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है. गाजियाबाद और भिवाड़ी में औद्यौगिक इकाईयां हैं और वहां भी प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कड़ाई से पालन नहीं होता. वहीं नोएडा में भी यही स्थिति कमोबेश हो रही है. एक समय में बेहद साफ रहा ग्रेटर नोएडा भी अब प्रदूषण स्‍तर में दिल्‍ली के आसपास ही है जो सही नहीं है.
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