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Lockdown: धर्मगुरु ही नहीं मुसलमानों की यह शख्सियतें भी बोलीं- घरों पर तरावीह पढ़ने में नहीं कोई हर्ज

Lockdown: धर्मगुरु ही नहीं मुसलमानों की यह शख्सियतें भी बोलीं- घरों पर तरावीह पढ़ने में नहीं कोई हर्ज

बांग्लादेश में कुछ शर्तों के साथ मस्जिदोंं में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है.

बांग्लादेश में कुछ शर्तों के साथ मस्जिदोंं में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है.

धर्मगुरू के बाद अब उन मुस्लिम शख्सियतों ने भी तरावीह को लेकर अपील की है जो मौजूदा वक्त में दीन के साथ दुनिया की जरूरतों को भी समझ रहे हैं.

    नई दिल्ली. 24 या 25 अप्रैल को रमज़ान का चांद दिखाई दे सकता है. चांद देखने के साथ ही तरावीह शुरु हो जाती है. लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए देश में लॉकडाउन का दूसरा फेज चल रहा है. मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की मनाही है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि रमज़ान में पढ़ी जाने वाली तरावीह कैसे पढ़ी जाएंगी. इस पर धर्मगुरू पहले ही अपनी राय दे चुके हैं. इसके साथ ही अब उन मुस्लिम शख्सियतों ने भी तरावीह को लेकर अपील की है जो मौजूदा वक्त में दीन के साथ दुनिया की जरूरतों को भी समझ रहे हैं. ऐसी ही कुछ शख्सियतों से बात की न्यूज18 हिन्दी ने.

    घर में तरावीह पढ़ने में नहीं कोई हर्ज: वस्तानवी

    देवबंद के पूर्व मोहातिम (वाइस चांसलर) मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी का कहना है कि जिस तरह से मौजूदा हाल में हम लोग पांचों वक्त की नमाज़ घरों में पढ़ रहे हैं, ठीक उसी तरह से तरावीह भी घरों में पढ़ी जा सकती है. इसमे कोई हर्ज नहीं है. दीनी लिहाज़ से भी ऐसी कोई बात नहीं है कि घरों में अगर तरावीह पढ़ी गई तो उसका उतना सवाब (पुण्य) नहीं मिलेगा. इसलिए लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करें.

    पदमश्री प्रोफेसर अख्तर उल वासे ने ये कहा 

    पदमश्री प्रोफेसर अख्तर उल वासे का कहना है कि देश के मौजूदा हाल को देखते हुए सरकारी और डॉक्टर का मशविरा हमे इस बात की इजाज़त नहीं देता है कि हम कहीं भी भीड़ जमा करें. इसलिए बेहतर यही होगा कि तरावीह को हम घर पर पढ़ें. जैसे नमाज़ पढ़ रहे हैं. रोज़े भी पूरे ऐहतमाम के साथ रखें. यह रमज़ान उल मुबारक का महीना है. जितना जल्दी हो सके ज़कात और सदका अदा कर दें. कोशिश करें कि इसी महीने में सदका और ज़कात अदा कर दें.

    घर में तरावीह पढ़ें, लॉकडाउन का पालन करें: डॉ. अबरार 

    एएमयू में उर्दू डिपार्टमेंट के चैयरमेन डॉ. राहत अबरार का कहना है कि आने वाले रमज़ान में घरों पर ही तरावीह पढ़ें. लेकिन ध्यान रहे कि लॉकडाउन का भी पालन होता रहे. 5-6 लोग से ज़्यादा एक साथ तरावीह न पढ़ें. जितनी जरूरत रमज़ान में तरावीह पढ़ने की है उतनी ही जरूरत लॉकडाउन का पालन करने की भी है. मौजूदा हाल में सोशल डिस्टेंसिंग देश की सबसे बड़ी जरूरत

    जानें क्या होती है रमज़ान में पढ़ी जाने वाली तरावीह

    रमज़ान का चांद दिखाई देने के साथ उसी रात से तरावीह शुरु हो जाती हैं. तराबीह के दौरान कुरान पाक पढ़ा जाता है. जिस तरह से नमाज़ होती है ठीक वैसे ही तरावीह भी पढ़ी जाती है. हाफिज़ कुरान पढ़ते हैं और उनके पीछे खड़े लोग उसे सुनते हैं. नमाज़ की तरह से सजदा भी किया जाता है. कुरान पूरा पढ़े जाने के दिन भी हर मस्जिद में अलग-अलग होते हैं. कहीं रोजाना 5-6 घंटे पढ़कर 5 दिन में पूरा पढ़ लिया जाता है तो कहीं 22 से 28 दिन में भी पूरा किया जाता है.

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    Tags: Aligarh news, Deoband, Lockdown. Covid 19, Muslim, Namaz

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