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अलवर लिंचिंग: निशाने पर क्यों हैं मेवात के मुसलमान?
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ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 23, 2018, 3:33 PM IST
अलवर लिंचिंग: निशाने पर क्यों हैं मेवात के मुसलमान?
पशुपालन विभाग के अनुसार मेवात में 45 से 50 हजार गाय हैं.

हम आपको मेवात के कुछ गोपाल मुस्लिमों से मिलवाते हैं. यहां हर गांव में मुस्लिम गोपालक हैं, शादी में दान देते हैं गाय, फिर क्यों गौरक्षकों के निशाने पर हैं यहां के लोग!

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पहलू खान, उमर मोहम्मद, तालिम और अब अकबर उर्फ रकबर...ये अब इस दुनिया में नहीं हैं. इन्हें गोतस्करी के शक में कहीं भीड़ तो कहीं पुलिस ने मार दिया. ये लोग उस मेवात के बाशिंदे थे, जिसके हर गांव में सौ-पचास गाय मिल जाएंगी. मेवात के लोगों का मुख्य कार्य कृषि है. इसके बाद सबसे ज्यादा लोग डेयरी उद्योग से जुड़े हुए हैं.

इसीलिए 13 सितंबर 2015 को आरएसएस की विचारधारा पर चलने वाले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने यहां मुस्‍लिम गोपालकों का राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन करवाया था. जिसमें देश भर से लोग आए थे. उन्‍हें सम्‍मानित किया गया था. मेवात के मुस्‍लिमों ने कार्यक्रम में शिरकत करने आए मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल और आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार को गाय भेंट की थी.

इसके बावजूद गुरुग्राम से अलवर तक फैला यह क्षेत्र गायों की तस्‍करी के लिए बदनाम है. इस बदनामी की छाप ऐसी है कि गाय लेकर जाने वाले हर व्यक्ति को लोग तस्कर की नजर से देखते हैं.



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जबकि, अरावली पहाड़ी से घिरे इस क्षेत्र के जंगलों में अक्सर गायों का झुंड लेकर उन्हें चराते हुए कोई न कोई मुस्लिम मिल जाता है. मेवात में गाय केयर अभियान से जुड़े राजुद्दीन कहते हैं, "यहां के मुस्‍लिमों में बेटी की शादी के बाद लड़के वालों को गाय दान में देने की परंपरा है."

न्यूज18 हिंदी ने मेवली गांव निवासी पशुपालक शेर मोहम्मद से बात की. मोहम्मद ने कहा, "मेरे पास 30 गाय हैं. इनका दूध बेचकर घर का खर्च चलाता हूं."

राजुद्दीन कहते हैं, "यहां हर गांव में गोपालक हैं. दो-तीन गाय तो हजारों परिवारों के पास हैं. नगीना के रमजान के पास करीब 200, झिमरावट के मुबारक के पास 105 और यहीं के हकीमुदीन के पास 100 और चादनकी गांव के सत्तार के पास 50 गाय हैं. 80  फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस जिले के फिरोजपुर झिरका कस्‍बे के पास एक गांव है पाटखोरी. इसमें करीब एक हजार गायों का पालन पोषण हो रहा है."

पशुपालन विभाग के अनुसार मेवात में 45 से 50 हजार गाय हैं. यहां के लोगों का मूल काम ही किसानी और पशुपालन है. इसके बावजूद यहां के लोग गोहत्या के शक में मारे जा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार गोरक्षकों को नसीहत दे चुके हैं कि गौ भक्ति के नाम पर किसी की जान लेना स्‍वीकार नहीं है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आफताब अहमद कहते हैं, "यहां के लोग गायों के रक्षक हैं. वह गोकशी करने वालों के खिलाफ खड़े होते हैं. हमारी पार्टी अकबर के मारे जाने की घटना की निंदा करती है."

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पाटखोरी गांव के गोपालक जाकिर कहते हैं गाय तो हमारे पूर्वज भी रखते आए थे. गायों ने तो हमें दूध दिया है, हमारा पेट पाला है. उन्‍हें हम माता और देवी के रूप में मानते हैं. ये तो मुट्ठी भर लोग हैं, जो इस काम में संलिप्‍त हैं. उन्‍हीं की वजह से पूरा मेवात गोकशी के लिए बदनाम हो रहा है.

मेवात डेवलपमेंट एजेंसी के चेयरमैन रहे मुस्‍लिम राष्‍ट्रीय मंच के उत्तरी भारत प्रभारी खुर्शीद राजाका कहते हैं “भीड़ को कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है. हम ऐसी घटनाओें की निंदा करते हैं लेकिन मुश्किल से 200 गोतस्कर हैं उन्हें शेल्टर भी नहीं देना चाहिए. क्योंकि उनकी वजह से 20 करोड़ मुसलमान बदनाम हो रहा है.”

मेवात में तो गोतस्करों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए पंचायतें भी हुई हैं, उनका असर क्यों नहीं है? इस सवाल के जवाब में राजाका कहते हैं “अगर गाय का मांस खाने वाले लोग ही पंचायत करेंगे तो यह कैसे संभव है कि गोकशी रुक जाए. अकबर की हत्या कैसे हुई और वो गोपालक था या कुछ और, ये तो जांच का विषय है. लेकिन किसी को कानून हाथ में लेने का हक नहीं है.”

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गोकशी और गो तस्करी के लिए मेवात यूं ही नहीं कुख्यात है. शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब अलवर से लेकर फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम में गोतस्करों से पुलिस और गोरक्षकों की झड़प न होती हो. अखबारों में मेवात के बारे में हेडलाइन छपती है 'हैवन ऑफ कैटल स्मगलर'. तो क्या गोतस्करों के खिलाफ मुस्लिमों की पंचायतें,  बहिष्कार का एलान और फरमान सिर्फ दिखावे के लिए हैं?

जवाब में मेव पंचायत के संरक्षक शेर मोहम्मद कहते हैं “हमने मेवात में गोतस्करों के खिलाफ पंचायतें की हैं. गोतस्करों का अलवर की तरफ आना बंद हो गया है. अकबर गोतस्कर नहीं था.” अलवर में ही मेव मुसलमान क्यों निशाने पर हैं?  हमने शेर मोहम्मद से इसका जवाब जानना चाहा. इस पर उन्होंने कहा “राजस्थान में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम करना चाहते हैं.”

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मोहम्मद कहते हैं “हर मेव के घर में गाय है. लेकिन आज के हालात में न तो वो बेच सकता है और न ही उसे दवा करवाने ले जा सकता है. सरकार ये नियम बना दे कि मुसलमान गाय पाल ही नहीं सकता, लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकती. इसलिए अच्छा ये होगा कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जाए.”

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First published: July 23, 2018, 3:01 PM IST
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